अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَأَنشَأْنَا – हमने उत्पन्न किया / पैदा किया
- جَنَّاتٍ – बाग़ (बगीचे)
- نَخِيلٍ – खजूर के पेड़
- أَعْنَابٍ – अंगूर की बेलें
- فَوَاكِهُ – फल (विभिन्न प्रकार के मेवे और फल)
- تَأْكُلُونَ – तुम खाते हो
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने बंदों पर अपनी असीम रहमतों का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है कि हमने उसी पानी के ज़रिए (जिसे हमने बादलों से बरसाया) तुम्हारे लिए खजूर और अंगूर के बाग़ उगाए। यह कोई साधारण बात नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की क़ुदरत का अज़ीमुश्शान नमूना है कि एक बूँद पानी से हरी-भरी बेलें, ऊँचे-ऊँचे दरख़्त और रंग-बिरंगे फल पैदा हो जाते हैं।
इन बाग़ों में तुम्हारे लिए ढेरों फल हैं – अंजीर, अनार, सेब, आम, केला, और भी कई क़िस्म के फल, जिनके रंग, रूप, स्वाद और ख़ुशबू में अलग-अलग किस्म की नेअमतें रखी गई हैं। इनमें से कुछ तो तुम सीधे खाते हो, और कुछ से तुम्हें और भी फ़ायदे मिलते हैं – जैसे अंगूर से किशमिश, शरबत, सिरका और खजूर से कई तरह की मीठी चीज़ें बनती हैं।
यहाँ ख़ास तौर पर खजूर और अंगूर का ज़िक्र इसलिए किया गया कि अरब के लोगों के लिए ये दो फल सबसे ज़्यादा अहमियत रखते थे और उनकी गुज़ारिश का मुख्य साधन थे। लेकिन इससे यह मुराद नहीं कि अल्लाह की नेअमतें सिर्फ़ इन्हीं तक महदूद हैं – बल्कि पूरी दुनिया में, हर मौसम में, हर इलाक़े में अलग-अलग फल और खाद्य पदार्थ उसी एक पानी से पैदा होते हैं।
इस आयत में हमारे लिए एक बड़ी सीख है कि जब हम अपने सामने ये हरे-भरे बाग़, मीठे फल और तरह-तरह की नेअमतें देखें, तो हमें अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और याद रखना चाहिए कि यह सब उसी रहमान व करीम की देन है। जिस रब ने पानी से ये नेअमतें पैदा कीं, वही रब हमें रिज़्क़ देने पर क़ादिर है, और उसी की इबादत और शुक्र हमारा फ़र्ज़ है।
अल्लाह तआला की यह रहमत हमें उसकी मोहब्बत की तरफ़ खींचती है कि जो रब इतनी मेहरबानी से हमारी गुज़ारिश का इंतज़ाम करता है, क्या हमें उसकी नाफ़रमानी से बाज़ नहीं आना चाहिए? क्या उसके दिए हुए रिज़्क़ में से उसके बताए रास्ते पर चलना हमारा फ़र्ज़ नहीं? यक़ीनन, यह सोच हमें अल्लाह के और क़रीब लाती है और हमारे दिल में उसके प्रति मोहब्बत और शुक्र का जज़्बा पैदा करती है।
📜 आयत 17-21 — अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 19
सूरा अल-मोमिनुन आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर हमने उस पानी से तुम्हारे वास्ते खजूरों और अंगूरों…सूरा आयत 19/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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