अल-अंबिया · 59/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
قَالُوا مَن فَعَلَ هَٰذَا بِآلِهَتِنَا إِنَّهُ لَمِنَ الظَّالِمِينَ ۝٥٩
Qaaloo man fa`ala haazaa bi aalihatinaaa innahoo laminaz zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
(जब कुफ्फ़ार को मालूम हुआ) तो कहने लगे जिसने ये गुस्ताख़ी हमारे माबूदों के साथ की है उसने यक़ीनी बड़ा ज़ुल्म किया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آلِهَتِنَا: हमारे पूज्य देवता (बुत/मूर्तियाँ)
  • الظَّالِمِينَ: अत्याचारी, ज़ालिम, सीमा से आगे बढ़ने वाले

तफ़सीर:

जब वे लोग अपने किसी काम से लौटे और अपने मूर्तियों (बुतों) को चूर-चूर और अपमानित अवस्था में देखा, तो उन पर सख्त ग़ुस्सा और हैरानी छा गई। वे एक-दूसरे से पूछने लगे: "यह किसने हमारे देवताओं के साथ ऐसा किया? जिसने भी यह किया है, वह निश्चित रूप से ज़ालिमों में से है।"

उनका यह कहना उनके अज्ञान और अंधविश्वास को दर्शाता है। वे उन निर्जीव पत्थरों को पूजते थे जो न किसी को नुकसान पहुँचा सकते हैं और न ही कोई भला कर सकते हैं। उन्होंने उन्हें "आलिहा" (पूज्य) कहकर उनका सम्मान करना अपना धर्म समझा, और जिसने उन्हें तोड़ा उसे "ज़ालिम" कहा। हालाँकि असली ज़ालिम तो वे स्वयं थे जो अल्लाह को छोड़कर बेजान पत्थरों की पूजा कर रहे थे।

यहाँ से हमें सीख मिलती है कि इंसान जब सत्य से दूर होता है, तो उसकी सोच उलटी हो जाती है। वह सत्य को असत्य और असत्य को सत्य समझने लगता है। इस आयत में उन लोगों की मानसिकता का खुलासा है जो हक़ (सत्य) को दबाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अल्लाह का फैसला हमेशा सच्चाई के पक्ष में होता है।

इस क़िस्से से हमें यह भी सबक मिलता है कि जब हमारे सामने बुराई और शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराना) हो, तो हमें हिम्मत से काम लेना चाहिए। हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अकेले दम पर झूठी मान्यताओं को चुनौती दी और अल्लाह ने उन्हें विजय प्रदान की। आज भी जो लोग सच्चाई पर डटे रहते हैं, अल्लाह उनकी मदद करता है, चाहे वे कितने ही कम क्यों न हों।



📜 आयत 57-61 — अल-अंबिया

57وَتَاللَّهِ لَأَكِيدَنَّ أَصْنَامَكُم بَعْدَ أَن تُوَلُّوا مُدْبِرِينَ
और अपने जी में कहा खुदा की क़सम तुम्हारे पीठ फेरने के बाद में तुम्हारे बुतों के साथ एक चाल चलूँगा
58فَجَعَلَهُمْ جُذَاذًا إِلَّا كَبِيرًا لَّهُمْ لَعَلَّهُمْ إِلَيْهِ يَرْجِعُونَ
चुनान्चे इबराहीम ने उन बुतों को (तोड़कर) चकनाचूर कर डाला मगर उनके बड़े बुत को (इसलिए रहने दिया) ताकि ये लोग ईद से पलटकर उसकी तरफ रूजू करें
59قَالُوا مَن فَعَلَ هَٰذَا بِآلِهَتِنَا إِنَّهُ لَمِنَ الظَّالِمِينَ
(जब कुफ्फ़ार को मालूम हुआ) तो कहने लगे जिसने ये गुस्ताख़ी हमारे माबूदों के साथ की है उसने यक़ीनी बड़ा ज़ुल्म किया
60قَالُوا سَمِعْنَا فَتًى يَذْكُرُهُمْ يُقَالُ لَهُ إِبْرَاهِيمُ
(कुछ लोग) कहने लगे हमने एक नौजवान को जिसको लोग इबराहीम कहते हैं उन बुतों का (बुरी तरह) ज़िक्र करते सुना था
61قَالُوا فَأْتُوا بِهِ عَلَىٰ أَعْيُنِ النَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَشْهَدُونَ
लोगों ने कहा तो अच्छा उसको सब लोगों के सामने (गिरफ्तार करके) ले आओ ताकि वह (जो कुछ कहें) लोग उसके गवाह रहें
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अनुवाद — अल-अंबिया 59

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Tuesday, August 18, 2026

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