अश-शुआरा · 134/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَجَنَّاتٍ وَعُيُونٍ ۝١٣٤
Wa jannaatinw wa `uyoon
📖 हिंदी अर्थ
मै तो यक़ीनन तुम पर

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • जन्नात (جَنَّات): बाग़, बग़ीचे, हरे-भरे बग़ीचे।
  • उयून (عُيُون): बहते हुए चश्मे, सोते, जल के स्रोत।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने नबी हज़रत सालेह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम 'समूद' को नेक़मतें याद दिलाते हुए फ़रमाया कि उन्हें कितनी नेअमतें दी गई थीं। उन्हें जानवर (ऊँट, गाय, बकरी), बेटे, और फिर यहाँ ज़िक्र है कि अल्लाह ने उन्हें बाग़ात (जन्नात) और बहते हुए चश्मे (उयून) अता किए थे। यानी उन्हें हरी-भरी ज़मीनें, फलदार बाग़ और ऐसे पानी के सोते दिए गए थे जो लगातार बहते रहते थे, ताकि वे आराम से जीवन बिताएँ और अल्लाह की इबादत करें।

यह नेअमतें अल्लाह की तरफ़ से महज़ उनके लिए थीं, लेकिन जब उन्होंने शुक्र नहीं किया और नबी की नसीहत को नहीं माना, तो यही नेअमतें उनके लिए अज़ाब का सबब बन गईं। अल्लाह तआला ने उन्हें आगाह किया कि इन नेअमतों के बदले उन्हें अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और उसकी इबादत करनी चाहिए, न कि सरकशी और इनकार करना चाहिए।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि अल्लाह की दी हुई नेअमतें — चाहे वो माल हों, औलाद हों, बाग़ हों या पानी के सोते — सब अल्लाह की रहमत हैं। हमें इनका शुक्र अदा करना चाहिए और इन्हें अल्लाह की राह में इस्तेमाल करना चाहिए। जो लोग नेअमतें पाकर अल्लाह से ग़ाफ़िल हो जाते हैं, वे बड़े नुक़सान में रहते हैं। अल्लाह तआला हमें शुक्रगुज़ार बंदे बनाए और हमें अपनी हर नेअमत का सही इस्तेमाल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 132-136 — सूरा अश-शुआरा

132وَاتَّقُوا الَّذِي أَمَدَّكُم بِمَا تَعْلَمُونَ
और उस शख्स से डरो जिसने तुम्हारी उन चीज़ों से मदद की जिन्हें तुम खूब जानते हो
133أَمَدَّكُم بِأَنْعَامٍ وَبَنِينَ
अच्छा सुनो उसने तुम्हारे चार पायों और लड़के बालों वग़ैरह और चश्मों से मदद की
134وَجَنَّاتٍ وَعُيُونٍ
मै तो यक़ीनन तुम पर
135إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
एक बड़े (सख्त) रोज़ के अज़ाब से डरता हूँ
136قَالُوا سَوَاءٌ عَلَيْنَا أَوَعَظْتَ أَمْ لَمْ تَكُن مِّنَ الْوَاعِظِينَ
वह लोग कहने लगे ख्वाह तुम नसीहत करो या न नसीहत करो हमारे वास्ते (सब) बराबर है
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
134आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 134

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Saturday, October 3, 2026

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