अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- جُذَاذًا (जुज़ाज़न): टुकड़े-टुकड़े, चूर-चूर
- كَبِيرًا (कबीरन): बड़ा (मूर्ति)
- يَرْجِعُونَ (यरजिऊन): वापस लौटें
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने जब अपनी क़ौम को बुत-परस्ती से बाज़ आने की दावत दी, लेकिन उन्होंने न माना, तो अल्लाह के नबी ने उन्हें एक सबक़ सिखाने का फ़ैसला किया। उन्होंने अवसर देखकर सभी छोटी मूर्तियों को टुकड़े-टुकड़े कर दिया, लेकिन सबसे बड़ी मूर्ति को वैसे ही छोड़ दिया, और उसके गले में कुल्हाड़ी लटका दी। यह काम उन्होंने इस हिकमत से किया ताकि जब क़ौम वापस आए और यह मंज़र देखे, तो वे उस बड़ी मूर्ति की तरफ रुजू करें और उससे पूछें कि यह किसने किया?
यह एक बेहद समझदारी भरा उपाय था। जब लोगों ने अपनी मूर्तियों को चूर-चूर देखा, तो वे हैरान और ग़ुस्से में आ गए और उस बड़ी मूर्ति के पास आकर पूछने लगे। इस तरह हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने उन्हें उनके ही देवताओं के सामने लज्जित किया और यह साबित कर दिया कि ये मूर्तियाँ न तो अपनी हिफ़ाज़त कर सकती हैं और न ही किसी को नुक़्सान पहुँचा सकती हैं। यह उनके लिए एक बड़ी हुज्जत (प्रमाण) थी कि जो खुद अपनी रक्षा नहीं कर सकते, वे किसी की इबादत के लायक़ कैसे हो सकते हैं?
इस घटना में हमारे लिए बड़ी सीख है कि हमें अपनी आँखें खोलकर देखना चाहिए कि क्या सच्ची इबादत के लायक़ है। अल्लाह तआला ही वह हस्ती है जो सब कुछ सुनता, देखता और कर सकता है। वही हमारी मदद कर सकता है, वही हमें रिज़्क़ देता है, वही हमें माफ़ी दे सकता है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी में किसी को भी अल्लाह का शरीक नहीं बनाना चाहिए, बल्कि सिर्फ़ उसी की इबादत करनी चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए। यही वह पैग़ाम है जो हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को दिया और यही पैग़ाम हम तक भी पहुँचता है।
📜 आयत 56-60 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 58
सूरा अल-अंबिया आयत 58 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : चुनान्चे इबराहीम ने उन बुतों को (तोड़कर) चकनाचूर कर डाला…सूरा आयत 58/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 56–60. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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