अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بِآيَاتِنَا بَيِّنَاتٍ: हमारी स्पष्ट निशानियाँ और खुले प्रमाण।
- سِحْرٌ مُّفْتَرًى: झूठा जादू जिसे गढ़ लिया गया हो।
- فِي آبَائِنَا الْأَوَّلِينَ: हमारे पूर्वजों के ज़माने में।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब मूसा (अलैहिस्सलाम) फ़िरऔन और उसके दरबारियों के पास हमारी स्पष्ट निशानियाँ और खुले प्रमाण लेकर आए, जो उनके सच्चे नबी होने की गवाही दे रहे थे, तो उन्होंने उन्हें झुठलाने और सच्चाई को दबाने के लिए कहा: "यह तो बस एक झूठा जादू है जिसे मूसा ने खुद गढ़ लिया है।" उन्होंने यह भी कहा: "हमने अपने पिछले बुज़ुर्गों और पूर्वजों के ज़माने में ऐसी कोई बात नहीं सुनी जिसकी तरफ तू हमें बुला रहा है।"
यानी उन्होंने सच्चाई को देखते हुए भी उसे नकार दिया, और अपनी जिद और अहंकार की वजह से हक़ को कबूल करने से इनकार कर दिया। उनका यह कहना कि "हमने अपने बाप-दादाओं में यह नहीं सुना", उनकी अज्ञानता और अंधी परंपरा की पैरवी को दर्शाता है, क्योंकि सच्चाई को पूर्वजों की बातों से नहीं, बल्कि अक्ल और दलील से परखा जाता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई को कबूल करने के लिए खुला दिल और साफ़ दिमाग़ चाहिए। जो लोग अपनी रिवायात और बुज़ुर्गों की बातों को ही आख़िरी हक़ीक़त मान लेते हैं, वे कभी हिदायत नहीं पा सकते। अल्लाह के नबियों की निशानियाँ इंसान को सीधे रास्ते की तरफ बुलाती हैं, लेकिन जो लोग इनकार और घमंड पर अड़े रहते हैं, वे उसी अज़ाब के हक़दार बनते हैं जो फ़िरऔन और उसकी क़ौम पर आया।
आज भी हमें चाहिए कि कुरआन की आयात पर ग़ौर करें और उन्हें अपनी ज़िंदगी में उतारें। यह किताब कोई झूठा जादू नहीं, बल्कि रहमत और हिदायत का ज़रिया है। जो इसे अपनाएगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा। अल्लाह हमें सच्चाई को कबूल करने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 34-38 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 36
सूरा अल-क़सस आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ जब मूसा हमारे वाजेए व रौशन मौजिज़े लेकर उनके…सूरा आयत 36/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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