अल-फुरकान · 16/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
لَّهُمْ فِيهَا مَا يَشَاءُونَ خَالِدِينَ ۚ كَانَ عَلَىٰ رَبِّكَ وَعْدًا مَّسْئُولًا ۝١٦
Lahum feehaa maa yashaaa`oona khaalideen; kaana `alaa Rabbika wa`dam mas`oolaa
📖 हिंदी अर्थ
जिस चीज़ की ख्वाहिश करेंगें उनके लिए वहाँ मौजूद होगी (और) वह हमेशा (उसी हाल में) रहेंगें ये तुम्हारे परवरदिगार पर एक लाज़िमी और माँगा हुआ वायदा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مَا يَشَاؤُونَ: जो कुछ वे चाहेंगे (इच्छा करेंगे)
  • خَالِدِينَ: हमेशा रहने वाले (सदैव स्थायी रूप से)
  • وَعْدًا مَسْئُولًا: ऐसा वादा जो माँगा गया हो (अर्थात् अल्लाह से उनके बंदों द्वारा माँगा गया वादा)

तफसीर (व्याख्या):

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने नेक और परहेज़गार बंदों को उस अज़ीम इनाम की खुशखबरी दे रहे हैं जो उन्होंने उनके लिए तैयार किया है। अल्लाह फ़रमाता है कि इन मोमिनीन के लिए जन्नत में वह सब कुछ होगा जो वे चाहेंगे — हर वह नेमत, हर वह लज़्ज़त, हर वह खुशी जिसकी वे कल्पना कर सकते हैं या जिसकी उनके दिल तमन्ना करेंगे। और यह सब कुछ उन्हें हमेशा के लिए मिलेगा, कभी खत्म नहीं होगा और कभी उनसे छीना नहीं जाएगा। वे उस नेमत में हमेशा-हमेशा के लिए रहेंगे।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो शक या संदेह पर आधारित हो, बल्कि यह तुम्हारे रब की ओर से एक पक्का वादा है — ऐसा वादा जिसे अल्लाह के नेक बंदे अपनी दुआओं में माँगते रहे हैं। वे दुनिया में अल्लाह से यही दुआ करते थे: "ऐ हमारे रब! हमें वह चीज़ अता फ़रमा जो तूने अपने रसूलों के ज़रिये हमसे वादा किया है।" और अल्लाह तआला का वादा कभी टूटता नहीं — वह अपने वादे को पूरा करके ही रहता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के वादे पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। जब अल्लाह ने अपने नेक बंदों से वादा किया है कि उन्हें जन्नत मिलेगी, तो यह वादा अटल है। हमें चाहिए कि हम अपने आचरण को सुधारें, अल्लाह की इबादत करें और उसके रास्ते पर चलें, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हो सकें जिनके लिए यह अज़ीम इनाम तैयार किया गया है। यह वादा सिर्फ़ उन्हीं के लिए है जो अल्लाह के फ़रमाँबरदार बंदे हैं — जो नमाज़ क़ायम करते हैं, रोज़ा रखते हैं, ज़कात देते हैं और अल्लाह की राह में नेकियाँ करते हैं।

आओ हम सब मिलकर अल्लाह से यही दुआ करें कि हमें भी उन लोगों में शामिल करे जिनके लिए यह वादा किया गया है, और हमें जन्नत की उन नेमतों से नवाज़े जो आँखों ने कभी नहीं देखीं, कानों ने कभी नहीं सुनीं और किसी इंसान के दिल ने कभी उनकी कल्पना भी नहीं की।



📜 आयत 14-18 — अल-फुरकान

14لَّا تَدْعُوا الْيَوْمَ ثُبُورًا وَاحِدًا وَادْعُوا ثُبُورًا كَثِيرًا
(उस वक्त उनसे कहा जाएगा कि) आज एक मौत को न पुकारो बल्कि बहुतेरी मौतों को पुकारो (मगर इससे भी कुछ होने वाला नहीं)
15قُلْ أَذَٰلِكَ خَيْرٌ أَمْ جَنَّةُ الْخُلْدِ الَّتِي وُعِدَ الْمُتَّقُونَ ۚ كَانَتْ لَهُمْ جَزَاءً وَمَصِيرًا
(ऐ रसूल) तुम पूछो तो कि जहन्नुम बेहतर है या हमेशा रहने का बाग़ (बेहश्त) जिसका परहेज़गारों से वायदा किया गया है कि वह उन (के आमाल) का सिला होगा और आख़िरी ठिकाना
16لَّهُمْ فِيهَا مَا يَشَاءُونَ خَالِدِينَ ۚ كَانَ عَلَىٰ رَبِّكَ وَعْدًا مَّسْئُولًا
जिस चीज़ की ख्वाहिश करेंगें उनके लिए वहाँ मौजूद होगी (और) वह हमेशा (उसी हाल में) रहेंगें ये तुम्हारे परवरदिगार पर एक लाज़िमी और माँगा हुआ वायदा है
17وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ وَمَا يَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ فَيَقُولُ أَأَنتُمْ أَضْلَلْتُمْ عِبَادِي هَٰؤُلَاءِ أَمْ هُمْ ضَلُّوا السَّبِيلَ
और जिस दिन ख़ुदा उन लोगों को और जिनकी ये लोग ख़ुदा को छोड़कर परसतिश किया करते हैं (उनको) जमा करेगा और पूछेगा क्या तुम ही ने हमारे उन बन्दों को गुमराह कर दिया था या ये लोग खुद राह रास्ते से भटक गए थे
18قَالُوا سُبْحَانَكَ مَا كَانَ يَنبَغِي لَنَا أَن نَّتَّخِذَ مِن دُونِكَ مِنْ أَوْلِيَاءَ وَلَٰكِن مَّتَّعْتَهُمْ وَآبَاءَهُمْ حَتَّىٰ نَسُوا الذِّكْرَ وَكَانُوا قَوْمًا بُورًا
(उनके माबूद) अर्ज़ करेंगें- सुबहान अल्लाह (हम तो ख़ुद तेरे बन्दे थे) हमें ये किसी तरह ज़ेबा न था कि हम तुझे छोड़कर दूसरे को अपना सरपरस्त बनाते (फिर अपने को क्यों कर माबूद बनाते) मगर बात तो ये है कि तू ही ने इनको बाप दादाओं को चैन दिया-यहाँ तक कि इन लोगों ने (तेरी) याद भुला दी और ये ख़ुद हलाक होने वाले लोग थे
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अनुवाद — अल-फुरकान 16

सूरा अल-फुरकान आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिस चीज़ की ख्वाहिश करेंगें उनके लिए वहाँ मौजूद होगी…

सूरा आयत 16/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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