अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْغَيْبَ: छिपी हुई बातें, वे चीज़ें जो इंसानों की नज़रों से छिपी हों।
- أَيَّانَ: कब, किस समय।
- يُبْعَثُونَ: उठाए जाएँगे (क़ब्रों से जीवित करके)।
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप इन लोगों से कह दीजिए कि आसमानों और ज़मीन में जितनी भी मख़लूक़ात हैं—फ़रिश्ते हों, इंसान हों या जिन्न—उनमें से कोई भी ग़ैब (छिपी हुई बातों) का इल्म नहीं रखता। ग़ैब का इल्म सिर्फ़ अल्लाह तआला को ही है। वही अकेला है जो हर छिपी हुई चीज़ को जानता है, चाहे वह आसमानों में हो या ज़मीन में। यहाँ तक कि क़यामत का समय भी ग़ैब में से है, जिसे सिर्फ़ अल्लाह ही जानता है।
जब मुशरिकीन ने आपसे पूछा कि क़यामत कब आएगी, तो अल्लाह ने यह आयत उतारी। इसमें अल्लाह ने साफ़ कर दिया कि क़यामत का वक़्त कोई नहीं जानता—न कोई फ़रिश्ता, न कोई नबी, न कोई इंसान। सिर्फ़ अल्लाह ही इसका इल्म रखता है। यह बात सिर्फ़ क़यामत तक सीमित नहीं, बल्कि हर ग़ैबी चीज़ पर लागू होती है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि ये लोग यह भी नहीं जानते कि वे कब उठाए जाएँगे। उन्हें इस बात का कोई शऊर (एहसास) नहीं है कि क़यामत किस घड़ी आएगी। वे इस दुनिया में ग़ाफ़िल हैं, लेकिन जब वह दिन आएगा, तो उन्हें अपनी ग़फ़लत का अहसास होगा। उस दिन उनका इल्म मुकम्मल हो जाएगा और वे आख़िरत के मंज़र देखकर यक़ीन कर लेंगे, जबकि दुनिया में वे इस पर शक करते थे और उनकी बसीरत (दिल की आँखें) अंधी हो गई थीं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी ज़िंदगी में उन चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए जो हमारे बस में हैं—अच्छे काम, नेकी, तक़वा और अल्लाह की इबादत। क़यामत का समय जानने की कोशिश करना बेकार है, क्योंकि यह इल्म सिर्फ़ अल्लाह के पास है। हमारा काम है कि हम उस दिन के लिए तैयारी करें, क्योंकि वह दिन ज़रूर आने वाला है। जो लोग आज उस दिन को भूलकर ग़ाफ़िल रहते हैं, वे उस वक़्त पछताएँगे जब पछतावा किसी काम न आएगा। अल्लाह ने हमें इस दुनिया में मौक़ा दिया है कि हम अपने आख़िरत के सफ़र के लिए ज़ाद-ए-राह (सफ़र का सामान) इकट्ठा कर लें। यही असली कामयाबी है।
📜 आयत 63-67 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 65
सूरा अन-नमल आयत 65 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल इन से) कह दो कि जितने लोग आसमान…सूरा आयत 65/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 63–67. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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