अल-मोमिनुन · 101/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
فَإِذَا نُفِخَ فِي الصُّورِ فَلَا أَنسَابَ بَيْنَهُمْ يَوْمَئِذٍ وَلَا يَتَسَاءَلُونَ ۝١٠١
Fa izaa nufikha fis Soori falaaa ansaaba bainahum yawma`izinw wa laa yatasaaa`aloon
📖 हिंदी अर्थ
(जहाँ) क़ब्रों से उठाए जाएँगें (रहना होगा) फिर जिस वक्त सूर फूँका जाएगा तो उस दिन न लोगों में क़राबत दारियाँ रहेगी और न एक दूसरे की बात पूछेंगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الصُّور (अस-सूर): यह एक सींग (नरसिंगा) है, जिसमें इसराफील (अलैहिस्सलाम) फूँक मारेंगे। यह क़यामत के आने और मुर्दों के जीवित होने का ऐलान होगा।
  • أَنسَاب (अंसाब): ख़ानदानी रिश्ते, वंशावली और नस्ली संबंध, जिन पर लोग दुनिया में फ़ख़्र (गर्व) किया करते थे।
  • يَتَسَاءَلُونَ (यतसाअलून): एक दूसरे से पूछताछ करना, हालचाल लेना या कोई सवाल-जवाब करना।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब क़यामत का दिन आएगा और इसराफील (अलैहिस्सलाम) सूर (नरसिंगा) में फूँक मारेंगे, और सारे लोग अपनी क़ब्रों से उठ खड़े होंगे, तो उस वक़्त हालात बिल्कुल बदल जाएँगे। दुनिया में लोग अपने ख़ानदान, नस्ल, रिश्तों और बड़े-बड़े नामों पर फ़ख़्र किया करते थे, किसी को अपना रिश्तेदार समझकर उस पर इतराते थे और किसी को कमतर समझकर उससे दूर भागते थे। लेकिन उस दिन यह सब कुछ मिट जाएगा। वहाँ न कोई किसी के ख़ानदान को देखेगा, न किसी की नस्ल को, न किसी के रिश्ते को। हर इंसान सिर्फ़ अपने आप में मशग़ूल होगा, अपने अंजाम की फ़िक्र में डूबा होगा।

उस दिन न कोई किसी से पूछताछ करेगा, न कोई किसी का हाल लेगा, न कोई किसी से कोई सवाल करेगा। हर शख्स अपने ही दुख-दर्द, अपनी ही मुसीबत और अपने ही अंजाम में इतना गर्क होगा कि उसे अपने सबसे करीबी लोगों की भी परवाह न होगी। माँ बच्चों को भूल जाएगी, बाप बेटों को, भाई भाई को, और दोस्त दोस्त को। यहाँ तक कि क़ुरआन में बताया गया है कि उस दिन इंसान अपने भाई, अपनी माँ, अपने बाप, अपनी बीवी और अपनी औलाद से भागेगा, क्योंकि हर किसी को अपनी ही फ़िक्र लगी होगी।

यह बात हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। दुनिया में हम जिन चीज़ों पर इतना नाज़ करते हैं — हमारा ख़ानदान, हमारी नस्ल, हमारे रिश्ते, हमारे दोस्त — यह सब कुछ उस दिन काम न आएगा। वहाँ सिर्फ़ और सिर्फ़ हमारे अमल (कर्म) काम आएँगे। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में उन चीज़ों पर ध्यान दें जो उस दिन हमारे काम आएँगी — नेकी, ईमान, अच्छे आचरण, अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा की तलब। यही वह पूँजी है जो उस बड़े दिन हमारी मदद करेगी, जब कोई रिश्ता, कोई नस्ल और कोई दोस्ती काम न आएगी।

अल्लाह हम सबको उस दिन की फ़िक्र करने और उसके लिए तैयारी करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 99-103 — अल-मोमिनुन

99حَتَّىٰ إِذَا جَاءَ أَحَدَهُمُ الْمَوْتُ قَالَ رَبِّ ارْجِعُونِ
(और कुफ्फ़ार तो मानेगें नहीं) यहाँ तक कि जब उनमें से किसी को मौत आयी तो कहने लगे परवरदिगार तू मुझे (एक बार) उस मुक़ाम (दुनिया) में छोड़ आया हूँ फिर वापस कर दे ताकि मै (अपकी दफ़ा) अच्छे अच्छे काम करूं
100لَعَلِّي أَعْمَلُ صَالِحًا فِيمَا تَرَكْتُ ۚ كَلَّا ۚ إِنَّهَا كَلِمَةٌ هُوَ قَائِلُهَا ۖ وَمِن وَرَائِهِم بَرْزَخٌ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ
(जवाब दिया जाएगा) हरगिज़ नहीं ये एक लग़ो बात है- जिसे वह बक रहा और उनके (मरने के) बाद (आलमे) बरज़ख़ है
101فَإِذَا نُفِخَ فِي الصُّورِ فَلَا أَنسَابَ بَيْنَهُمْ يَوْمَئِذٍ وَلَا يَتَسَاءَلُونَ
(जहाँ) क़ब्रों से उठाए जाएँगें (रहना होगा) फिर जिस वक्त सूर फूँका जाएगा तो उस दिन न लोगों में क़राबत दारियाँ रहेगी और न एक दूसरे की बात पूछेंगे
102فَمَن ثَقُلَتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
फिर जिन (के नेकियों) के पल्लें भारी होगें तो यही लोग कामयाब होंगे
103وَمَنْ خَفَّتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ فِي جَهَنَّمَ خَالِدُونَ
और जिन (के नेकियों) के पल्लें हल्के होंगे तो यही लोग है जिन्होंने अपना नुक़सान किया कि हमेशा जहन्नुम में रहेंगे
अल-मोमिनुनकुरान सूची
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 101

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Tuesday, August 18, 2026

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