अल-मोमिनुन · 19/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
فَأَنشَأْنَا لَكُم بِهِ جَنَّاتٍ مِّن نَّخِيلٍ وَأَعْنَابٍ لَّكُمْ فِيهَا فَوَاكِهُ كَثِيرَةٌ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ ۝١٩
Fa anshaanaa lakum bihee Jannaatim min nakheelinw wa a`naab; lakum feehaa fawaakihu kaseeratunw wa minhaa taakuloon
📖 हिंदी अर्थ
फिर हमने उस पानी से तुम्हारे वास्ते खजूरों और अंगूरों के बाग़ात बनाए कि उनमें तुम्हारे वास्ते (तरह तरह के) बहुतेरे मेवे (पैदा होते) हैं उनमें से बाज़ को तुम खाते हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَأَنشَأْنَا – हमने उत्पन्न किया / पैदा किया
  • جَنَّاتٍ – बाग़ (बगीचे)
  • نَخِيلٍ – खजूर के पेड़
  • أَعْنَابٍ – अंगूर की बेलें
  • فَوَاكِهُ – फल (विभिन्न प्रकार के मेवे और फल)
  • تَأْكُلُونَ – तुम खाते हो

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने बंदों पर अपनी असीम रहमतों का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है कि हमने उसी पानी के ज़रिए (जिसे हमने बादलों से बरसाया) तुम्हारे लिए खजूर और अंगूर के बाग़ उगाए। यह कोई साधारण बात नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की क़ुदरत का अज़ीमुश्शान नमूना है कि एक बूँद पानी से हरी-भरी बेलें, ऊँचे-ऊँचे दरख़्त और रंग-बिरंगे फल पैदा हो जाते हैं।

इन बाग़ों में तुम्हारे लिए ढेरों फल हैं – अंजीर, अनार, सेब, आम, केला, और भी कई क़िस्म के फल, जिनके रंग, रूप, स्वाद और ख़ुशबू में अलग-अलग किस्म की नेअमतें रखी गई हैं। इनमें से कुछ तो तुम सीधे खाते हो, और कुछ से तुम्हें और भी फ़ायदे मिलते हैं – जैसे अंगूर से किशमिश, शरबत, सिरका और खजूर से कई तरह की मीठी चीज़ें बनती हैं।

यहाँ ख़ास तौर पर खजूर और अंगूर का ज़िक्र इसलिए किया गया कि अरब के लोगों के लिए ये दो फल सबसे ज़्यादा अहमियत रखते थे और उनकी गुज़ारिश का मुख्य साधन थे। लेकिन इससे यह मुराद नहीं कि अल्लाह की नेअमतें सिर्फ़ इन्हीं तक महदूद हैं – बल्कि पूरी दुनिया में, हर मौसम में, हर इलाक़े में अलग-अलग फल और खाद्य पदार्थ उसी एक पानी से पैदा होते हैं।

इस आयत में हमारे लिए एक बड़ी सीख है कि जब हम अपने सामने ये हरे-भरे बाग़, मीठे फल और तरह-तरह की नेअमतें देखें, तो हमें अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और याद रखना चाहिए कि यह सब उसी रहमान व करीम की देन है। जिस रब ने पानी से ये नेअमतें पैदा कीं, वही रब हमें रिज़्क़ देने पर क़ादिर है, और उसी की इबादत और शुक्र हमारा फ़र्ज़ है।

अल्लाह तआला की यह रहमत हमें उसकी मोहब्बत की तरफ़ खींचती है कि जो रब इतनी मेहरबानी से हमारी गुज़ारिश का इंतज़ाम करता है, क्या हमें उसकी नाफ़रमानी से बाज़ नहीं आना चाहिए? क्या उसके दिए हुए रिज़्क़ में से उसके बताए रास्ते पर चलना हमारा फ़र्ज़ नहीं? यक़ीनन, यह सोच हमें अल्लाह के और क़रीब लाती है और हमारे दिल में उसके प्रति मोहब्बत और शुक्र का जज़्बा पैदा करती है।



📜 आयत 17-21 — अल-मोमिनुन

17وَلَقَدْ خَلَقْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعَ طَرَائِقَ وَمَا كُنَّا عَنِ الْخَلْقِ غَافِلِينَ
और हम ही ने तुम्हारे ऊपर तह ब तह आसमान बनाए और हम मख़लूक़ात से बेखबर नही है
18وَأَنزَلْنَا مِنَ السَّمَاءِ مَاءً بِقَدَرٍ فَأَسْكَنَّاهُ فِي الْأَرْضِ ۖ وَإِنَّا عَلَىٰ ذَهَابٍ بِهِ لَقَادِرُونَ
और हमने आसमान से एक अन्दाजे क़े साथ पानी बरसाया फिर उसको ज़मीन में (हसब मसलेहत) ठहराए रखा और हम तो यक़ीनन उसके ग़ाएब कर देने पर भी क़ाबू रखते है
19فَأَنشَأْنَا لَكُم بِهِ جَنَّاتٍ مِّن نَّخِيلٍ وَأَعْنَابٍ لَّكُمْ فِيهَا فَوَاكِهُ كَثِيرَةٌ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ
फिर हमने उस पानी से तुम्हारे वास्ते खजूरों और अंगूरों के बाग़ात बनाए कि उनमें तुम्हारे वास्ते (तरह तरह के) बहुतेरे मेवे (पैदा होते) हैं उनमें से बाज़ को तुम खाते हो
20وَشَجَرَةً تَخْرُجُ مِن طُورِ سَيْنَاءَ تَنبُتُ بِالدُّهْنِ وَصِبْغٍ لِّلْآكِلِينَ
और (हम ही ने ज़ैतून का) दरख्त (पैदा किया) जो तूरे सैना (पहाड़) में (कसरत से) पैदा होता है जिससे तेल भी निकलता है और खाने वालों के लिए सालन भी है
21وَإِنَّ لَكُمْ فِي الْأَنْعَامِ لَعِبْرَةً ۖ نُّسْقِيكُم مِّمَّا فِي بُطُونِهَا وَلَكُمْ فِيهَا مَنَافِعُ كَثِيرَةٌ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ
और उसमें भी शक नहीं कि तुम्हारे वास्ते चौपायों में भी इबरत की जगह है और (ख़ाक बला) जो कुछ उनके पेट में है उससे हम तुमको दूध पिलाते हैं और जानवरों में तो तुम्हारे और भी बहुत से फायदे हैं और उन्हीं में से बाज़ तुम खाते हो
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 19

सूरा अल-मोमिनुन आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर हमने उस पानी से तुम्हारे वास्ते खजूरों और अंगूरों…

सूरा आयत 19/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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