अश-शुआरा · 104/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ ۝١٠٤
Wa inna Rabbaka la Huwal `Azeezur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
और इसमे तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार (सब पर) ग़ालिब और बड़ा मेहरबान है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • العَزِيزُ: वह शक्तिशाली जो कभी पराजित न हो, सब पर ग़ालिब और प्रभुत्वशाली।
  • الرَّحِيمُ: अत्यंत दयालु, जो अपने बंदों पर असीम रहमत और करुणा करने वाला है।

तफ़सीर:

ऐ नबी! यक़ीन जानिए कि आपका रब ही सच्चा अज़ीज़ (सर्वशक्तिमान) है—वह अपने दुश्मनों से बदला लेने पर पूरी ताक़त रखता है और उसकी क़ुदरत के आगे कोई नहीं टिक सकता। वही रहीम (बेहद मेहरबान) है, जो अपने ईमानवाले बंदों पर दया करता है और उन्हें अपनी रहमत से नवाज़ता है। यह आयत उन लोगों के लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी है जो सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करते हैं—चाहे उनसे पहले कितनी भी ग़लतियाँ हुई हों, उसकी रहमत उन्हें गले लगाने के लिए बाहें फैलाए खड़ी है।

इस आयत में दो पहलू हैं: एक तरफ़ अज़ीज़ होने का एलान है कि झुठलाने वालों और सरकशों के लिए अंजाम बहुत सख्त है, क्योंकि अल्लाह की पकड़ से बचना नामुमकिन है। दूसरी तरफ़ रहीम होने का वादा है कि जो लोग अपनी ग़लतियों पर पछताएँ और तौबा करके उसकी राह पर चलें, उनके लिए उसकी मग़फिरत और रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत से कभी मायूस न हों, और उसकी ताक़त से कभी ग़ाफ़िल न हों। जो उस पर भरोसा करता है, उसे किसी का डर नहीं; और जो उसकी पनाह में आ जाता है, उसे कभी कोई नुक़सान नहीं पहुँचा सकता। यही वह रास्ता है जो दिलों को सुकून देता है और ज़िंदगी को कामयाबी की तरफ़ ले जाता है।



📜 आयत 102-106 — सूरा अश-शुआरा

102فَلَوْ أَنَّ لَنَا كَرَّةً فَنَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
तो काश हमें अब दुनिया में दोबारा जाने का मौक़ा मिलता तो हम (ज़रुर) ईमान वालों से होते
103إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
इबराहीम के इस किस्से में भी यक़ीनन एक बड़ी इबरत है और इनमें से अक्सर ईमान लाने वाले थे भी नहीं
104وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमे तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार (सब पर) ग़ालिब और बड़ा मेहरबान है
105كَذَّبَتْ قَوْمُ نُوحٍ الْمُرْسَلِينَ
(यूँ ही) नूह की क़ौम ने पैग़म्बरो को झुठलाया
106إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ نُوحٌ أَلَا تَتَّقُونَ
कि जब उनसे उन के भाई नूह ने कहा कि तुम लोग (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते मै तो तुम्हारा यक़ीनी अमानत दार पैग़म्बर हूँ
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
104आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 104

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Sunday, October 4, 2026

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