अश-शुआरा · 83/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
رَبِّ هَبْ لِي حُكْمًا وَأَلْحِقْنِي بِالصَّالِحِينَ ۝٨٣
Rabbi hab lee hukmanw wa alhiqnee bis saaliheen
📖 हिंदी अर्थ
परवरदिगार मुझे इल्म व फहम अता फरमा और मुझे नेकों के साथ शामिल कर

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • हब ली – मुझे प्रदान कर
  • हुक्मन – नबुव्वत (पैग़म्बरी), समझ और निर्णय की शक्ति
  • अल्हिक़्नी – मुझे मिला दे, मुझे शामिल कर ले
  • बिस्सालिहीन – नेक लोगों के साथ, पिछले पैग़म्बरों के समूह में

तफ़सीर (व्याख्या):

यह हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की वो पाक दुआ है जो उन्होंने अपने रब के सामने पेश की। वे अल्लाह से दो चीज़ें माँग रहे हैं:

पहली दुआ: "रब्बे हब ली हुक्मन" – ऐ मेरे पालनहार! मुझे हुक्म (नबुव्वत, समझ और सही फ़ैसले की ताक़त) अता फ़रमा। यानी मुझे वह इल्म और फ़हम दे जो हक़ और बातिल में फ़र्क़ करने की क़ुदरत दे, मुझे दीन की समझ दे, और मुझे वह मर्तबा अता कर जो तूने अपने चुने हुए बंदों को दिया है। यह सिर्फ़ इल्म की दुआ नहीं, बल्कि अमल की तौफ़ीक़ की दुआ है – कि इल्म के साथ सही अमल करने की ताक़त भी दे।

दूसरी दुआ: "व अल्हिक़्नी बिस्सालिहीन" – और मुझे नेक लोगों के साथ मिला दे। यानी मुझे अपने पिछले पैग़म्बरों और नेक बंदों के साथ शामिल कर ले – दुनिया में भी उनके नक़्शे-क़दम पर चलने की तौफ़ीक़ दे, और आख़िरत में भी उन्हीं के साथ जन्नत में दाख़िल कर। यह दुआ इंसान की फ़ितरत को बयान करती है कि वह अकेला नहीं रहना चाहता, बल्कि अच्छे लोगों की संगत और सोहबत चाहता है।

दुआ का पैग़ाम:

यह दुआ हमें सिखाती है कि सच्चा मुसलमान हमेशा इल्म, समझ और नेकी की तरक़्क़ी की दुआ करता है। वह सिर्फ़ दुनिया की चीज़ें नहीं माँगता, बल्कि उस चीज़ की दुआ करता है जो उसे अल्लाह के करीब लाए। हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी पूरी ज़िंदगी में अल्लाह की राह में क़ुर्बानियाँ दीं – आग में झोंके गए, वतन छोड़ा, बेटे को क़ुर्बानी के लिए पेश किया – और इन सबके बाद भी उन्होंने अल्लाह से जो चीज़ माँगी वह थी "हुक्म" और "नेक लोगों की संगत"। यह हमें बताता है कि असली कामयाबी दुनिया के माल-दौलत में नहीं, बल्कि अल्लाह की मोहब्बत और उसके नेक बंदों के साथ होने में है।

आज हमें भी यह दुआ पढ़नी चाहिए और अल्लाह से इल्म, समझ और नेक लोगों की सोहबत की दुआ करनी चाहिए। याद रखिए, जो लोग नेक लोगों की संगत में रहते हैं, अल्लाह उन्हें भी नेकी की तौफ़ीक़ देता है। और जो अल्लाह से इल्म माँगता है, अल्लाह उसे समझ अता करता है और सीधी राह दिखाता है। यह दुआ हमारे लिए नूर है, रहनुमाई है और कामयाबी की चाबी है।



📜 आयत 81-85 — सूरा अश-शुआरा

81وَالَّذِي يُمِيتُنِي ثُمَّ يُحْيِينِ
और वह वही हेै जो मुझे मार डालेगा और उसके बाद (फिर) मुझे ज़िन्दा करेगा
82وَالَّذِي أَطْمَعُ أَن يَغْفِرَ لِي خَطِيئَتِي يَوْمَ الدِّينِ
और वह वही है जिससे मै उम्मीद रखता हूँ कि क़यामत के दिन मेरी ख़ताओं को बख्श देगा
83رَبِّ هَبْ لِي حُكْمًا وَأَلْحِقْنِي بِالصَّالِحِينَ
परवरदिगार मुझे इल्म व फहम अता फरमा और मुझे नेकों के साथ शामिल कर
84وَاجْعَل لِّي لِسَانَ صِدْقٍ فِي الْآخِرِينَ
और आइन्दा आने वाली नस्लों में मेरा ज़िक्रे ख़ैर क़ायम रख
85وَاجْعَلْنِي مِن وَرَثَةِ جَنَّةِ النَّعِيمِ
और मुझे भी नेअमत के बाग़ (बेहश्त) के वारिसों में से बना
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
83आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 83

सूरा अश-शुआरा आयत 83 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : परवरदिगार मुझे इल्म व फहम अता फरमा और मुझे नेकों…

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Thursday, October 1, 2026

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