अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تَسْتَعْجِلُونَ بِالسَّيِّئَةِ – तुम बुराई (अज़ाब) की जल्दी कर रहे हो।
- الْحَسَنَةِ – भलाई (तौबा और ईमान)।
- لَوْلَا – क्यों नहीं? (अर्थात् तुम्हें चाहिए था कि…)
- تَسْتَغْفِرُونَ اللَّهَ – अल्लाह से क्षमा माँगते।
- لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ – ताकि तुम पर रहम किया जाए।
तफ़सीर:
हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम के काफ़िर लोगों से कहा: "ऐ मेरी क़ौम! तुम अज़ाब की जल्दी क्यों मचा रहे हो? तुम उस बुराई (यानी अल्लाह के अज़ाब) को भलाई (यानी ईमान और तौबा) से पहले क्यों बुला रहे हो? तुम्हें तो चाहिए था कि अल्लाह से क्षमा माँगते और अपने कुफ़्र से तौबा करते, ताकि अल्लाह तुम पर रहम फ़रमाता और तुम्हें अज़ाब से बचा लेता।"
दरअसल, उन लोगों की नासमझी यह थी कि वे कहते थे कि अगर अज़ाब आएगा तो हम तौबा कर लेंगे। वे यह समझते थे कि अज़ाब आने के बाद भी तौबा क़बूल हो जाएगी। हज़रत सालेह ने उन्हें समझाया कि यह सोच बिल्कुल ग़लत है। जब अल्लाह का अज़ाब आ जाता है, तो फिर तौबा का दरवाज़ा बंद हो जाता है। इसलिए अज़ाब आने से पहले ही अल्लाह से माफ़ी माँग लो, क्योंकि अल्लाह की रहमत उन्हीं के लिए है जो उसकी ओर लौटते हैं और उससे क्षमा की दरख़्वास्त करते हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को हमेशा अल्लाह की रहमत की तरफ़ भागना चाहिए, न कि उसके अज़ाब की तरफ़। अल्लाह बहुत मेहरबान और क्षमाशील है। वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी ओर रुजू करें, तौबा करें और उसकी रहमत के हक़दार बनें। जो लोग अल्लाह की रहमत से निराश होते हैं, वही अज़ाब की जल्दी करते हैं। हमें चाहिए कि हम हर पल अल्लाह से माफ़ी माँगते रहें, क्योंकि हमें नहीं पता कि हमारी मौत कब आ जाए। अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी ओर लौटते हैं, और अल्लाह तौबा करने वालों से बहुत प्यार करता है।
📜 आयत 44-48 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 46
सूरा अन-नमल आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : सालेह ने कहा ऐ मेरी क़ौम (आख़िर) तुम लोग भलाई…सूरा आयत 46/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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