अल-हज · 57/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا فَأُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ ۝٥٧
Wallazeena kafaroo wa kazzaboo bi Aayaatinaa fa ulaaa`ika lahum `azaabum muheen
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया और हमारी आयतों को झुठलाया तो यही वह (कम्बख्त) लोग हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • كَفَرُوا: इनकार किया, अविश्वास किया।
  • كَذَّبُوا: झुठलाया, झूठा कहा।
  • بِآيَاتِنَا: हमारी आयतों (निशानियों और प्रमाणों) को।
  • عَذَابٌ مُّهِينٌ: अपमानित करने वाला, ज़लील करने वाला अज़ाब।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत क़ियामत के दिन के उस फ़ैसले की ओर इशारा करती है जब अल्लाह तआला अपने बंदों के बीच पूरे न्याय के साथ फ़ैसला करेगा। उस दिन सारा अधिकार और सत्ता केवल अल्लाह के हाथ में होगी, और वही मोमिनों और काफ़िरों के बीच अंतिम निर्णय करेगा।

जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए, उसके रसूल पर विश्वास किया और अच्छे कर्म किए, उनके लिए जन्नत की नेमतें और हमेशा रहने वाला सुख है। वे उस दिन कामयाब होंगे और उनके चेहरे खुशी से चमक उठेंगे।

लेकिन जिन लोगों ने अल्लाह की वहदानियत (एकता) से इनकार किया, उसके रसूलों को झुठलाया और उसकी आयतों (क़ुरआन और उसमें मौजूद निशानियों) को नहीं माना, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। उनके लिए ऐसा अज़ाब है जो उन्हें ज़लील और अपमानित करेगा। यह अज़ाब सिर्फ दर्दनाक नहीं होगा, बल्कि उनकी रुसवाई और बेइज़्ज़ती का ज़रिया भी बनेगा, क्योंकि उन्होंने दुनिया में अल्लाह की आयतों को झुठलाकर खुद को उसकी रहमत से महरूम कर लिया।

यह आयत हमें एक बड़ी हक़ीक़त की याद दिलाती है: जो इंसान दुनिया में अल्लाह के दीन को अपनाएगा और उसकी आयतों पर अमल करेगा, वह आख़िरत में सफल होगा। और जो अल्लाह के साथ कुफ़्र करेगा और उसकी निशानियों को झुठलाएगा, वह अपने लिए रुसवाई और अज़ाब का सामान करेगा। अल्लाह तआला इंसाफ़ करने वाला है, और उसका फ़ैसला कभी ग़लत नहीं होता।

इसलिए ऐ इंसान! अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की आयतों के अनुसार ढाल, उसके रसूल की सुन्नत पर चल, और उस दिन के लिए तैयारी कर जब कोई शख़्स किसी दूसरे के काम न आएगा। अल्लाह की रहमत और उसकी जन्नत उन्हीं के लिए है जो उस पर ईमान लाएं और अच्छे कर्म करें। यही सच्ची कामयाबी है, और इसके उलट रास्ता इंसान को सिर्फ नुक़सान और शर्मिंदगी की तरफ ले जाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 55-59 — अल-हज

55وَلَا يَزَالُ الَّذِينَ كَفَرُوا فِي مِرْيَةٍ مِّنْهُ حَتَّىٰ تَأْتِيَهُمُ السَّاعَةُ بَغْتَةً أَوْ يَأْتِيَهُمْ عَذَابُ يَوْمٍ عَقِيمٍ
और जो लोग काफिर हो बैठे वह तो कुरान की तरफ से हमेशा शक ही में पड़े रहेंगे यहाँ तक कि क़यामत यकायक उनके सर पर आ मौजूद हो या (यूँ कहो कि) उनपर एक सख्त मनहूस दिन का अज़ाब नाज़िल हुआ
56الْمُلْكُ يَوْمَئِذٍ لِّلَّهِ يَحْكُمُ بَيْنَهُمْ ۚ فَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فِي جَنَّاتِ النَّعِيمِ
उस दिन की हुकूमत तो ख़ास खुदा ही की होगी वह लोगों (के बाहमी एख्तेलाफ) का फ़ैसला कर देगा तो जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे काम किए हैं वह नेअमतों के (भरे) हुए बाग़ात (बेहश्त) में रहेंगे
57وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا فَأُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया और हमारी आयतों को झुठलाया तो यही वह (कम्बख्त) लोग हैं
58وَالَّذِينَ هَاجَرُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ ثُمَّ قُتِلُوا أَوْ مَاتُوا لَيَرْزُقَنَّهُمُ اللَّهُ رِزْقًا حَسَنًا ۚ وَإِنَّ اللَّهَ لَهُوَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ
जिनके लिए ज़लील करने वाला अज़ाब है जिन लोगों ने खुदा की राह में अपने देस छोडे फ़िर शहीद किए गए या (आप अपनी मौत से) मर गए खुदा उन्हें (आख़िरत में) ज़रूर उम्दा रोज़ी अता फ़रमाएगा
59لَيُدْخِلَنَّهُم مُّدْخَلًا يَرْضَوْنَهُ ۗ وَإِنَّ اللَّهَ لَعَلِيمٌ حَلِيمٌ
और बेशक तमाम रोज़ी देने वालों में खुदा ही सबसे बेहतर है वह उन्हें ज़रूर ऐसी जगह (बेहिश्त) पहुँचा देगा जिससे वह निहाल हो जाएँगे
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अनुवाद — अल-हज 57

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Tuesday, August 18, 2026

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