अल-मोमिनुन · 20/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
وَشَجَرَةً تَخْرُجُ مِن طُورِ سَيْنَاءَ تَنبُتُ بِالدُّهْنِ وَصِبْغٍ لِّلْآكِلِينَ ۝٢٠
Wa shajaratan takhruju min Toori Sainaaa`a tambutu bidduhni wa sibghil lil aakileen
📖 हिंदी अर्थ
और (हम ही ने ज़ैतून का) दरख्त (पैदा किया) जो तूरे सैना (पहाड़) में (कसरत से) पैदा होता है जिससे तेल भी निकलता है और खाने वालों के लिए सालन भी है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • तूरे सीना (طور سيناء): पवर्त सीना, जो मिस्र और हिजाज़ के बीच स्थित एक बरकत वाला पहाड़ है।
  • तनबुतु बिद्दुह्नि (تنبت بالدهن): यानी वह पेड़ ऐसा है जिसके फल से तेल (दहन) निकलता है।
  • सिब्ग़ (صبغ): इसका अर्थ है सालन या चटनी, जिसमें रोटी डुबोकर खाई जाती है। यहाँ मुराद ज़ैतून का तेल है जो खाने के साथ सालन के रूप में इस्तेमाल होता है।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी एक और बड़ी नेमत का ज़िक्र फ़रमाया है। उसने बारिश के पानी के ज़रिए "ज़ैतून का पेड़" उगाया, जो "तूरे सीना" (पवर्त सीना) के इलाक़े में पैदा होता है। यह वही मुबारक पहाड़ है जहाँ अल्लाह ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) से कलाम किया था। यह पेड़ अपने अंदर कई बरकतें रखता है — उसके फल से तेल निकलता है, जिसे लोग इस्तेमाल करते हैं। यह तेल दो काम आता है: एक तो उसे शरीर पर मलते हैं (दहन के लिए), और दूसरे उसे खाने के साथ सालन के रूप में इस्तेमाल करते हैं, यानी रोटी को उसमें डुबोकर खाते हैं।

यह अल्लाह की कुदरत का अजीबो-ग़रीब नमूना है कि एक ही पेड़ से इंसान को रोशनी (चिराग़ जलाने के लिए तेल), शरीर की देखभाल (मालिश), और खाने का ज़ायक़ा (सालन) — तीनों चीज़ें मिलती हैं। अल्लाह ने यह सब इंसान की आसानी और भलाई के लिए पैदा किया, ताकि वह अपने रब की नेमतों को पहचाने और उसका शुक्र अदा करे।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! ज़रा ग़ौर कीजिए — अल्लाह तआला ने एक साधारण से पेड़ में इतनी बरकतें रख दीं कि उससे इंसान की ज़िंदगी के कई ज़रूरी काम चल जाते हैं। यही अल्लाह की रहमत और कुदरत की निशानी है। जब हम ज़ैतून का तेल इस्तेमाल करते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि यह अल्लाह की देन है, और उसका शुक्र अदा करना चाहिए। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतें अनगिनत हैं, और हर नेमत में इंसान के लिए भलाई और आराम है। अगर हम इन नेमतों पर ग़ौर करें, तो हमारा ईमान मज़बूत होगा और अल्लाह की मुहब्बत दिल में बढ़ेगी। इसलिए हमें चाहिए कि अल्लाह की इन नेमतों का सही इस्तेमाल करें और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें।

🎧 सुनें

📜 आयत 18-22 — अल-मोमिनुन

18وَأَنزَلْنَا مِنَ السَّمَاءِ مَاءً بِقَدَرٍ فَأَسْكَنَّاهُ فِي الْأَرْضِ ۖ وَإِنَّا عَلَىٰ ذَهَابٍ بِهِ لَقَادِرُونَ
और हमने आसमान से एक अन्दाजे क़े साथ पानी बरसाया फिर उसको ज़मीन में (हसब मसलेहत) ठहराए रखा और हम तो यक़ीनन उसके ग़ाएब कर देने पर भी क़ाबू रखते है
19فَأَنشَأْنَا لَكُم بِهِ جَنَّاتٍ مِّن نَّخِيلٍ وَأَعْنَابٍ لَّكُمْ فِيهَا فَوَاكِهُ كَثِيرَةٌ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ
फिर हमने उस पानी से तुम्हारे वास्ते खजूरों और अंगूरों के बाग़ात बनाए कि उनमें तुम्हारे वास्ते (तरह तरह के) बहुतेरे मेवे (पैदा होते) हैं उनमें से बाज़ को तुम खाते हो
20وَشَجَرَةً تَخْرُجُ مِن طُورِ سَيْنَاءَ تَنبُتُ بِالدُّهْنِ وَصِبْغٍ لِّلْآكِلِينَ
और (हम ही ने ज़ैतून का) दरख्त (पैदा किया) जो तूरे सैना (पहाड़) में (कसरत से) पैदा होता है जिससे तेल भी निकलता है और खाने वालों के लिए सालन भी है
21وَإِنَّ لَكُمْ فِي الْأَنْعَامِ لَعِبْرَةً ۖ نُّسْقِيكُم مِّمَّا فِي بُطُونِهَا وَلَكُمْ فِيهَا مَنَافِعُ كَثِيرَةٌ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ
और उसमें भी शक नहीं कि तुम्हारे वास्ते चौपायों में भी इबरत की जगह है और (ख़ाक बला) जो कुछ उनके पेट में है उससे हम तुमको दूध पिलाते हैं और जानवरों में तो तुम्हारे और भी बहुत से फायदे हैं और उन्हीं में से बाज़ तुम खाते हो
22وَعَلَيْهَا وَعَلَى الْفُلْكِ تُحْمَلُونَ
और उन्हें जानवरों और कश्तियों पर चढे चढ़े फिरते भी हो
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 20

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Tuesday, August 18, 2026

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