अन-नमल · 23/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
إِنِّي وَجَدتُّ امْرَأَةً تَمْلِكُهُمْ وَأُوتِيَتْ مِن كُلِّ شَيْءٍ وَلَهَا عَرْشٌ عَظِيمٌ ۝٢٣
Innee wajattum ra atan tamlikuhum wa ootiyat min kulli shai`inw wa lahaa `arshun `azeem
📖 हिंदी अर्थ
मैने एक औरत को देखा जो वहाँ के लोगों पर सलतनत करती है और उसे (दुनिया की) हर चीज़ अता की गयी है और उसका एक बड़ा तख्त है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَمْلِكُهُمْ: उन पर शासन करती है।
  • أُوتِيَتْ مِن كُلِّ شَيْءٍ: उसे हर चीज़ (संसार के साधन) दिए गए।
  • عَرْشٌ عَظِيمٌ: विशाल सिंहासन (शाही तख्त)।

तफ़सीर:

हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) के पास हुदहुद (पक्षी) ने सबा (सबा) की एक महिला के बारे में खबर लाई, जो उस क़ौम की मलिका (रानी) थी। उसका नाम बिल्क़ीस था। हुदहुद ने बताया कि यह महिला अपनी क़ौम पर शासन करती है और उसे संसार के हर उस साधन से नवाज़ा गया है जो एक बादशाह के लिए ज़रूरी होता है — जैसे सत्ता, धन-दौलत, सेना, और इल्म। उसके पास एक बहुत बड़ा और शानदार सिंहासन (तख्त) भी है, जिस पर बैठकर वह अपनी प्रजा के मामलों का प्रबंधन करती है।

यह खबर हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) के लिए एक अहम संकेत थी, क्योंकि वे एक नबी और बादशाह थे, और उनका फ़रज़ था कि वे लोगों को अल्लाह की इबादत की तरफ बुलाएँ। यहाँ अल्लाह तआला हमें यह सिखाता है कि दुनिया की सत्ता, ताक़त और ऐश्वर्य — चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो — अल्लाह की क़ुदरत के आगे कुछ भी नहीं है। एक औरत जो सिंहासन पर बैठी है और उसे हर चीज़ दी गई है, वह भी अल्लाह की रहमत और हिदायत की मोहताज है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि दुनिया की बड़ी से बड़ी ताक़त और सल्तनत भी अल्लाह की इबादत और उसके दीन की पैरवी के बग़ैर अधूरी है। हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) ने इस खबर को सुनकर जो रवैया अपनाया, वह हमारे लिए नमूना है — कि जब हमें किसी की बड़ाई और ताक़त का पता चले, तो हमें उसे अल्लाह की तरफ बुलाना चाहिए, न कि उससे डरना या उसकी तारीफ़ में मशगूल हो जाना। यह दावत-ए-दीन का एक शानदार उदाहरण है, जो बताता है कि इस्लाम हर इंसान को — चाहे वह बादशाह हो या रंक — हक़ की राह दिखाने की कोशिश करता है।

अल्लाह तआला हमें दुनिया की चमक-दमक से धोखा खाने से बचाए और हमें हमेशा अपनी इबादत और अपने दीन पर साबित क़दम रखने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 21-25 — अन-नमल

21لَأُعَذِّبَنَّهُ عَذَابًا شَدِيدًا أَوْ لَأَذْبَحَنَّهُ أَوْ لَيَأْتِيَنِّي بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
(अगर ऐसा है तो) मै उसे सख्त से सख्त सज़ा दूँगा या (नहीं तो ) उसे ज़बाह ही कर डालूँगा या वह (अपनी बेगुनाही की) कोई साफ दलील मेरे पास पेश करे
22فَمَكَثَ غَيْرَ بَعِيدٍ فَقَالَ أَحَطتُ بِمَا لَمْ تُحِطْ بِهِ وَجِئْتُكَ مِن سَبَإٍ بِنَبَإٍ يَقِينٍ
ग़रज़ सुलेमान ने थोड़ी ही देर (तवक्कुफ़ किया था कि (हुदहुद) आ गया) तो उसने अर्ज़ की मुझे यह बात मालूम हुई है जो अब तक हुज़ूर को भी मालूम नहीं है और आप के पास शहरे सबा से एक तहक़ीकी ख़बर लेकर आया हूँ
23إِنِّي وَجَدتُّ امْرَأَةً تَمْلِكُهُمْ وَأُوتِيَتْ مِن كُلِّ شَيْءٍ وَلَهَا عَرْشٌ عَظِيمٌ
मैने एक औरत को देखा जो वहाँ के लोगों पर सलतनत करती है और उसे (दुनिया की) हर चीज़ अता की गयी है और उसका एक बड़ा तख्त है
24وَجَدتُّهَا وَقَوْمَهَا يَسْجُدُونَ لِلشَّمْسِ مِن دُونِ اللَّهِ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ أَعْمَالَهُمْ فَصَدَّهُمْ عَنِ السَّبِيلِ فَهُمْ لَا يَهْتَدُونَ
मैने खुद मलका को देखा और उसकी क़ौम को देखा कि वह लोग ख़ुदा को छोड़कर आफताब को सजदा करते हैं शैतान ने उनकी करतूतों को (उनकी नज़र में) अच्छा कर दिखाया है और उनको राहे रास्त से रोक रखा है
25أَلَّا يَسْجُدُوا لِلَّهِ الَّذِي يُخْرِجُ الْخَبْءَ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَيَعْلَمُ مَا تُخْفُونَ وَمَا تُعْلِنُونَ
तो उन्हें (इतनी सी बात भी नहीं सूझती) कि वह लोग ख़ुदा ही का सजदा क्यों नहीं करते जो आसमान और ज़मीन की पोशीदा बातों को ज़ाहिर कर देता है और तुम लोग जो कुछ छिपाकर या ज़ाहिर करके करते हो सब जानता है
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अनुवाद — अन-नमल 23

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Tuesday, August 18, 2026

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