अल-मोमिनुन · 100/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
لَعَلِّي أَعْمَلُ صَالِحًا فِيمَا تَرَكْتُ ۚ كَلَّا ۚ إِنَّهَا كَلِمَةٌ هُوَ قَائِلُهَا ۖ وَمِن وَرَائِهِم بَرْزَخٌ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ ۝١٠٠
La`alleee a`malu saalihan feemaa taraktu kallaa; innahaa kalimatun huwa qaaa`iluhaa wa minw waraaa`him barzakhun ilaa Yawmi yub`asoon
📖 हिंदी अर्थ
(जवाब दिया जाएगा) हरगिज़ नहीं ये एक लग़ो बात है- जिसे वह बक रहा और उनके (मरने के) बाद (आलमे) बरज़ख़ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فِيمَا تَرَكْتُ – उस (जीवन) में जो मैंने छोड़ा / गँवाया।
  • كَلَّا – हरगिज़ नहीं, ऐसा नहीं हो सकता (रोकने और इनकार के लिए)।
  • بَرْزَخٌ – आड़ (पर्दा), एक ऐसा मध्यवर्ती स्थान जो दुनिया और आख़िरत के बीच होता है, यानी क़ब्र का जहान।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब किसी इंसान के सामने मौत आती है और उसे अपने किए हुए गुनाहों का अहसास होता है, तो वह पछतावे की हालत में कहता है: "मुझे दुनिया में वापस भेज दो, ताकि मैं अच्छे काम कर सकूँ, उस जीवन में जिसे मैंने बेकार में गँवा दिया।" वह सोचता है कि अगर उसे एक मौका और मिल जाए, तो वह अपनी सारी कमियाँ पूरी कर लेगा।

लेकिन अल्लाह तआला इसकी सख्त नफ़ी करते हुए फ़रमाता है: "हरगिज़ नहीं!" यह माँग कभी पूरी नहीं होगी। यह सिर्फ़ एक ज़बानी बात है जो वह कह रहा है, लेकिन उसके दिल में सच्ची तौबा और इरादे की पक्की नीयत नहीं है। अगर उसे दुनिया में वापस भेज दिया जाए, तो वह फिर से वही करेगा जो उसे मना किया गया था, क्योंकि उसका नफ़्स और उसकी आदतें वही रहेंगी।

इसके बाद अल्लाह तआला बताते हैं कि इन लोगों के आगे "बरज़ख़" है — यानी मौत के बाद क़ब्र का जहान, जो दुनिया और आख़िरत के बीच एक आड़ है। वे इसी बरज़ख़ में रहेंगे और क़यामत के दिन तक वहीं रुके रहेंगे। उन्हें दुनिया में लौटने का कोई रास्ता नहीं मिलेगा, क्योंकि मौत के बाद दुनिया में वापसी का दरवाज़ा हमेशा के लिए बंद हो जाता है।

दावत और नसीहत:

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। यह हमें सिखाती है कि मौत से पहले ही अपने जीवन को संवार लें। आज हमारे पास समय है, हम साँस ले रहे हैं, हमें काम करने का मौका मिल रहा है — यही हमारा असली खज़ाना है। जब मौत आ जाएगी, तो पछताने और माँगने का कोई फ़ायदा नहीं होगा।

इसलिए, प्यारे भाइयों और बहनों! आज ही अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और अच्छे कामों से भर लें। नमाज़ पढ़ें, रोज़ा रखें, लोगों की मदद करें, माफ़ी माँगें और अल्लाह से जुड़ें। यही वह पूँजी है जो हमारे काम आएगी, जब हमें दुनिया से जाना होगा। याद रखें, आज का हर अच्छा काम कल हमारे लिए रोशनी बनेगा, और आज की हर ग़फ़लत कल हमारे लिए पछतावे का सबब बनेगी। अल्लाह हम सबको अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 98-102 — अल-मोमिनुन

98وَأَعُوذُ بِكَ رَبِّ أَن يَحْضُرُونِ
और ऐ मेरे परवरदिगार इससे भी तेरी पनाह माँगता हूँ कि शयातीन मेरे पास आएँ
99حَتَّىٰ إِذَا جَاءَ أَحَدَهُمُ الْمَوْتُ قَالَ رَبِّ ارْجِعُونِ
(और कुफ्फ़ार तो मानेगें नहीं) यहाँ तक कि जब उनमें से किसी को मौत आयी तो कहने लगे परवरदिगार तू मुझे (एक बार) उस मुक़ाम (दुनिया) में छोड़ आया हूँ फिर वापस कर दे ताकि मै (अपकी दफ़ा) अच्छे अच्छे काम करूं
100لَعَلِّي أَعْمَلُ صَالِحًا فِيمَا تَرَكْتُ ۚ كَلَّا ۚ إِنَّهَا كَلِمَةٌ هُوَ قَائِلُهَا ۖ وَمِن وَرَائِهِم بَرْزَخٌ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ
(जवाब दिया जाएगा) हरगिज़ नहीं ये एक लग़ो बात है- जिसे वह बक रहा और उनके (मरने के) बाद (आलमे) बरज़ख़ है
101فَإِذَا نُفِخَ فِي الصُّورِ فَلَا أَنسَابَ بَيْنَهُمْ يَوْمَئِذٍ وَلَا يَتَسَاءَلُونَ
(जहाँ) क़ब्रों से उठाए जाएँगें (रहना होगा) फिर जिस वक्त सूर फूँका जाएगा तो उस दिन न लोगों में क़राबत दारियाँ रहेगी और न एक दूसरे की बात पूछेंगे
102فَمَن ثَقُلَتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
फिर जिन (के नेकियों) के पल्लें भारी होगें तो यही लोग कामयाब होंगे
अल-मोमिनुनकुरान सूची
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 100

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Tuesday, August 18, 2026

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