अन-नमल · 24/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
وَجَدتُّهَا وَقَوْمَهَا يَسْجُدُونَ لِلشَّمْسِ مِن دُونِ اللَّهِ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ أَعْمَالَهُمْ فَصَدَّهُمْ عَنِ السَّبِيلِ فَهُمْ لَا يَهْتَدُونَ ۝٢٤
Wajattuhaa wa qawmahaa yasjudoona lishshamsi min doonil laahi wa zaiyana lahumush Shaitaanu a`maalahum fasaddahum `anis sabeeli fahum laa yahtadoon
📖 हिंदी अर्थ
मैने खुद मलका को देखा और उसकी क़ौम को देखा कि वह लोग ख़ुदा को छोड़कर आफताब को सजदा करते हैं शैतान ने उनकी करतूतों को (उनकी नज़र में) अच्छा कर दिखाया है और उनको राहे रास्त से रोक रखा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَسْجُدُونَ لِلشَّمْسِ: सूर्य को सजदा करते हैं (अर्थात सूर्य की पूजा करते हैं)
  • مِن دُونِ اللَّهِ: अल्लाह को छोड़कर
  • زَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ أَعْمَالَهُمْ: शैतान ने उनके कर्मों को उनके लिए सुंदर बना दिया
  • فَصَدَّهُمْ: तो उन्हें रोक दिया
  • عَنِ السَّبِيلِ: सीधे मार्ग से
  • لَا يَهْتَدُونَ: वे मार्गदर्शन प्राप्त नहीं करते

विस्तृत तफ़सीर:

हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम की पक्षी सेना में हुदहुद (कठफोड़वा) नामक पक्षी ने सबा (यमन) की रानी बिल्क़ीस के बारे में यह खबर दी। उसने कहा कि मैंने उसे और उसकी क़ौम को पाया कि वे अल्लाह को छोड़कर सूर्य को सजदा करते हैं। यह उनकी अज्ञानता और पथभ्रष्टता की पराकाष्ठा थी कि वे सूर्य जैसी मख़लूक़ (सृष्टि) की पूजा करते थे, जबकि सूर्य स्वयं अल्लाह की बनाई हुई एक चीज़ है, जो उसके आदेश के अधीन है।

शैतान ने उनके इन बुरे कर्मों को उनकी नज़रों में सुंदर बना दिया था, यानी उन्हें यह अहसास ही नहीं होता था कि वे गलत रास्ते पर हैं। शैतान ने उन्हें सत्य के मार्ग से रोक दिया, और वे अल्लाह की एकता (तौहीद) और उसकी इबादत की ओर मार्गदर्शन प्राप्त नहीं कर सके। यह शैतान की चाल का नतीजा था कि उन्होंने सत्य को देखते हुए भी उसे स्वीकार नहीं किया।

यह आयत हमें सिखाती है कि शैतान का सबसे बड़ा हथियार इंसान के बुरे कर्मों को सुंदर दिखाना है। जब इंसान अपने बुरे कामों को अच्छा समझने लगता है, तो वह सत्य से दूर होता चला जाता है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमें सत्य को सत्य और असत्य को असत्य दिखाए, और हमें शैतान के धोखे से बचाए। यह आयत हमें यह भी बताती है कि सूर्य, चंद्रमा, तारे आदि सभी अल्लाह की निशानियाँ हैं, लेकिन उनकी पूजा करना शिर्क है। सच्ची इबादत केवल अल्लाह की है, जो सब कुछ पैदा करने वाला और पालने वाला है।



📜 आयत 22-26 — सूरा अन-नमल

22فَمَكَثَ غَيْرَ بَعِيدٍ فَقَالَ أَحَطتُ بِمَا لَمْ تُحِطْ بِهِ وَجِئْتُكَ مِن سَبَإٍ بِنَبَإٍ يَقِينٍ
ग़रज़ सुलेमान ने थोड़ी ही देर (तवक्कुफ़ किया था कि (हुदहुद) आ गया) तो उसने अर्ज़ की मुझे यह बात मालूम हुई है जो अब तक हुज़ूर को भी मालूम नहीं है और आप के पास शहरे सबा से एक तहक़ीकी ख़बर लेकर आया हूँ
23إِنِّي وَجَدتُّ امْرَأَةً تَمْلِكُهُمْ وَأُوتِيَتْ مِن كُلِّ شَيْءٍ وَلَهَا عَرْشٌ عَظِيمٌ
मैने एक औरत को देखा जो वहाँ के लोगों पर सलतनत करती है और उसे (दुनिया की) हर चीज़ अता की गयी है और उसका एक बड़ा तख्त है
24وَجَدتُّهَا وَقَوْمَهَا يَسْجُدُونَ لِلشَّمْسِ مِن دُونِ اللَّهِ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ أَعْمَالَهُمْ فَصَدَّهُمْ عَنِ السَّبِيلِ فَهُمْ لَا يَهْتَدُونَ
मैने खुद मलका को देखा और उसकी क़ौम को देखा कि वह लोग ख़ुदा को छोड़कर आफताब को सजदा करते हैं शैतान ने उनकी करतूतों को (उनकी नज़र में) अच्छा कर दिखाया है और उनको राहे रास्त से रोक रखा है
25أَلَّا يَسْجُدُوا لِلَّهِ الَّذِي يُخْرِجُ الْخَبْءَ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَيَعْلَمُ مَا تُخْفُونَ وَمَا تُعْلِنُونَ
तो उन्हें (इतनी सी बात भी नहीं सूझती) कि वह लोग ख़ुदा ही का सजदा क्यों नहीं करते जो आसमान और ज़मीन की पोशीदा बातों को ज़ाहिर कर देता है और तुम लोग जो कुछ छिपाकर या ज़ाहिर करके करते हो सब जानता है
26اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ ۩
अल्लाह वह है जिससे सिवा कोई माबूद नहीं वही (इतने) बड़े अर्श का मालिक है (सजदा)
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीअवतरण स्थान
24आयत

अनुवाद — अन-नमल 24

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Friday, October 2, 2026

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