अश-शुआरा · 103/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ۝١٠٣
Inna fee zaalika la Aayatanw wa maa kaana aksaruhum mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
इबराहीम के इस किस्से में भी यक़ीनन एक बड़ी इबरत है और इनमें से अक्सर ईमान लाने वाले थे भी नहीं

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آيَةً – निशानी, सबक, शिक्षा लेने की जगह
  • أَكْثَرُهُم – उनमें से अधिकतर लोग
  • مُؤْمِنِينَ – ईमान लाने वाले, विश्वास करने वाले

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की वह पूरी दास्तान याद दिला रहे हैं जो पहले की आयात में बयान हुई। उनकी क़ौम ने उन्हें झुठलाया, उनकी दावत को नकारा, और आख़िरकार अल्लाह ने उन्हें बचा लिया और झुठलाने वालों को हलाक कर दिया।

इस पूरे वाक़िये में उन लोगों के लिए बड़ी निशानी और सबक है जो दिल से सीखना चाहते हैं। यह सिर्फ़ एक कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसा सबक है जो हर ज़माने के इंसान के लिए रहनुमाई करता है। जो लोग हक़ को नकारते हैं, उनका अंजाम तबाही है, और जो अल्लाह पर भरोसा करते हैं, वही कामयाब होते हैं।

लेकिन अफ़सोस! उनमें से अधिकतर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे। उन्होंने इतनी बड़ी निशानी देखने के बाद भी अपनी ज़िद और हठधर्मी पर क़ायम रहे। यह उनकी नादानी थी कि उन्होंने सच्चाई को क़बूल नहीं किया, जबकि सच्चाई उनके सामने वाज़ेह थी।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की निशानियाँ हर तरफ बिखरी हुई हैं — आसमान में, ज़मीन में, पिछली उम्मतों के वाक़ियात में। जो इन निशानियों पर ग़ौर करता है, वह ईमान की राह पा लेता है। और जो आँखें बंद कर लेता है, वह गुमराही में ही रह जाता है।

अल्लाह तआला इस आयत के बाद फ़रमाते हैं कि वह ज़बरदस्त है, अपने दुश्मनों से बदला लेने वाला है, और अपने ईमानदार बंदों पर बड़ा रहम करने वाला है। यह दोनों सिफ़ात — जलाल और जमाल — मिलकर हमें बताती हैं कि अल्लाह की राह पर चलने वालों के लिए रहमत है, और उसकी नाफ़रमानी करने वालों के लिए अज़ाब।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें बुला रही है कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करें। कुरआन की हर आयत, हर कहानी, हर वाक़िया हमारे लिए रौशनी है। जो इसे पढ़ता है और अमल करता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। अल्लाह हमें उन लोगों में शामिल करे जो निशानियों से सबक सीखते हैं और ईमान पर साबित क़दम रहते हैं। आमीन।



📜 आयत 101-105 — अश-शुआरा

101وَلَا صَدِيقٍ حَمِيمٍ
और न कोई दिलबन्द दोस्त हैं
102فَلَوْ أَنَّ لَنَا كَرَّةً فَنَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
तो काश हमें अब दुनिया में दोबारा जाने का मौक़ा मिलता तो हम (ज़रुर) ईमान वालों से होते
103إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
इबराहीम के इस किस्से में भी यक़ीनन एक बड़ी इबरत है और इनमें से अक्सर ईमान लाने वाले थे भी नहीं
104وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमे तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार (सब पर) ग़ालिब और बड़ा मेहरबान है
105كَذَّبَتْ قَوْمُ نُوحٍ الْمُرْسَلِينَ
(यूँ ही) नूह की क़ौम ने पैग़म्बरो को झुठलाया
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीRevelation
103आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 103

सूरा अश-शुआरा आयत 103 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इबराहीम के इस किस्से में भी यक़ीनन एक बड़ी इबरत…

सूरा आयत 103/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 101–105. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए