अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- इफ़्क़ (إفك): झूठ, बदतरीन बोहतान और ग़लत बात।
- इफ़्तरा (افتراه): इसे गढ़ लिया, झूठ रच लिया।
- ज़ुल्म (ظلم): अत्याचार, सत्य को छिपाना और असत्य को आगे बढ़ाना।
- ज़ूर (زور): झूठ, जालसाज़ी, विकृत बात।
विस्तृत तफ़सीर:
यह आयत उन काफ़िरों के उस इल्ज़ाम का जवाब देती है जो क़ुरआन को रसूलुल्लाह ﷺ का गढ़ा हुआ झूठ कहते थे। उन्होंने कहा कि यह क़ुरआन कोई सच्ची किताब नहीं, बल्कि एक झूठ है जिसे मुहम्मद (ﷺ) ने खुद रच लिया और कुछ दूसरे लोगों ने उनकी मदद की। वे कहते थे कि यह किताब किसी इंसान का बनाया हुआ कलाम है, जिसे अल्लाह की तरफ़ मंसूब कर दिया गया।
अल्लाह तआला इसका जवाब देते हुए फ़रमाते हैं कि ये लोग खुद जानते हैं कि उनका यह इल्ज़ाम पूरी तरह झूठ और बोहतान है। उन्होंने न सिर्फ़ झूठ बोला, बल्कि सबसे बड़ा ज़ुल्म किया — क्योंकि उन्होंने सच को झूठ कहा और झूठ को सच के रूप में पेश किया। उनका यह क़ौल (कथन) न सिर्फ़ झूठ है, बल्कि एक ऐसा ज़ूर (जालसाज़ी) है जो उनके अपने दिलों की बीमारी को ज़ाहिर करता है।
असल में क़ुरआन ऐसा कलाम है जिसे कोई इंसान, चाहे वह कितना ही फ़सीह (वाक्पटु) क्यों न हो, नहीं बना सकता। यह अल्लाह का कलाम है, जो अपनी बलाग़त (वाक्चातुर्य), गहराई, हिकमत और सच्चाई में अनोखा है। काफ़िरों का यह कहना कि "किसी और ने इसमें मदद की" भी पूरी तरह बेबुनियाद है। इसका कोई सबूत नहीं, और न ही कोई ऐसा इंसान मौजूद है जो यह दावा कर सके कि उसने यह किताब बनाने में मदद की।
यह आयत हमें सिखाती है कि जब लोग सच्चाई के सामने हार जाते हैं, तो वे झूठ का सहारा लेते हैं। लेकिन झूठ कितना भी बड़ा क्यों न हो, सच्चाई हमेशा बुलंद रहती है। क़ुरआन का हर अक्षर सच्चाई की गवाही देता है, और जो लोग इस पर इल्ज़ाम लगाते हैं, वे खुद अपने ज़ुल्म और झूठ में डूबे हुए हैं।
आज भी जब हम क़ुरआन पढ़ते हैं, तो उसकी आयतें हमारे दिलों को रोशनी देती हैं, हमें सही रास्ता दिखाती हैं, और हमारी ज़िंदगी के हर मसले का हल देती हैं। यह किताब किसी इंसान की रचना नहीं, बल्कि उस रब का कलाम है जिसने आसमान और ज़मीन पैदा किए। जो लोग इसे झूठ कहते हैं, वे दरअसल अपनी ही आँखों पर पर्दा डाल रहे हैं और अपने दिलों को अंधा कर रहे हैं। अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 2-6 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 4
सूरा अल-फुरकान आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग काफिर हो गए बोल उठे कि ये…सूरा आयत 4/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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