अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بِقَدَرٍ – एक निश्चित मात्रा के साथ, आवश्यकता के अनुसार।
- فَأَسْكَنَّاهُ – हमने उसे (पानी को) रोककर स्थिर कर दिया, उसे ज़मीन में जमा दिया।
- ذَهَابٍ بِهِ – उसे ले जाना, उसे ग़ायब कर देना, उसे ख़त्म कर देना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपनी महान शक्ति और बेमिसाल रहमत का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है कि हमने आसमान से पानी उतारा, लेकिन यूँ ही नहीं, बल्कि एक निश्चित मात्रा के साथ — जो उसकी हिकमत और बंदों की ज़रूरत के मुताबिक़ थी। न इतना कि वह तबाही का सबब बने, और न इतना कम कि प्यासे ही रह जाएँ। यह अल्लाह की उस हिकमत का नमूना है जो हर चीज़ में काम करती है।
फिर अल्लाह ने उस पानी को ज़मीन में स्थिर कर दिया — उसे ज़मीन की गोद में जमा कर दिया, ताकि वह लोगों और जानवरों के लिए फ़ायदेमंद रहे। उसी पानी से चश्मे फूटते हैं, कुएँ भरते हैं, नदियाँ बहती हैं, और ज़मीन से फ़सलें उगती हैं। यह सब अल्लाह की तरफ़ से एक अज़ीम नेमत है।
फिर अल्लाह तआला एक सख़्त तनबीह (चेतावनी) देता है: "और हम उस पानी को ले जाने पर पूरी तरह क़ादिर हैं।" यानी हम चाहें तो उसे ग़ायब कर दें, ज़मीन में धँसा दें, या उसे खारा कर दें, या बादलों को रोक दें — तो तुम सब प्यासे मर जाओ, तुम्हारे जानवर हलाक हो जाएँ, और तुम्हारी ज़मीनें वीरान हो जाएँ। यह अल्लाह की क़ुदरत का एहसास है कि जिस नेमत को वह देता है, उसे छीनने पर भी वह पूरी तरह सक्षम है।
इस आयत में ज़ालिमों के लिए एक सख़्त तहदीद (धमकी) है — कि जो लोग अल्लाह की नेमतों को भूलकर ज़ुल्म और सरकशी पर उतर आते हैं, वे याद रखें कि जिस रब ने पानी दिया, वही उसे छीनने पर भी क़ादिर है। जब पानी ही नहीं होगा तो ज़ुल्म की दुनिया कहाँ टिकेगी?
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करना सिखाती है। जब हम एक गिलास पानी पीते हैं, तो याद रखें कि यह अल्लाह की रहमत है जो उसने अपनी हिकमत से उतारी और ज़मीन में जमा की। यह पानी ही है जिससे हमारी ज़िंदगी, हमारी खेती, हमारे जानवर — सब कुछ चलता है। अगर अल्लाह चाहे तो एक पल में यह सब ख़त्म हो जाए। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने रब के शुक्रगुज़ार बनें, उसकी नेमतों का सही इस्तेमाल करें, और ज़ुल्म व सरकशी से बचें। अल्लाह की रहमत के दरवाज़े हमेशा खुले हैं — बस ज़रूरत है तौबा और शुक्र की।
📜 आयत 16-20 — अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 18
सूरा अल-मोमिनुन आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने आसमान से एक अन्दाजे क़े साथ पानी बरसाया…सूरा आयत 18/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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