Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَذَرْهُمْ: उन्हें छोड़ दो।
- غَمْرَتِهِمْ: उनकी अज्ञानता, भटकाव और गुमराही में डूबे होने की स्थिति।
- حَتَّىٰ حِينٍ: एक निश्चित समय तक, अर्थात जब तक उन पर अज़ाब न आ जाए।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप उन लोगों को उनकी उस हालत पर छोड़ दीजिए, जिसमें वे अज्ञानता और भटकाव के अंधेरे में डूबे हुए हैं। वे सत्य को नहीं समझ रहे, अपनी जिद और हठ पर अड़े हैं, और आपके द्वारा लाए गए मार्गदर्शन को ठुकरा रहे हैं। उन्हें उनकी इस गुमराही पर कुछ समय के लिए छोड़ दें, क्योंकि उनका अंजाम निकट है। जब उन पर अल्लाह का अज़ाब आ जाएगा, तो वे स्वयं अपनी गलती को महसूस करेंगे, लेकिन तब पछतावा किसी काम नहीं आएगा।
यह आयत नबी करीम ﷺ को एक ओर जहाँ धैर्य और सब्र की शिक्षा देती है, वहीं दूसरी ओर उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो सत्य को सुनकर भी उससे मुँह मोड़ते हैं। अल्लाह तआला ने अपने नबी को यह निर्देश दिया कि वे उनसे बहस न करें और न ही उनके लिए पछतावा करें, बल्कि अपना काम जारी रखें और अल्लाह पर भरोसा रखें।
इस आयत में एक बड़ी नसीहत है कि इंसान को अपनी अक्ल और समझ पर घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि अज्ञानता और हठधर्मी इंसान को अंधा बना देती है। जो लोग हक़ (सत्य) को सुनकर भी उसे नहीं मानते, वे अपने ही हाथों अपना नुक़सान करते हैं। अल्लाह की रहमत और हिदायत उन्हीं को मिलती है जो सच्चे दिल से सत्य को स्वीकार करने के लिए तैयार होते हैं।
याद रखिए, अल्लाह की मेहरबानी से जो व्यक्ति अपने दिल को साफ रखता है और सत्य की तलाश में रहता है, अल्लाह उसे कभी गुमराह नहीं करता। और जो लोग हक़ से दूर भागते हैं, उनके लिए अल्लाह की ओर से एक निश्चित समय निर्धारित है, जब वे अपनी गलती का फल भुगतेंगे। इसलिए हमें चाहिए कि हम हमेशा सत्य को अपनाएँ, अपनी जिद और हठ को छोड़ें, और अल्लाह के दीन की ओर दौड़ें, क्योंकि यही हमारी भलाई का रास्ता है।
📜 आयत 52-56 — सूरा अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 54
सूरा अल-मोमिनुन आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उन की ग़फलत…सूरा आयत 54/118 — सूरा अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मोमिनुन सुनें, सूरा अल-मोमिनुन अनुवाद, सूरा अल-मोमिनुन mp3, सूरा अल-मोमिनुन pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मोमिनुन
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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