Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- آلِهَةً: पूजा की जाने वाली मूर्तियाँ और देवता।
- يَخْلُقُونَ: वे पैदा करते हैं।
- يُخْلَقُونَ: वे स्वयं पैदा किए जाते हैं।
- ضَرًّا: हानि, तकलीफ़।
- نَفْعًا: लाभ, भलाई।
- نُشُورًا: मृत्यु के बाद दोबारा उठाया जाना (पुनरुत्थान)।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन (बुतपरस्तों) की उस हालत का ज़िक्र कर रहे हैं जिन्होंने अल्लाह को छोड़कर दूसरे माबूद (पूज्य) बना लिए। ये माबूद वो मूर्तियाँ और पत्थर हैं जिन्हें उन्होंने अपने हाथों से तराश कर बनाया था। अल्लाह फ़रमाता है कि ये मूर्तियाँ किसी भी चीज़ को पैदा नहीं कर सकतीं, जबकि वे खुद पैदा की गई हैं। यानी वे खुद मख़लूक़ (प्राणी) हैं, ख़ालिक़ (सृष्टिकर्ता) नहीं। उन्हें खुद किसी ने बनाया है, फिर वे किसी और को क्या पैदा करेंगी?
इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है कि ये मूर्तियाँ न तो अपने लिए किसी नुक़सान को दूर कर सकती हैं और न ही अपने लिए कोई फ़ायदा हासिल कर सकती हैं। अगर उन पर कोई कीड़ा बैठ जाए या कोई चीज़ गिर जाए, तो वे उसे हटा नहीं सकतीं। अगर कोई उन्हें तोड़ दे, तो वे अपनी रक्षा नहीं कर सकतीं। और सबसे बड़ी बात ये कि उनके पास मौत लाने की, ज़िंदगी देने की, या मरने के बाद दोबारा उठाने की कोई ताक़त नहीं है। वे न किसी को मार सकती हैं, न किसी को ज़िंदा कर सकती हैं, और न ही क़यामत के दिन किसी को उठा सकती हैं।
अब ज़रा ग़ौर फ़रमाइए! जो चीज़ खुद पैदा की गई हो, जो अपने लिए भी किसी भलाई या बुराई की मालिक न हो, जो मौत और ज़िंदगी पर कोई अख़्तियार न रखती हो, वह इबादत (पूजा) की हक़दार कैसे हो सकती है? इबादत तो उसी की होनी चाहिए जो सब कुछ पैदा करने वाला हो, जो हर चीज़ पर क़ुदरत रखता हो, जो ज़िंदगी और मौत देने वाला हो और जो मरने के बाद सबको दोबारा उठाने वाला हो। वही अल्लाह है, जो सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली है।
ये आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करना कितनी बड़ी भूल है। इंसान को चाहिए कि वह सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करे, उसी से मदद माँगे और उसी पर भरोसा रखे। क्योंकि सच्ची कामयाबी और नजात (मुक्ति) सिर्फ़ अल्लाह की इबादत में है। जो लोग अल्लाह को छोड़कर दूसरों की इबादत करते हैं, वे सिर्फ़ अपना नुक़सान करते हैं, क्योंकि ये माबूद उन्हें न तो दुनिया में कोई फ़ायदा पहुँचा सकते हैं और न आख़िरत में। अल्लाह हम सबको सीधी राह दिखाए और हमें सिर्फ़ अपनी इबादत की तौफ़ीक़ दे। आमीन!
📜 आयत 1-5 — सूरा अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 3
सूरा अल-फुरकान आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और लोगों ने उसके सिवा दूसरे दूसरे माबूद बना रखें…सूरा आयत 3/77 — सूरा अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फुरकान सुनें, सूरा अल-फुरकान अनुवाद, सूरा अल-फुरकान mp3, सूरा अल-फुरकान pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-फुरकान
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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