अल-मोमिनुन · 17/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
وَلَقَدْ خَلَقْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعَ طَرَائِقَ وَمَا كُنَّا عَنِ الْخَلْقِ غَافِلِينَ ۝١٧
Wa laqad khalaqnaa fawqakum sab`a taraaa`iqa wa maa kunnaa `anil khalqi ghaafileen
📖 हिंदी अर्थ
और हम ही ने तुम्हारे ऊपर तह ब तह आसमान बनाए और हम मख़लूक़ात से बेखबर नही है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • सब'अ त़राइक़ (سبع طرائق): सात आसमानें, जो एक के ऊपर एक हैं। "त़रीक़ा" का अर्थ है रास्ता या परत, और यहाँ इससे आसमानों की परतें मुराद हैं।
  • ग़ाफ़िलीन (غافلين): बेखबर, भूलने वाले, लापरवाह।

तफ़सीर:

ऐ लोगों! हमने तुम्हारे ऊपर सात आसमान पैदा किए हैं, जो एक के ऊपर एक सुंदर व्यवस्था के साथ स्थापित हैं। ये आसमान कोई बेकार की चीज़ नहीं हैं, बल्कि हमारी क़ुदरत (शक्ति) की निशानी हैं, जो तुम्हें हर पल घेरे हुए हैं। और हम अपनी मख़लूक़ात (सृष्टि) से कभी बेखबर नहीं हैं — न हम किसी को भूलते हैं और न हमारी निग़ाह से कोई चीज़ छिपी है। हम हर पल देख रहे हैं कि कौन क्या कर रहा है, कौन कहाँ जा रहा है, और हर जीव की रोज़ी, उसकी उम्र और उसके अंजाम का हमें पूरा इल्म है। यही नहीं, हमारी यह निगरानी सिर्फ़ देखने भर के लिए नहीं, बल्कि हम अपनी रहमत और हिकमत (समझदारी) से हर मख़लूक़ की हिफ़ाज़त भी करते हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि जिस तरह आसमानों की यह विशाल व्यवस्था हमारे नियंत्रण में है, उसी तरह हमारी ज़िंदगी का हर पल भी अल्लाह की निगरानी में है। जब हमें यह यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हमें देख रहा है और हमारी हर अच्छी या बुरी हरकत से वाक़िफ है, तो हमारे दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ और उसकी मुहब्बत दोनों पैदा होते हैं। यह ख़ौफ़ हमें गुनाहों से रोकता है, और यह मुहब्बत हमें नेकियों की तरफ़ ले जाती है। अल्लाह ने हमें यह बताकर कितनी बड़ी ख़ुशख़बरी दी है कि वह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता — वह हमेशा हमारे साथ है, हमारी सुनता है, हमारी मदद करता है, और हमारी हर दुआ का जवाब देता है। तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी को इस यक़ीन के साथ गुज़ारें कि अल्लाह हमेशा हमारे साथ है, और उसकी रज़ा (खुशी) के लिए अपने हर काम को सुधारें। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।



📜 आयत 15-19 — सूरा अल-मोमिनुन

15ثُمَّ إِنَّكُم بَعْدَ ذَٰلِكَ لَمَيِّتُونَ
फिर इसके बाद यक़ीनन तुम सब लोगों को (एक न एक दिन) मरना है
16ثُمَّ إِنَّكُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ تُبْعَثُونَ
इसके बाद कयामत के दिन तुम सब के सब कब्रों से उठाए जाओगे
17وَلَقَدْ خَلَقْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعَ طَرَائِقَ وَمَا كُنَّا عَنِ الْخَلْقِ غَافِلِينَ
और हम ही ने तुम्हारे ऊपर तह ब तह आसमान बनाए और हम मख़लूक़ात से बेखबर नही है
18وَأَنزَلْنَا مِنَ السَّمَاءِ مَاءً بِقَدَرٍ فَأَسْكَنَّاهُ فِي الْأَرْضِ ۖ وَإِنَّا عَلَىٰ ذَهَابٍ بِهِ لَقَادِرُونَ
और हमने आसमान से एक अन्दाजे क़े साथ पानी बरसाया फिर उसको ज़मीन में (हसब मसलेहत) ठहराए रखा और हम तो यक़ीनन उसके ग़ाएब कर देने पर भी क़ाबू रखते है
19فَأَنشَأْنَا لَكُم بِهِ جَنَّاتٍ مِّن نَّخِيلٍ وَأَعْنَابٍ لَّكُمْ فِيهَا فَوَاكِهُ كَثِيرَةٌ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ
फिर हमने उस पानी से तुम्हारे वास्ते खजूरों और अंगूरों के बाग़ात बनाए कि उनमें तुम्हारे वास्ते (तरह तरह के) बहुतेरे मेवे (पैदा होते) हैं उनमें से बाज़ को तुम खाते हो
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
17आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 17

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Friday, October 2, 2026

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