Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- असातीर (أساطير): कहानियाँ, मिथक, पुरानी बातें।
- अव्वलीन (الأولين): पिछले लोग, पुरानी उम्मतें।
- इक्ततबहा (اكتتبها): उसने लिखवा लिया, नक़्ल करवा ली।
- तुम्ला (تملى): पढ़ी जाती है, सुनाई जाती है।
- बुकरतन (بكرة): सुबह के समय।
- असीलन (أصيلا): शाम के समय।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब नबी करीम ﷺ ने लोगों को कुरआन की तिलावत सुनाई और उन्हें एक ईश्वर की इबादत की दावत दी, तो मक्का के मुशरिकीन (बहुदेववादियों) ने इस पर अपनी हैरत और इनकार का इज़हार किया। उन्होंने कहा: "यह कुरआन तो बस पुराने लोगों की कहानियाँ हैं, जो पहले की किताबों में लिखी हुई थीं। मुहम्मद ने इन्हें लिखवा लिया है, और ये कहानियाँ उन्हें सुबह-शाम सुनाई जाती हैं, ताकि वे उन्हें याद कर लें और फिर हमें सुनाएँ।"
यह आरोप उन्होंने इसलिए लगाया क्योंकि वे सच्चाई को मानने से इनकार करते थे। उनका दिल अहंकार और अंधी परंपरा से भरा हुआ था, इसलिए उन्होंने कुरआन को जादू, कहानी या शायरी कहने की कोशिश की। लेकिन यह आरोप खुद ही अपनी बेबुनियादी साबित करता है, क्योंकि नबी ﷺ उम्मी (अनपढ़) थे, उन्होंने कभी किसी किताब को पढ़ा या लिखा नहीं था। वे न तो पुरानी किताबों से वाक़िफ़ थे और न ही उन्हें पढ़ने की क्षमता थी। फिर यह कैसे मुमकिन था कि वे पुरानी कहानियाँ इकट्ठा करके उन्हें इस खूबसूरत और बेमिसाल अंदाज़ में पेश करते?
अल्लाह तआला ने इस आरोप का जवाब आगे की आयतों में दिया है, लेकिन यहाँ भी संकेत है कि यह कुरआन किसी इंसान की बनाई हुई चीज़ नहीं, बल्कि अल्लाह का कलाम है। इसमें जो ज्ञान, हिकमत और सच्चाई है, वह किसी इंसान के बस की बात नहीं।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि जब सच्चाई पेश की जाती है, तो बातिल (असत्य) के लोग उसे बदनाम करने की हर मुमकिन कोशिश करते हैं। वे तरह-तरह के बहाने बनाते हैं, लेकिन सच्चाई हमेशा ऊपर रहती है। कुरआन जैसी किताब दुनिया में कोई नहीं ला सकता, और यही इसका सबसे बड़ा चमत्कार है। आज भी अगर हम कुरआन को समझकर पढ़ें, तो हमें यक़ीन हो जाएगा कि यह अल्लाह का कलाम है, जो इंसानों के बस से बाहर है। यह हमारे लिए रहनुमाई और हिदायत का ज़रिया है। हमें चाहिए कि हम कुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, क्योंकि यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 3-7 — सूरा अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 5
सूरा अल-फुरकान आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो यक़ीनन ख़ुद उन ही लोगों ने ज़ुल्म व फरेब…सूरा आयत 5/77 — सूरा अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फुरकान सुनें, सूरा अल-फुरकान अनुवाद, सूरा अल-फुरकान mp3, सूरा अल-फुरकान pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-फुरकान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


