अल-हज · 74/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
مَا قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَقَوِيٌّ عَزِيزٌ ۝٧٤
Maa qadrul laaha haqqa qadrih; innal laaha la Qawiyyun `Azeez
📖 हिंदी अर्थ
खुदा की जैसे क़द्र करनी चाहिए उन लोगों ने न की इसमें शक नहीं कि खुदा तो बड़ा ज़बरदस्त ग़ालिब है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِ: उन्होंने अल्लाह की उसकी सही मर्यादा के अनुसार क़द्र (प्रतिष्ठा/महिमा) नहीं की।
  • لَقَوِيٌّ عَزِيزٌ: निस्संदेह अल्लाह अत्यंत शक्तिशाली और सर्वप्रभुत्वशाली है।

व्याख्या:

इन मुशरिकों (बहुदेववादियों) ने अल्लाह की उसकी सच्ची महिमा के अनुसार क़द्र नहीं की, क्योंकि उन्होंने उसके साथ उसकी मख़लूक़ात (सृष्टि) में से कुछ को उसका साझीदार बना लिया। उन्होंने उन चीज़ों की पूजा की जो स्वयं अल्लाह की बनाई हुई हैं — पत्थर, मूर्तियाँ, या अन्य मख़लूक़ात — जबकि अल्लाह वह है जिसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया, और उनमें जो कुछ भी है, सब कुछ उसी की रचना है। उसकी क़ुदरत (शक्ति) के आगे कोई चीज़ नहीं ठहर सकती, और उसकी इज़्ज़त (प्रभुत्व) को कोई चुनौती नहीं दे सकता।

अल्लाह तआला क़वी (शक्तिशाली) है — उसकी ताक़त से ही यह विशाल ब्रह्मांड क़ायम है, और वह अज़ीज़ (सर्वप्रभुत्वशाली) है — कोई उसे मात नहीं दे सकता, कोई उसके फ़ैसले को टाल नहीं सकता। जबकि ये मूर्तियाँ और देवता जिन्हें वे पूजते हैं, वे कमज़ोर हैं, लाचार हैं, न तो कुछ पैदा कर सकते हैं और न ही किसी को नुक़सान या फ़ायदा पहुँचा सकते हैं। वे स्वयं किसी की मदद के मोहताज हैं, फिर वे किसी की मदद कैसे कर सकते हैं?

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की महिमा को सही तरीक़े से पहचानना और उसे अकेला पूजना ही सच्ची इबादत है। जो व्यक्ति अल्लाह की क़द्र को समझ लेता है, वह कभी उसके साथ किसी को शरीक नहीं करता। यही तौहीद (एकेश्वरवाद) का मूल है — यह जानना कि सारी ताक़त, सारा अधिकार और सारी बादशाहत सिर्फ़ अल्लाह की है। और यही वह पैग़ाम है जो हर मुसलमान के दिल में इत्मीनान और सुकून भर देता है, क्योंकि जब हम जानते हैं कि हमारा रब सबसे ताक़तवर है, तो हमें किसी और से डरने की ज़रूरत नहीं रहती। हम उसी पर भरोसा करते हैं, उसी से मदद माँगते हैं, और उसी की राह पर चलते हैं — यही सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 72-76 — अल-हज

72وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ تَعْرِفُ فِي وُجُوهِ الَّذِينَ كَفَرُوا الْمُنكَرَ ۖ يَكَادُونَ يَسْطُونَ بِالَّذِينَ يَتْلُونَ عَلَيْهِمْ آيَاتِنَا ۗ قُلْ أَفَأُنَبِّئُكُم بِشَرٍّ مِّن ذَٰلِكُمُ ۗ النَّارُ وَعَدَهَا اللَّهُ الَّذِينَ كَفَرُوا ۖ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ
और (ऐ रसूल) जब हमारी वाज़ेए व रौशन आयतें उनके सामने पढ़ कर सुनाई जाती हैं तो तुम (उन) काफिरों के चेहरों पर नाखुशी के (आसार) देखते हो (यहाँ तक कि) क़रीब होता है कि जो लोग उनको हमारी आयातें पढ़कर सुनाते हैं उन पर ये लोग हमला कर बैठे (ऐ रसूल) तुम कह दो (कि) तो क्या मैं तुम्हें इससे भी कहीं बदतर चीज़ बता दूँ (अच्छा) तो सुन लो वह जहन्नुम है जिसमें झोंकने का वायदा खुदा ने काफ़िरों से किया है
73يَا أَيُّهَا النَّاسُ ضُرِبَ مَثَلٌ فَاسْتَمِعُوا لَهُ ۚ إِنَّ الَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ لَن يَخْلُقُوا ذُبَابًا وَلَوِ اجْتَمَعُوا لَهُ ۖ وَإِن يَسْلُبْهُمُ الذُّبَابُ شَيْئًا لَّا يَسْتَنقِذُوهُ مِنْهُ ۚ ضَعُفَ الطَّالِبُ وَالْمَطْلُوبُ
और वह क्या बुरा ठिकाना है लोगों एक मसल बयान की जाती है तो उसे कान लगा के सुनो कि खुदा को छोड़कर जिन लोगों को तुम पुकारते हो वह लोग अगरचे सब के सब इस काम के लिए इकट्ठे भी हो जाएँ तो भी एक मक्खी तक पैदा नहीं कर सकते और कहीं मक्खी कुछ उनसे छीन ले जाए तो उससे उसको छुड़ा नहीं सकते (अजब लुत्फ है) कि माँगने वाला (आबिद) और जिससे माँग लिया (माबूद) दोनों कमज़ोर हैं
74مَا قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَقَوِيٌّ عَزِيزٌ
खुदा की जैसे क़द्र करनी चाहिए उन लोगों ने न की इसमें शक नहीं कि खुदा तो बड़ा ज़बरदस्त ग़ालिब है
75اللَّهُ يَصْطَفِي مِنَ الْمَلَائِكَةِ رُسُلًا وَمِنَ النَّاسِ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ بَصِيرٌ
खुदा फरिश्तों में से बाज़ को अपने एहकाम पहुँचाने के लिए मुन्तख़िब कर लेता है
76يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۗ وَإِلَى اللَّهِ تُرْجَعُ الْأُمُورُ
और (इसी तरह) आदमियों में से भी बेशक खुदा (सबकी) सुनता देखता है जो कुछ उनके सामने है और जो कुछ उनके पीछे (हो चुका है) (खुदा सब कुछ) जानता है
अल-हजकुरान सूची
78आयत
मदनीRevelation
74आयत

अनुवाद — अल-हज 74

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Tuesday, August 18, 2026

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