अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَسْجُدُونَ لِلشَّمْسِ: सूर्य को सजदा करते हैं (अर्थात सूर्य की पूजा करते हैं)
- مِن دُونِ اللَّهِ: अल्लाह को छोड़कर
- زَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ أَعْمَالَهُمْ: शैतान ने उनके कर्मों को उनके लिए सुंदर बना दिया
- فَصَدَّهُمْ: तो उन्हें रोक दिया
- عَنِ السَّبِيلِ: सीधे मार्ग से
- لَا يَهْتَدُونَ: वे मार्गदर्शन प्राप्त नहीं करते
विस्तृत तफ़सीर:
हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम की पक्षी सेना में हुदहुद (कठफोड़वा) नामक पक्षी ने सबा (यमन) की रानी बिल्क़ीस के बारे में यह खबर दी। उसने कहा कि मैंने उसे और उसकी क़ौम को पाया कि वे अल्लाह को छोड़कर सूर्य को सजदा करते हैं। यह उनकी अज्ञानता और पथभ्रष्टता की पराकाष्ठा थी कि वे सूर्य जैसी मख़लूक़ (सृष्टि) की पूजा करते थे, जबकि सूर्य स्वयं अल्लाह की बनाई हुई एक चीज़ है, जो उसके आदेश के अधीन है।
शैतान ने उनके इन बुरे कर्मों को उनकी नज़रों में सुंदर बना दिया था, यानी उन्हें यह अहसास ही नहीं होता था कि वे गलत रास्ते पर हैं। शैतान ने उन्हें सत्य के मार्ग से रोक दिया, और वे अल्लाह की एकता (तौहीद) और उसकी इबादत की ओर मार्गदर्शन प्राप्त नहीं कर सके। यह शैतान की चाल का नतीजा था कि उन्होंने सत्य को देखते हुए भी उसे स्वीकार नहीं किया।
यह आयत हमें सिखाती है कि शैतान का सबसे बड़ा हथियार इंसान के बुरे कर्मों को सुंदर दिखाना है। जब इंसान अपने बुरे कामों को अच्छा समझने लगता है, तो वह सत्य से दूर होता चला जाता है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमें सत्य को सत्य और असत्य को असत्य दिखाए, और हमें शैतान के धोखे से बचाए। यह आयत हमें यह भी बताती है कि सूर्य, चंद्रमा, तारे आदि सभी अल्लाह की निशानियाँ हैं, लेकिन उनकी पूजा करना शिर्क है। सच्ची इबादत केवल अल्लाह की है, जो सब कुछ पैदा करने वाला और पालने वाला है।
📜 आयत 22-26 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 24
सूरा अन-नमल आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मैने खुद मलका को देखा और उसकी क़ौम को देखा…सूरा आयत 24/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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