अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَحْشُرُهُمْ: उन्हें इकट्ठा करेगा (क़यामत के दिन)
- مَا يَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللهِ: जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पूजते हैं (मूर्तियाँ, देवता, जिन्न, ईसा, फ़रिश्ते)
- أَضْلَلْتُمْ: क्या तुमने गुमराह किया
- ضَلُّوا السَّبِيلَ: वे स्वयं रास्ता भटक गए
विस्तृत तफ़सीर:
क़यामत का वह दिन कितना भयानक और हैरतअंगेज़ होगा, जब अल्लाह तआला सभी मुशरिकों को और उनके उन माबूदों को इकट्ठा करेगा, जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पूजते थे। ये माबूद चाहे मूर्तियाँ हों, चाहे फ़रिश्ते, चाहे ईसा अलैहिस्सलाम हों, चाहे जिन्नात हों — सबको एक जगह हाज़िर किया जाएगा। यह वह दिन होगा जब सारे पर्दे उठ जाएँगे और हर चीज़ की सच्चाई खुलकर सामने आ जाएगी।
उस दिन अल्लाह तआला उन पूजे जाने वालों से पूछेगा — और यह पूछताछ उन पूजने वालों पर हुज्जत क़ायम करने के लिए होगी — कि "क्या तुमने मेरे इन बंदों को गुमराह किया था? क्या तुमने उन्हें अपनी इबादत का हुक्म दिया था? या वे खुद ही रास्ता भटक गए थे और अपनी मर्ज़ी से तुम्हें पूजने लगे थे?"
यह सवाल उस दिन उन माबूदों से किया जाएगा, ताकि पूजने वालों पर यह बात साबित हो जाए कि उनका बहाना बिल्कुल झूठा है। वे दुनिया में कहते थे कि "हमने तो अपने बुज़ुर्गों को इनकी पूजा करते देखा, इसलिए हम भी करते हैं" या "ये हमारे सिफ़ारिशी हैं" — लेकिन उस दिन सच्चाई सामने आ जाएगी कि न तो उन माबूदों ने कभी किसी को गुमराह किया, और न ही वे खुद किसी को फ़ायदा या नुक़सान पहुँचा सकते हैं। असल में यह शिर्क सिर्फ़ इंसान की अपनी नादानी, अपनी हवा-ओ-हवस और शैतान के बहकावे का नतीजा था।
इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला ने हमें साफ़ बता दिया है कि क़यामत के दिन कोई सिफ़ारिशी, कोई वसीला, कोई मूर्ति, कोई बुज़ुर्ग — कुछ भी काम नहीं आएगा। सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह की इबादत और उसकी रहमत ही काम आएगी। इसलिए हमें चाहिए कि इसी दुनिया में अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत के लिए समर्पित कर दें, उसी से मदद माँगें, उसी से डरें और उसी से उम्मीद रखें। यही वह रास्ता है जो हमें उस भयानक दिन की रुसवाई से बचा सकता है और जन्नत की तरफ ले जा सकता है। अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 15-19 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 17
सूरा अल-फुरकान आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस दिन ख़ुदा उन लोगों को और जिनकी ये…सूरा आयत 17/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








