अल-फुरकान · 5/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
وَقَالُوا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ اكْتَتَبَهَا فَهِيَ تُمْلَىٰ عَلَيْهِ بُكْرَةً وَأَصِيلًا ۝٥
Wa qaalooo asaateerul awwaleenak tatabahaa fahiya tumlaa `alaihi bukratanw wa aseelaa
📖 हिंदी अर्थ
तो यक़ीनन ख़ुद उन ही लोगों ने ज़ुल्म व फरेब किया है और (ये भी) कहा कि (ये तो) अगले लोगों के ढकोसले हैं जिसे उसने किसी से लिखवा लिया है पस वही सुबह व शाम उसके सामने पढ़ा जाता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • असातीर (أساطير): कहानियाँ, मिथक, पुरानी बातें।
  • अव्वलीन (الأولين): पिछले लोग, पुरानी उम्मतें।
  • इक्ततबहा (اكتتبها): उसने लिखवा लिया, नक़्ल करवा ली।
  • तुम्ला (تملى): पढ़ी जाती है, सुनाई जाती है।
  • बुकरतन (بكرة): सुबह के समय।
  • असीलन (أصيلا): शाम के समय।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नबी करीम ﷺ ने लोगों को कुरआन की तिलावत सुनाई और उन्हें एक ईश्वर की इबादत की दावत दी, तो मक्का के मुशरिकीन (बहुदेववादियों) ने इस पर अपनी हैरत और इनकार का इज़हार किया। उन्होंने कहा: "यह कुरआन तो बस पुराने लोगों की कहानियाँ हैं, जो पहले की किताबों में लिखी हुई थीं। मुहम्मद ने इन्हें लिखवा लिया है, और ये कहानियाँ उन्हें सुबह-शाम सुनाई जाती हैं, ताकि वे उन्हें याद कर लें और फिर हमें सुनाएँ।"

यह आरोप उन्होंने इसलिए लगाया क्योंकि वे सच्चाई को मानने से इनकार करते थे। उनका दिल अहंकार और अंधी परंपरा से भरा हुआ था, इसलिए उन्होंने कुरआन को जादू, कहानी या शायरी कहने की कोशिश की। लेकिन यह आरोप खुद ही अपनी बेबुनियादी साबित करता है, क्योंकि नबी ﷺ उम्मी (अनपढ़) थे, उन्होंने कभी किसी किताब को पढ़ा या लिखा नहीं था। वे न तो पुरानी किताबों से वाक़िफ़ थे और न ही उन्हें पढ़ने की क्षमता थी। फिर यह कैसे मुमकिन था कि वे पुरानी कहानियाँ इकट्ठा करके उन्हें इस खूबसूरत और बेमिसाल अंदाज़ में पेश करते?

अल्लाह तआला ने इस आरोप का जवाब आगे की आयतों में दिया है, लेकिन यहाँ भी संकेत है कि यह कुरआन किसी इंसान की बनाई हुई चीज़ नहीं, बल्कि अल्लाह का कलाम है। इसमें जो ज्ञान, हिकमत और सच्चाई है, वह किसी इंसान के बस की बात नहीं।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि जब सच्चाई पेश की जाती है, तो बातिल (असत्य) के लोग उसे बदनाम करने की हर मुमकिन कोशिश करते हैं। वे तरह-तरह के बहाने बनाते हैं, लेकिन सच्चाई हमेशा ऊपर रहती है। कुरआन जैसी किताब दुनिया में कोई नहीं ला सकता, और यही इसका सबसे बड़ा चमत्कार है। आज भी अगर हम कुरआन को समझकर पढ़ें, तो हमें यक़ीन हो जाएगा कि यह अल्लाह का कलाम है, जो इंसानों के बस से बाहर है। यह हमारे लिए रहनुमाई और हिदायत का ज़रिया है। हमें चाहिए कि हम कुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, क्योंकि यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।



📜 आयत 3-7 — सूरा अल-फुरकान

3وَاتَّخَذُوا مِن دُونِهِ آلِهَةً لَّا يَخْلُقُونَ شَيْئًا وَهُمْ يُخْلَقُونَ وَلَا يَمْلِكُونَ لِأَنفُسِهِمْ ضَرًّا وَلَا نَفْعًا وَلَا يَمْلِكُونَ مَوْتًا وَلَا حَيَاةً وَلَا نُشُورًا
और लोगों ने उसके सिवा दूसरे दूसरे माबूद बना रखें हैं जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकते बल्कि वह खुद दूसरे के पैदा किए हुए हैं और वह खुद अपने लिए भी न नुक़सान पर क़ाबू रखते हैं न नफा पर और न मौत ही पर एख़्तियार रखते हैं और न ज़िन्दगी पर और न मरने बाद जी उठने पर
4وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا إِفْكٌ افْتَرَاهُ وَأَعَانَهُ عَلَيْهِ قَوْمٌ آخَرُونَ ۖ فَقَدْ جَاءُوا ظُلْمًا وَزُورًا
और जो लोग काफिर हो गए बोल उठे कि ये (क़ुरान) तो निरा झूठ है जिसे उस शख्स (रसूल) ने अपने जी से गढ़ लिया और कुछ और लोगों ने इस इफतिरा परवाज़ी में उसकी मदद भी की है
5وَقَالُوا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ اكْتَتَبَهَا فَهِيَ تُمْلَىٰ عَلَيْهِ بُكْرَةً وَأَصِيلًا
तो यक़ीनन ख़ुद उन ही लोगों ने ज़ुल्म व फरेब किया है और (ये भी) कहा कि (ये तो) अगले लोगों के ढकोसले हैं जिसे उसने किसी से लिखवा लिया है पस वही सुबह व शाम उसके सामने पढ़ा जाता है
6قُلْ أَنزَلَهُ الَّذِي يَعْلَمُ السِّرَّ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ إِنَّهُ كَانَ غَفُورًا رَّحِيمًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि इसको उस शख्स ने नाज़िल किया है जो सारे आसमान व ज़मीन की पोशीदा बातों को ख़ूब जानता है बेशक वह बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
7وَقَالُوا مَالِ هَٰذَا الرَّسُولِ يَأْكُلُ الطَّعَامَ وَيَمْشِي فِي الْأَسْوَاقِ ۙ لَوْلَا أُنزِلَ إِلَيْهِ مَلَكٌ فَيَكُونَ مَعَهُ نَذِيرًا
और उन लोगों ने (ये भी) कहा कि ये कैसा रसूल है जो खाना खाता है और बाज़ारों में चलता है फिरता है उसके पास कोई फरिश्ता क्यों नहीं नाज़िल होता कि वह भी उसके साथ (ख़ुदा के अज़ाब से) डराने वाला होता
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
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5आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 5

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Thursday, October 1, 2026

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