Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अख़ाफु: मैं डरता हूँ।
- अज़ाब: यातना, दंड।
- यौमिन अज़ीम: महान दिन, यानी क़ियामत का दिन।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत हूद अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को नसीहत करते हुए फ़रमाया: "मैं तुम्हारे हाल पर डरता हूँ कि अगर तुम अपनी ज़िद, कुफ्र और अल्लाह की नेअमतों की नाशुक्री पर क़ायम रहे, तो तुम पर अल्लाह का वो अज़ाब नाज़िल हो सकता है जो क़ियामत के दिन आएगा—वो दिन जिसकी हौलनाकी और सख्ती से हर शख्स काँप उठेगा। यह अज़ाब सिर्फ आख़िरत तक महदूद नहीं, बल्कि दुनिया में भी अल्लाह की पकड़ आ सकती है, और आख़िरत का अज़ाब तो सबसे बड़ा और हमेशा रहने वाला है।
यहाँ हज़रत हूद अलैहिस्सलाम की शफ़्क़त और मुहब्बत देखिए—वे अपनी क़ौम को अज़ाब की धमकी दे रहे हैं, लेकिन दिल में उनके लिए रहमत और खैरख्वाही भरी है। वे चाहते हैं कि क़ौम सुधर जाए और अल्लाह के अज़ाब से बच जाए। यह एक नबी की सीरत है कि वह अपनी उम्मत की भलाई के लिए हर मुमकिन कोशिश करता है, चाहे लोग उसे झुठलाएँ या सताएँ।
इस आयत से हमें सबक मिलता है कि अल्लाह के नाफ़रमानी से डरना चाहिए, और उस दिन की याद रखनी चाहिए जब कोई अमल, कोई रिश्ता, कोई दौलत काम नहीं आएगी। मोमिन की शान है कि वह दुनिया में रहते हुए आख़िरत की फिक्र करे, और अपने अमल को दुरुस्त करे। अल्लाह तआला रहमत वाला है, लेकिन उसका अज़ाब भी बहुत सख्त है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने नबियों की तालीमात पर अमल करें, और उस दिन की तैयारी करें जिसमें कोई शक नहीं। यही कामयाबी की राह है—दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
📜 आयत 133-137 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 135
सूरा अश-शुआरा आयत 135 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : एक बड़े (सख्त) रोज़ के अज़ाब से डरता हूँसूरा आयत 135/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 133–137. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


