अश-शुआरा · 216/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
فَإِنْ عَصَوْكَ فَقُلْ إِنِّي بَرِيءٌ مِّمَّا تَعْمَلُونَ ۝٢١٦
Fa in asawka faqul innee bareee`um mimmmaa ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
(तो वाज़ेए करो) पस अगर लोग तुम्हारी नाफ़रमानी करें तो तुम (साफ साफ) कह दो कि मैं तुम्हारे करतूतों से बरी उज़ ज़िम्मा हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَإِنْ عَصَوْكَ – यदि वे आपकी अवज्ञा करें (आपके आदेश का पालन न करें)
  • بَرِيءٌ – मैं बरी हूँ, मेरा कोई संबंध नहीं है, मैं पवित्र और अलग हूँ
  • مِمَّا تَعْمَلُونَ – उन कार्यों से जो तुम करते हो

विस्तृत व्याख्या:

अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को निर्देश दे रहे हैं कि जब आप लोगों को सत्य का संदेश दें, उन्हें एकेश्वरवाद (तौहीद) और अल्लाह की आज्ञा का पालन करने की ओर बुलाएँ, लेकिन वे आपकी बात न मानें, आपके आदेशों की अवहेलना करें और अपनी जिद और अहंकार पर अड़े रहें, तो आप उनसे स्पष्ट रूप से कह दें: "मेरा तुमसे और तुम्हारे कर्मों से कोई संबंध नहीं है। मैं उन सब कार्यों से बरी हूँ जो तुम करते हो—चाहे वह शिर्क हो, कुफ्र हो, या अन्य कोई पाप और अवज्ञा।"

यह आयत नबी ﷺ और उनकी उम्मत के लिए एक महत्वपूर्ण शिक्षा है कि सत्य का प्रचार करने के बाद यदि लोग उसे अस्वीकार करें, तो दावत देने वाले का कर्तव्य है कि वह अपनी जिम्मेदारी निभा चुका है और अब उसे उनके गलत कर्मों से अपनी बेज़री (अलगाव) का ऐलान कर देना चाहिए। यह बेज़री का ऐलान उनके लिए एक चेतावनी भी है और दावत देने वाले के लिए मन की शांति का साधन भी।

इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने ईमान और सिद्धांतों पर दृढ़ रहना चाहिए। यदि हमारे आस-पास के लोग बुराई पर अड़े रहें, तो हमें उनके कार्यों से अपनी दूरी स्पष्ट कर देनी चाहिए, लेकिन साथ ही उनके लिए दुआ करते रहना चाहिए कि अल्लाह उन्हें हिदायत दे। यही नबी ﷺ का तरीका था—आपने कभी लोगों से नफरत नहीं की, बल्कि उनके बुरे कर्मों से बेज़री का ऐलान किया और उनकी हिदायत के लिए दुआ करते रहे।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि सत्य के मार्ग पर चलने वालों को कभी अकेलापन महसूस नहीं करना चाहिए। भले ही पूरी दुनिया उनका साथ छोड़ दे, अल्लाह उनके साथ है। और जब हमारा संबंध अल्लाह से होता है, तो दुनिया की कोई ताकत हमें विचलित नहीं कर सकती। यही वह दृढ़ता है जो एक मुसलमान को दूसरों से अलग करती है—वह सत्य पर कायम रहता है, चाहे उसे अकेले ही क्यों न चलना पड़े।

अल्लाह तआला हम सभी को सत्य पर दृढ़ रहने और अपने ईमान की रक्षा करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 214-218 — सूरा अश-शुआरा

214وَأَنذِرْ عَشِيرَتَكَ الْأَقْرَبِينَ
और (ऐ रसूल) तुम अपने क़रीबी रिश्तेदारों को (अज़ाबे ख़ुदा से) डराओ
215وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ لِمَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
और जो मोमिनीन तुम्हारे पैरो हो गए हैं उनके सामने अपना बाजू झुकाओ
216فَإِنْ عَصَوْكَ فَقُلْ إِنِّي بَرِيءٌ مِّمَّا تَعْمَلُونَ
(तो वाज़ेए करो) पस अगर लोग तुम्हारी नाफ़रमानी करें तो तुम (साफ साफ) कह दो कि मैं तुम्हारे करतूतों से बरी उज़ ज़िम्मा हूँ
217وَتَوَكَّلْ عَلَى الْعَزِيزِ الرَّحِيمِ
और तुम उस (ख़ुदा) पर जो सबसे (ग़ालिब और) मेहरबान है
218الَّذِي يَرَاكَ حِينَ تَقُومُ
भरोसा रखो कि जब तुम (नमाजे तहज्जुद में) खड़े होते हो
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
216आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 216

सूरा अश-शुआरा आयत 216 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तो वाज़ेए करो) पस अगर लोग तुम्हारी नाफ़रमानी करें तो…

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Saturday, October 3, 2026

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