Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَأَنذِرْ: डराओ, सचेत करो, चेतावनी दो।
- عَشِيرَتَكَ: तुम्हारे क़रीबी रिश्तेदार, तुम्हारा ख़ानदान, तुम्हारे क़बीले वाले।
- الْأَقْرَبِينَ: सबसे नज़दीकी, जो रिश्ते में बहुत पास हों।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! अल्लाह तआला आपको हुक्म दे रहा है कि सबसे पहले अपने सबसे क़रीबी रिश्तेदारों को चेतावनी दो। यानी जो लोग आपके ख़ून के रिश्ते में सबसे नज़दीक हैं — आपके चाचा, चचेरे भाई, और दूसरे क़रीबी अज़ीज़ — उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराओ, उन्हें बताओ कि जब तक वे शिर्क और बुत-परस्ती पर क़ायम रहेंगे, अल्लाह का कठोर अज़ाब उन पर नाज़िल हो सकता है।
यह हुक्म उस वक़्त आया जब इस्लाम की दावत अभी छिपी हुई थी और नबी ﷺ ने सबसे पहले अपने घर वालों और क़रीबी रिश्तेदारों को इस दीन की तरफ़ बुलाया। आपने ﷺ अपने क़बीले के लोगों को इकट्ठा किया और फ़रमाया: "मैं तुम्हारे लिए एक सख़्त अज़ाब से पहले चेतावनी देने वाला हूँ।" यानी मैं तुम्हें उस अज़ाब से आगाह कर रहा हूँ जो तुम पर आने वाला है, अगर तुम अपनी ग़लत राह पर बने रहे।
इस आयत में दावत का एक बुनियादी उसूल सिखाया गया है — पहले अपने सबसे क़रीबी लोगों को सच्चाई से आगाह करो। नबी ﷺ ने इस हुक्म पर अमल करते हुए अपने रिश्तेदारों को प्यार और शफ़्क़त के साथ बुलाया, और उन्हें अल्लाह की तौहीद की तरफ़ दावत दी।
यह हमारे लिए भी एक सबक़ है कि हम अपने घर वालों और रिश्तेदारों को अच्छी बातों की नसीहत करें, उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराएँ और जन्नत की राह दिखाएँ। अगर हम अपने सबसे क़रीबी लोगों को सीधी राह पर नहीं लाते, तो दूसरों तक पैग़ाम पहुँचाना मुश्किल है।
और याद रखें — नबी ﷺ ने अपने रिश्तेदारों को सिर्फ़ डराया ही नहीं, बल्कि उनके लिए रहमत और हिदायत की दुआ भी की। हमें भी अपने अज़ीज़ों के लिए नरमी, मुहब्बत और हिम्मत के साथ दावत देनी चाहिए, ताकि वे दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों। अल्लाह हमें अपने घर वालों की सही तरबियत करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 212-216 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 214
सूरा अश-शुआरा आयत 214 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुम अपने क़रीबी रिश्तेदारों को (अज़ाबे ख़ुदा…सूरा आयत 214/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 212–216. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


