अल-अंबिया · 20/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
يُسَبِّحُونَ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ لَا يَفْتُرُونَ ۝٢٠
Yusabbihoona laila wannahaara laa yafturoon
📖 हिंदी अर्थ
रात और दिन उसकी तस्बीह किया करते हैं (और) कभी काहिली नहीं करते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُسَبِّحُونَ: वे पवित्रता बयान करते हैं, अल्लाह को हर कमी और दोष से पाक बताते हैं।
  • لَا يَفْتُرُونَ: वे कमज़ोर नहीं पड़ते, न थकते हैं और न ही इस कार्य में कोई ढील देते हैं। "फ़ुतूर" का मूल अर्थ है—तेज़ी के बाद सुस्ती या ठहराव।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन फ़रिश्तों का वर्णन कर रही है जो अल्लाह के निकट हैं। वे दिन-रात, लगातार और बिना किसी रुकावट के अल्लाह की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करते रहते हैं। न उन्हें नींद आती है, न थकान होती है, और न ही वे इस इबादत से ऊबते हैं। उनका यह कार्य उनकी फ़ितरत (स्वभाव) बन गया है—जैसे साँस लेना हमारे लिए स्वाभाविक है, वैसे ही उनके लिए तस्बीह करना। वे हर पल अल्लाह की महानता, उसकी कुदरत और उसकी बेमिसाल सिफ़ात को याद करते हैं और उसे हर ऐब से पाक बताते हैं।

यह आयत हम इंसानों के लिए एक अद्भुत सबक़ है। जब फ़रिश्ते—जो कभी गुनाह नहीं करते—इतने लगन और स्थिरता के साथ अल्लाह की इबादत में लगे रहते हैं, तो हमें भी चाहिए कि अपनी नमाज़, ज़िक्र और अच्छे कामों में पूरी लगन दिखाएँ। हमारी ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं, कभी हौसला कम होता है, लेकिन हमें सीखना चाहिए कि अल्लाह की याद में दिल को सुकून मिलता है। जो लोग अल्लाह को याद करते हैं, उनके दिल तस्कीन पाते हैं। यह आयत हमें बताती है कि इबादत में एकरूपता (constancy) कितनी प्यारी चीज़ है—चाहे थोड़ी ही सही, लेकिन लगातार। अल्लाह उन बंदों से मुहब्बत करता है जो उसे लगातार याद करते हैं, और यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत की तरफ ले जाता है। आइए, हम भी अपने दिन-रात को अल्लाह की याद से रोशन करें और उसकी रहमत के हक़दार बनें।



📜 आयत 18-22 — सूरा अल-अंबिया

18بَلْ نَقْذِفُ بِالْحَقِّ عَلَى الْبَاطِلِ فَيَدْمَغُهُ فَإِذَا هُوَ زَاهِقٌ ۚ وَلَكُمُ الْوَيْلُ مِمَّا تَصِفُونَ
बल्कि हम तो हक़ को नाहक़ (के सर) पर खींच मारते हैं तो वह बिल्कुल के सर को कुचल देता है फिर वह उसी वक्त नेस्तवेनाबूद हो जाता है और तुम पर अफ़सोस है कि ऐसी-ऐसी नाहक़ बातें बनाये करते हो
19وَلَهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَمَنْ عِندَهُ لَا يَسْتَكْبِرُونَ عَنْ عِبَادَتِهِ وَلَا يَسْتَحْسِرُونَ
हालाँकि जो लोग (फरिश्ते) आसमान और ज़मीन में हैं (सब) उसी के (बन्दे) हैं और जो (फरिश्ते) उस सरकार में हैं न तो वह उसकी इबादत की शेख़ी करते हैं और न थकते हैं
20يُسَبِّحُونَ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ لَا يَفْتُرُونَ
रात और दिन उसकी तस्बीह किया करते हैं (और) कभी काहिली नहीं करते
21أَمِ اتَّخَذُوا آلِهَةً مِّنَ الْأَرْضِ هُمْ يُنشِرُونَ
उन लोगों जो माबूद ज़मीन में बना रखे हैं क्या वही (लोगों को) ज़िन्दा करेंगे
22لَوْ كَانَ فِيهِمَا آلِهَةٌ إِلَّا اللَّهُ لَفَسَدَتَا ۚ فَسُبْحَانَ اللَّهِ رَبِّ الْعَرْشِ عَمَّا يَصِفُونَ
अगर बफ़रने मुहाल) ज़मीन व आसमान में खुदा कि सिवा चन्द माबूद होते तो दोनों कब के बरबाद हो गए होते तो जो बातें ये लोग अपने जी से (उसके बारे में) बनाया करते हैं खुदा जो अर्श का मालिक है उन तमाम ऐबों से पाक व पाकीज़ा है
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीअवतरण स्थान
20आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 20

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Saturday, October 3, 2026

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