अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَطْمَعُ: मैं आशा रखता हूँ, मैं उम्मीद करता हूँ
- خَطِيئَتِي: मेरी ग़लती, मेरा पाप
- يَوْمَ الدِّينِ: प्रतिशोध (बदला) के दिन, यानी क़ियामत के दिन
तफ़सीर:
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम को समझा रहे हैं कि जिन मूर्तियों की तुम पूजा करते हो, वे न तो सुन सकती हैं, न फ़ायदा पहुँचा सकती हैं और न नुक़सान। वे मेरे दुश्मन हैं, क्योंकि वे अल्लाह के सिवा कुछ नहीं कर सकतीं। मैं तो सिर्फ़ उस रब की इबादत करता हूँ जिसने मुझे पैदा किया, मुझे हिदायत दी, मुझे खाना और पीना दिया, बीमारी में शिफ़ा दी, और जो मुझे मौत देगा और फिर क़ियामत के दिन ज़िंदा करेगा।
इस आयत में हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम एक और बात बयान कर रहे हैं — वह यह कि "वही अल्लाह है जिससे मैं आशा रखता हूँ कि वह मेरी ख़ताओं को माफ़ कर देगा"। यानी मेरी नज़र सिर्फ़ अल्लाह की रहमत पर है, उसी से मुझे माफ़ी की उम्मीद है। वह जानता है कि इंसान से ग़लतियाँ हो जाती हैं, लेकिन उसकी रहमत बहुत बड़ी है।
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी कुछ छोटी-सी ग़लतियों की तरफ़ इशारा किया — जैसे बीमार होने का ज़िक्र करना, मूर्तियों के बारे में कहना कि "शायद बड़े ने यह किया होगा", या यह कहना कि "मैं बीमार हूँ" — ये सब वे चीज़ें थीं जिन्हें उन्होंने अपनी कमज़ोरी समझा और अल्लाह से माफ़ी की उम्मीद जताई। यह हमें सिखाता है कि नबियों की ज़ात से भी छोटी-मोटी बातें सरज़द होती हैं, लेकिन वे फ़ौरन अल्लाह की तरफ़ रुजू करते हैं और उससे माफ़ी माँगते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी देती है — अगर हज़रत इब्राहीम जैसे अज़ीम नबी को अपनी ग़लतियों की माफ़ी की उम्मीद है, तो हम जैसे आम इंसानों को तो और भी ज़्यादा अल्लाह की रहमत से उम्मीद रखनी चाहिए। अल्लाह तआला बहुत माफ़ करने वाला है, वह अपने बंदों की ग़लतियों को माफ़ करना पसंद करता है। जब तक इंसान ज़िंदा है, उसके पास तौबा का दरवाज़ा खुला है। हमें कभी अल्लाह की रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए, बल्कि हर वक़्त उसी से माफ़ी की उम्मीद रखनी चाहिए — क्योंकि माफ़ी की सबसे बड़ी ज़रूरत उस दिन होगी जब कोई मददगार न होगा, सिर्फ़ अल्लाह की रहमत ही काम आएगी।
याद रखिए — अल्लाह की रहमत उसके ग़ज़ब से कहीं ज़्यादा है। जिसने एक बार दिल से तौबा कर ली, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है। हज़रत इब्राहीम की यह दुआ हमारे लिए एक नमूना है कि हम भी रोज़ अल्लाह से यही माँगें: "ऐ अल्लाह! मुझे उस दिन माफ़ कर दे जब हर इंसान अपने आमाल का हिसाब देगा।"
📜 आयत 80-84 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 82
सूरा अश-शुआरा आयत 82 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह वही है जिससे मै उम्मीद रखता हूँ कि…सूरा आयत 82/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 80–84. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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