Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
* وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ: अपने पंख झुका दो, अर्थात नम्रता और विनम्रता अपनाओ, अपना पहलू नरम करो।
* لِمَنِ اتَّبَعَكَ: उन लोगों के लिए जिन्होंने तुम्हारा अनुसरण किया।
* مِنَ الْمُؤْمِنِينَ: ईमानवालों में से।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को एक बहुत ही प्यारी और अहम शिक्षा दे रहे हैं। यह आदेश उस समय आया जब नबी ﷺ ने अपने क़रीबी रिश्तेदारों को इस्लाम की दावत दी और कुछ लोग ईमान लाए। अल्लाह फ़रमाता है कि ऐ मेरे नबी! जो लोग तुम पर ईमान लाए हैं, उनके साथ नरमी, मुहब्बत और शफ़्क़त से पेश आओ। अपने आपको उनके लिए झुका दो, यानी उनके साथ ऐसा सुलूक करो जैसे एक मेहरबान बाप अपने बच्चों के साथ करता है, या एक प्यारा भाई अपने भाई के साथ करता है।
यह आदेश सिर्फ़ नबी ﷺ के लिए नहीं था, बल्कि हर उस इंसान के लिए है जो अल्लाह की राह में दावत देता है। दावत का सबसे बड़ा हथियार अख़लाक़ (अच्छा चरित्र) है। जब एक दाई (दावत देने वाला) नम्र, विनम्र और मुहब्बत भरा अंदाज़ अपनाता है, तो लोगों के दिल उसकी तरफ खिंचते हैं। लेकिन अगर वह सख्त और अक्खड़ है, तो लोग उससे दूर भागेंगे और दावत का असर खत्म हो जाएगा।
यहाँ एक और नुक्ता समझना ज़रूरी है कि यह नम्रता और विनम्रता सिर्फ़ उन लोगों के लिए है जो ईमान लाए हैं और नबी ﷺ के साथ हैं। जो लोग फ़ासिक़ (बदकार) हैं या मुनाफ़िक़ (दिखावटी मुसलमान) हैं, उनके लिए ऐसी नम्रता नहीं दिखानी चाहिए जो उन्हें अपनी शरारतों पर उकसाए। बल्कि उनके साथ सख्ती और स्पष्टता से पेश आना चाहिए, ताकि वे समझें कि ईमानवालों के साथ मुहब्बत और नाफ़रमानों के साथ सख्ती का रवैया अलग-अलग है।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हम अपने मुसलमान भाइयों के साथ नरमी, मुहब्बत और इख़लास से पेश आएं। उनकी कमज़ोरियों पर सब्र करें, उनकी मदद करें, और उनके साथ ऐसा सुलूक करें जिससे उनका दिल हमारी तरफ माइल हो। यही तरीका है जिससे इस्लाम की खूबसूरती लोगों तक पहुंचती है और दिल इस्लाम की तरफ खिंचते हैं। अल्लाह हमें यह तौफ़ीक़ दे कि हम अपने नबी ﷺ की इस शिक्षा पर अमल करें और अपने मुसलमान भाइयों के साथ मुहब्बत और नम्रता से पेश आएं। आमीन।
📜 आयत 213-217 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 215
सूरा अश-शुआरा आयत 215 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो मोमिनीन तुम्हारे पैरो हो गए हैं उनके सामने…सूरा आयत 215/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 213–217. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


