अन-नमल · 25/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
أَلَّا يَسْجُدُوا لِلَّهِ الَّذِي يُخْرِجُ الْخَبْءَ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَيَعْلَمُ مَا تُخْفُونَ وَمَا تُعْلِنُونَ ۝٢٥
Allaa yasjudoo lillaahil lazee yukhrijul khab`a fis samaawaati wal ardi wa ya`lamu maa tukhfoona wa maa tu`linoon
📖 हिंदी अर्थ
तो उन्हें (इतनी सी बात भी नहीं सूझती) कि वह लोग ख़ुदा ही का सजदा क्यों नहीं करते जो आसमान और ज़मीन की पोशीदा बातों को ज़ाहिर कर देता है और तुम लोग जो कुछ छिपाकर या ज़ाहिर करके करते हो सब जानता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْخَبْءَ – छिपा हुआ, गुप्त रखा गया।
  • تُخْفُونَ – जो तुम छिपाते हो।
  • تُعْلِنُونَ – जो तुम प्रकट करते हो।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि शैतान ने उन लोगों के कर्मों को उनके लिए सुंदर बना दिया था, ताकि वे अल्लाह के आगे सजदा न करें। शैतान का यही सबसे बड़ा मक़सद है — इंसान को अल्लाह की इबादत और उसके आगे झुकने से रोकना। अल्लाह वही है जो आसमानों और ज़मीन में छिपी हुई चीज़ों को निकालता है — आसमान से बारिश उतारता है और ज़मीन से पौधे उगाता है। यानी वही रिज़्क़ देने वाला, पैदा करने वाला और जीवन देने वाला है। वह उन सब चीज़ों को जानता है जो तुम छिपाते हो और जो तुम प्रकट करते हो — उसके ज्ञान से कुछ भी छिपा नहीं है, न छोटा और न बड़ा।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ही सच्चा माबूद है, उसी की इबादत करनी चाहिए और उसी के आगे सजदा करना चाहिए। शैतान इंसान को गुमराह करने की कोशिश करता है, लेकिन जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं और उसकी इबादत करते हैं, वे शैतान के धोखे में नहीं आते। अल्लाह की यह सिफ़त कि वह हर छिपी और खुली चीज़ को जानता है, हमें यह याद दिलाती है कि हमारे सारे अमल उसके सामने हैं — चाहे हम उन्हें छिपाएँ या प्रकट करें। इसलिए हमें हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए और अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखनी चाहिए। अल्लाह ही वह है जो बारिश भेजता है, ज़मीन को हरा-भरा करता है, और हर मख़लूक़ को रिज़्क़ देता है — क्या ऐसा अल्लाह सजदे का हक़दार नहीं? बेशक वही सजदे का हक़दार है, और उसके आगे झुकना ही सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 23-27 — अन-नमल

23إِنِّي وَجَدتُّ امْرَأَةً تَمْلِكُهُمْ وَأُوتِيَتْ مِن كُلِّ شَيْءٍ وَلَهَا عَرْشٌ عَظِيمٌ
मैने एक औरत को देखा जो वहाँ के लोगों पर सलतनत करती है और उसे (दुनिया की) हर चीज़ अता की गयी है और उसका एक बड़ा तख्त है
24وَجَدتُّهَا وَقَوْمَهَا يَسْجُدُونَ لِلشَّمْسِ مِن دُونِ اللَّهِ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ أَعْمَالَهُمْ فَصَدَّهُمْ عَنِ السَّبِيلِ فَهُمْ لَا يَهْتَدُونَ
मैने खुद मलका को देखा और उसकी क़ौम को देखा कि वह लोग ख़ुदा को छोड़कर आफताब को सजदा करते हैं शैतान ने उनकी करतूतों को (उनकी नज़र में) अच्छा कर दिखाया है और उनको राहे रास्त से रोक रखा है
25أَلَّا يَسْجُدُوا لِلَّهِ الَّذِي يُخْرِجُ الْخَبْءَ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَيَعْلَمُ مَا تُخْفُونَ وَمَا تُعْلِنُونَ
तो उन्हें (इतनी सी बात भी नहीं सूझती) कि वह लोग ख़ुदा ही का सजदा क्यों नहीं करते जो आसमान और ज़मीन की पोशीदा बातों को ज़ाहिर कर देता है और तुम लोग जो कुछ छिपाकर या ज़ाहिर करके करते हो सब जानता है
26اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ ۩
अल्लाह वह है जिससे सिवा कोई माबूद नहीं वही (इतने) बड़े अर्श का मालिक है (सजदा)
27۞ قَالَ سَنَنظُرُ أَصَدَقْتَ أَمْ كُنتَ مِنَ الْكَاذِبِينَ
(ग़रज़) सुलेमान ने कहा हम अभी देखते हैं कि तूने सच सच कहा या तू झूठा है
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अनुवाद — अन-नमल 25

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Tuesday, August 18, 2026

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