अल-फुरकान · 17/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ وَمَا يَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ فَيَقُولُ أَأَنتُمْ أَضْلَلْتُمْ عِبَادِي هَٰؤُلَاءِ أَمْ هُمْ ضَلُّوا السَّبِيلَ ۝١٧
Wa Yawma yahshuruhum wa maa ya`budoona min doonil lahi fa yaqoolu `a-antum adlaltum `ibaadee haaa`ulaaa`i am hum dallus sabeel
📖 हिंदी अर्थ
और जिस दिन ख़ुदा उन लोगों को और जिनकी ये लोग ख़ुदा को छोड़कर परसतिश किया करते हैं (उनको) जमा करेगा और पूछेगा क्या तुम ही ने हमारे उन बन्दों को गुमराह कर दिया था या ये लोग खुद राह रास्ते से भटक गए थे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَحْشُرُهُمْ: उन्हें इकट्ठा करेगा (क़यामत के दिन)
  • مَا يَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللهِ: जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पूजते हैं (मूर्तियाँ, देवता, जिन्न, ईसा, फ़रिश्ते)
  • أَضْلَلْتُمْ: क्या तुमने गुमराह किया
  • ضَلُّوا السَّبِيلَ: वे स्वयं रास्ता भटक गए

विस्तृत तफ़सीर:

क़यामत का वह दिन कितना भयानक और हैरतअंगेज़ होगा, जब अल्लाह तआला सभी मुशरिकों को और उनके उन माबूदों को इकट्ठा करेगा, जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पूजते थे। ये माबूद चाहे मूर्तियाँ हों, चाहे फ़रिश्ते, चाहे ईसा अलैहिस्सलाम हों, चाहे जिन्नात हों — सबको एक जगह हाज़िर किया जाएगा। यह वह दिन होगा जब सारे पर्दे उठ जाएँगे और हर चीज़ की सच्चाई खुलकर सामने आ जाएगी।

उस दिन अल्लाह तआला उन पूजे जाने वालों से पूछेगा — और यह पूछताछ उन पूजने वालों पर हुज्जत क़ायम करने के लिए होगी — कि "क्या तुमने मेरे इन बंदों को गुमराह किया था? क्या तुमने उन्हें अपनी इबादत का हुक्म दिया था? या वे खुद ही रास्ता भटक गए थे और अपनी मर्ज़ी से तुम्हें पूजने लगे थे?"

यह सवाल उस दिन उन माबूदों से किया जाएगा, ताकि पूजने वालों पर यह बात साबित हो जाए कि उनका बहाना बिल्कुल झूठा है। वे दुनिया में कहते थे कि "हमने तो अपने बुज़ुर्गों को इनकी पूजा करते देखा, इसलिए हम भी करते हैं" या "ये हमारे सिफ़ारिशी हैं" — लेकिन उस दिन सच्चाई सामने आ जाएगी कि न तो उन माबूदों ने कभी किसी को गुमराह किया, और न ही वे खुद किसी को फ़ायदा या नुक़सान पहुँचा सकते हैं। असल में यह शिर्क सिर्फ़ इंसान की अपनी नादानी, अपनी हवा-ओ-हवस और शैतान के बहकावे का नतीजा था।

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला ने हमें साफ़ बता दिया है कि क़यामत के दिन कोई सिफ़ारिशी, कोई वसीला, कोई मूर्ति, कोई बुज़ुर्ग — कुछ भी काम नहीं आएगा। सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह की इबादत और उसकी रहमत ही काम आएगी। इसलिए हमें चाहिए कि इसी दुनिया में अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत के लिए समर्पित कर दें, उसी से मदद माँगें, उसी से डरें और उसी से उम्मीद रखें। यही वह रास्ता है जो हमें उस भयानक दिन की रुसवाई से बचा सकता है और जन्नत की तरफ ले जा सकता है। अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 15-19 — सूरा अल-फुरकान

15قُلْ أَذَٰلِكَ خَيْرٌ أَمْ جَنَّةُ الْخُلْدِ الَّتِي وُعِدَ الْمُتَّقُونَ ۚ كَانَتْ لَهُمْ جَزَاءً وَمَصِيرًا
(ऐ रसूल) तुम पूछो तो कि जहन्नुम बेहतर है या हमेशा रहने का बाग़ (बेहश्त) जिसका परहेज़गारों से वायदा किया गया है कि वह उन (के आमाल) का सिला होगा और आख़िरी ठिकाना
16لَّهُمْ فِيهَا مَا يَشَاءُونَ خَالِدِينَ ۚ كَانَ عَلَىٰ رَبِّكَ وَعْدًا مَّسْئُولًا
जिस चीज़ की ख्वाहिश करेंगें उनके लिए वहाँ मौजूद होगी (और) वह हमेशा (उसी हाल में) रहेंगें ये तुम्हारे परवरदिगार पर एक लाज़िमी और माँगा हुआ वायदा है
17وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ وَمَا يَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ فَيَقُولُ أَأَنتُمْ أَضْلَلْتُمْ عِبَادِي هَٰؤُلَاءِ أَمْ هُمْ ضَلُّوا السَّبِيلَ
और जिस दिन ख़ुदा उन लोगों को और जिनकी ये लोग ख़ुदा को छोड़कर परसतिश किया करते हैं (उनको) जमा करेगा और पूछेगा क्या तुम ही ने हमारे उन बन्दों को गुमराह कर दिया था या ये लोग खुद राह रास्ते से भटक गए थे
18قَالُوا سُبْحَانَكَ مَا كَانَ يَنبَغِي لَنَا أَن نَّتَّخِذَ مِن دُونِكَ مِنْ أَوْلِيَاءَ وَلَٰكِن مَّتَّعْتَهُمْ وَآبَاءَهُمْ حَتَّىٰ نَسُوا الذِّكْرَ وَكَانُوا قَوْمًا بُورًا
(उनके माबूद) अर्ज़ करेंगें- सुबहान अल्लाह (हम तो ख़ुद तेरे बन्दे थे) हमें ये किसी तरह ज़ेबा न था कि हम तुझे छोड़कर दूसरे को अपना सरपरस्त बनाते (फिर अपने को क्यों कर माबूद बनाते) मगर बात तो ये है कि तू ही ने इनको बाप दादाओं को चैन दिया-यहाँ तक कि इन लोगों ने (तेरी) याद भुला दी और ये ख़ुद हलाक होने वाले लोग थे
19فَقَدْ كَذَّبُوكُم بِمَا تَقُولُونَ فَمَا تَسْتَطِيعُونَ صَرْفًا وَلَا نَصْرًا ۚ وَمَن يَظْلِم مِّنكُمْ نُذِقْهُ عَذَابًا كَبِيرًا
तब (काफ़िरों से कहा जाएगा कि) तुम जो कुछ कह रहे हो उसमें तो तुम्हारे माबूदों ने तुम्हें झूठला दिया तो अब तुम न (हमारे अज़ाब के) टाल देने की सकत रखते हो न किसी से मदद ले सकते हो और (याद रखो) तुममें से जो ज़ुल्म करेगा हम उसको बड़े (सख्त) अज़ाब का (मज़ा) चखाएगें
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीअवतरण स्थान
17आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 17

सूरा अल-फुरकान आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस दिन ख़ुदा उन लोगों को और जिनकी ये…

सूरा आयत 17/77 — सूरा अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फुरकान सुनें, सूरा अल-फुरकान अनुवाद, सूरा अल-फुरकान mp3, सूरा अल-फुरकान pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Friday, October 2, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए