अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- जन्नात (جَنَّات): बाग़, बग़ीचे, हरे-भरे बग़ीचे।
- उयून (عُيُون): बहते हुए चश्मे, सोते, जल के स्रोत।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने अपने नबी हज़रत सालेह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम 'समूद' को नेक़मतें याद दिलाते हुए फ़रमाया कि उन्हें कितनी नेअमतें दी गई थीं। उन्हें जानवर (ऊँट, गाय, बकरी), बेटे, और फिर यहाँ ज़िक्र है कि अल्लाह ने उन्हें बाग़ात (जन्नात) और बहते हुए चश्मे (उयून) अता किए थे। यानी उन्हें हरी-भरी ज़मीनें, फलदार बाग़ और ऐसे पानी के सोते दिए गए थे जो लगातार बहते रहते थे, ताकि वे आराम से जीवन बिताएँ और अल्लाह की इबादत करें।
यह नेअमतें अल्लाह की तरफ़ से महज़ उनके लिए थीं, लेकिन जब उन्होंने शुक्र नहीं किया और नबी की नसीहत को नहीं माना, तो यही नेअमतें उनके लिए अज़ाब का सबब बन गईं। अल्लाह तआला ने उन्हें आगाह किया कि इन नेअमतों के बदले उन्हें अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और उसकी इबादत करनी चाहिए, न कि सरकशी और इनकार करना चाहिए।
इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि अल्लाह की दी हुई नेअमतें — चाहे वो माल हों, औलाद हों, बाग़ हों या पानी के सोते — सब अल्लाह की रहमत हैं। हमें इनका शुक्र अदा करना चाहिए और इन्हें अल्लाह की राह में इस्तेमाल करना चाहिए। जो लोग नेअमतें पाकर अल्लाह से ग़ाफ़िल हो जाते हैं, वे बड़े नुक़सान में रहते हैं। अल्लाह तआला हमें शुक्रगुज़ार बंदे बनाए और हमें अपनी हर नेअमत का सही इस्तेमाल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 132-136 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 134
सूरा अश-शुआरा आयत 134 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मै तो यक़ीनन तुम परसूरा आयत 134/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 132–136. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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