Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- سَوَاءٌ عَلَيْنَا: हमारे लिए बराबर है, एक समान है।
- أَوَعَظْتَ: क्या तुमने हमें नसीहत दी, समझाया-बुझाया।
- الْوَاعِظِينَ: नसीहत करने वाले, उपदेश देने वाले।
तफ़सीर:
जब हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम 'आद' को तौहीद की दावत दी, अल्लाह के अज़ाब से डराया और उन्हें रास्ते पर लाने की पूरी कोशिश की, तो उनकी क़ौम ने बड़ी ही बेरुखी और अकड़ के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा: "हमारे लिए तो बराबर है—चाहे तू हमें नसीहत करे या न करे। हम तेरी बात मानने वाले नहीं हैं, और न ही तेरे उपदेश का हम पर कोई असर होगा।"
यह वाक्य उनकी जिद, हठधर्मिता और सत्य से मुँह मोड़ने की चरम स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने नबी की नसीहत को बेकार और बेमतलब करार दिया, जैसे कि सच्चाई उनके लिए कोई अहमियत ही नहीं रखती। उनका यह रवैया अल्लाह की रहमत और हिदायत के दरवाज़े को खुद अपने ऊपर बंद करने जैसा था।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि इंसान को कभी भी नसीहत और सच्चाई से इतना बेरुखा नहीं होना चाहिए। दिल की सख्ती और अहंकार इंसान को हिदायत से महरूम कर देता है। जो लोग नबियों की दावत को अनसुना कर देते हैं, वे अक्सर अल्लाह के अज़ाब का शिकार हो जाते हैं, जैसा कि 'आद की क़ौम के साथ हुआ।
याद रखिए! नसीहत सुनना और उस पर अमल करना इंसान की कामयाबी की कुंजी है। अल्लाह तआला ने कुरआन में जगह-जगह नसीहत को रहमत और हिदायत का ज़रिया बताया है। जो दिल नसीहत से नरम नहीं होता, वह धीरे-धीरे सख्त होता जाता है, और फिर हिदायत उस पर हराम हो जाती है। हमें चाहिए कि हम हर अच्छी बात को खुले दिल से सुनें, क्योंकि सच्ची नसीहत ही इंसान को जहन्नुम की आग से बचाकर जन्नत की राह दिखाती है।
📜 आयत 134-138 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 136
सूरा अश-शुआरा आयत 136 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग कहने लगे ख्वाह तुम नसीहत करो या न…सूरा आयत 136/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 134–138. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 4, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


