अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- آلِهَتِنَا: हमारे पूज्य देवता (बुत/मूर्तियाँ)
- الظَّالِمِينَ: अत्याचारी, ज़ालिम, सीमा से आगे बढ़ने वाले
तफ़सीर:
जब वे लोग अपने किसी काम से लौटे और अपने मूर्तियों (बुतों) को चूर-चूर और अपमानित अवस्था में देखा, तो उन पर सख्त ग़ुस्सा और हैरानी छा गई। वे एक-दूसरे से पूछने लगे: "यह किसने हमारे देवताओं के साथ ऐसा किया? जिसने भी यह किया है, वह निश्चित रूप से ज़ालिमों में से है।"
उनका यह कहना उनके अज्ञान और अंधविश्वास को दर्शाता है। वे उन निर्जीव पत्थरों को पूजते थे जो न किसी को नुकसान पहुँचा सकते हैं और न ही कोई भला कर सकते हैं। उन्होंने उन्हें "आलिहा" (पूज्य) कहकर उनका सम्मान करना अपना धर्म समझा, और जिसने उन्हें तोड़ा उसे "ज़ालिम" कहा। हालाँकि असली ज़ालिम तो वे स्वयं थे जो अल्लाह को छोड़कर बेजान पत्थरों की पूजा कर रहे थे।
यहाँ से हमें सीख मिलती है कि इंसान जब सत्य से दूर होता है, तो उसकी सोच उलटी हो जाती है। वह सत्य को असत्य और असत्य को सत्य समझने लगता है। इस आयत में उन लोगों की मानसिकता का खुलासा है जो हक़ (सत्य) को दबाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अल्लाह का फैसला हमेशा सच्चाई के पक्ष में होता है।
इस क़िस्से से हमें यह भी सबक मिलता है कि जब हमारे सामने बुराई और शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराना) हो, तो हमें हिम्मत से काम लेना चाहिए। हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अकेले दम पर झूठी मान्यताओं को चुनौती दी और अल्लाह ने उन्हें विजय प्रदान की। आज भी जो लोग सच्चाई पर डटे रहते हैं, अल्लाह उनकी मदद करता है, चाहे वे कितने ही कम क्यों न हों।
📜 आयत 57-61 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 59
सूरा अल-अंबिया आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (जब कुफ्फ़ार को मालूम हुआ) तो कहने लगे जिसने ये…सूरा आयत 59/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 57–61. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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