अनुवाद — Tafsir
بسم الله الرحمن الرحيم
शब्दों के अर्थ:
- نَقْذِفُ: हम फेंकते हैं, डालते हैं।
- الْحَقّ: सत्य, ईमान, सच्चाई।
- الْبَاطِل: असत्य, शिर्क, झूठ।
- فَيَدْمَغُهُ: उसे चूर-चूर कर देता है, उसका सिर तोड़ देता है (यानी उसे पूरी तरह नष्ट कर देता है)।
- زَاهِقٌ: नष्ट होने वाला, मिट जाने वाला, समाप्त।
- الْوَيْل: विनाश, हानि, अफसोस।
- تَصِفُونَ: तुम वर्णन करते हो, गुण बताते हो।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि जिन लोगों ने अल्लाह के बारे में झूठी बातें कहीं, जैसे कि उसके लिए संतान होना या उसे किसी और चीज़ से मिलाना, उनका यह बयान महज़ बातिल (झूठ) है। अल्लाह फ़रमाते हैं: "हम सत्य को झूठ पर फेंकते हैं, यानी सच्चाई को झूठ के ऊपर डालते हैं, तो सच्चाई झूठ का सिर तोड़ देती है और उसे पूरी तरह मिटा देती है।" यानी जब सत्य आता है, तो झूठ की कोई हक़ीक़त नहीं रहती, वह ऐसे ग़ायब हो जाता है जैसे अंधेरे के सामने उजाला आ जाए।
यह अल्लाह का क़ानून है — सत्य हमेशा बुलंद होता है और झूठ हमेशा नीचा। चाहे झूठ कितना भी बड़ा और ताकतवर क्यों न लगे, सच्चाई उसे हरा देती है। इसी तरह, शिर्क और कुफ्र की तमाम बातें, चाहे वे कितनी भी चतुराई से पेश की जाएँ, अल्लाह के सत्य के सामने टिक नहीं सकतीं।
फिर अल्लाह उन लोगों को चेतावनी देते हैं जो अल्लाह के बारे में झूठी बातें कहते हैं, जैसे कि उसके लिए बीवी या बच्चा होना — उनसे कहा जा रहा है: "तुम्हारे लिए विनाश है, उन बातों की वजह से जो तुम अल्लाह के बारे में कहते हो।" यानी तुम जो अल्लाह के बारे में ऐसी बातें कहते हो जो उसकी शान के लायक़ नहीं, उसका अंजाम तुम्हारे लिए बहुत बुरा होगा।
दावत और नसीहत:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई की ताकत कभी कम नहीं होती। चाहे दुनिया में कितना भी झूठ फैला हो, अल्लाह का सत्य उसे मिटा देता है। इसलिए हमें हमेशा सच्चाई पर क़ायम रहना चाहिए, चाहे हालात कैसे भी हों। अल्लाह का वादा है कि सच्चाई ही आख़िर में जीतेगी।
और जो लोग अल्लाह के बारे में ग़लत अक़ीदा रखते हैं, उनके लिए यह आयत एक कड़ी चेतावनी है। अल्लाह पाक है, उसके लिए कोई संतान नहीं, कोई साथी नहीं। वह एक है, अकेला है, बेनियाज़ है। हमें उसे वैसे ही जानना चाहिए जैसे उसने खुद अपने बारे में बताया है — कुरआन और सुन्नत के ज़रिए।
आओ, हम अपने अक़ीदे को शिर्क और बिदअत से पाक रखें, और अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें सच्चाई पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 16-20 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 18
सूरा अल-अंबिया आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बल्कि हम तो हक़ को नाहक़ (के सर) पर खींच…सूरा आयत 18/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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