अल-अंकबूत · 16/69
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंकबूत
وَإِبْرَاهِيمَ إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ اعْبُدُوا اللَّهَ وَاتَّقُوهُ ۖ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ ۝١٦
Wa Ibraheema iz qaala liqawmihi` budul laaha wattaqoohu zaalikum khayrul lakum in kuntum ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
और इबराहीम को (याद करो) जब उन्होंने कहा कि (भाईयों) ख़ुदा की इबादत करो और उससे डरो अगर तुम समझते बूझते हो तो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَإِبْرَاهِيمَ: और (याद करो) इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को।
  • إِذْ قَالَ: जब उन्होंने कहा।
  • اعْبُدُوا اللَّهَ: अल्लाह की इबादत करो (उसे अकेला पूजो)।
  • وَاتَّقُوهُ: और उससे डरो (उसके अज़ाब से बचो)।
  • ذَلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ: यह (जिसका आदेश दिया गया है) तुम्हारे लिए बेहतर है।
  • إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ: अगर तुम जानते हो (भलाई और बुराई को)।

विस्तृत तफ़सीर:

ऐ नबी! आप उस समय को याद करें जब इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को संबोधित करते हुए कहा: "तुम सब अल्लाह की इबादत करो और उसी की बंदगी को अपना लो, और उसके अज़ाब से डरो। उसके हुक्मों का पालन करो और उसकी मनाही से बचो।"

यह वही पैग़ाम है जो हर नबी लेकर आया—तौहीद का पैग़ाम। इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को साफ़ शब्दों में समझाया कि यही रास्ता तुम्हारे लिए सबसे अच्छा है। अगर तुम थोड़ा सा भी समझ रखते हो, तो यह बात तुम पर साफ़ हो जाएगी कि अल्लाह की इबादत और उसका ख़ौफ़ ही तुम्हारी दुनिया और आख़िरत की भलाई का ज़रिया है।

इस आयत में इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की दावत का अंदाज़ बड़ा ही प्यारा और समझदारी भरा है। उन्होंने लोगों को डराया नहीं, बल्कि उन्हें समझाया कि यह तुम्हारे अपने भले के लिए है। वे कह रहे हैं: "अगर तुम जानते हो कि तुम्हारे लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा, तो यक़ीनन तुम अल्लाह की इबादत को ही अपनाओगे।"

यह आयत हमें सिखाती है कि दावत-ए-दीन में नर्मी और हिकमत होनी चाहिए। हमें लोगों को यह बताना चाहिए कि अल्लाह की राह पर चलना कोई बोझ नहीं, बल्कि यही तुम्हारी कामयाबी का रास्ता है। जो इंसान अल्लाह की इबादत करता है और उससे डरता है, वह दुनिया में भी सुकून पाता है और आख़िरत में भी कामयाब होता है।

इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की यह दावत आज भी हमारे लिए एक रोशनी है। वे बता रहे हैं कि अल्लाह की इबादत ही वह चीज़ है जो इंसान को सही रास्ते पर लाती है, और तक़वा (अल्लाह का डर) ही वह चीज़ है जो इंसान को गुनाहों से बचाती है। यही दो चीज़ें इंसान को दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देती हैं।

तो आओ, हम भी इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के इस पैग़ाम को अपने दिल में उतारें, अल्लाह की इबादत को अपनी ज़िंदगी का केंद्र बनाएं, और उसके अज़ाब से डरते हुए उसकी राह पर चलें। यही हमारी सबसे बड़ी भलाई है, बशर्ते हम समझें और अमल करें।



📜 आयत 14-18 — सूरा अल-अंकबूत

14وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِ فَلَبِثَ فِيهِمْ أَلْفَ سَنَةٍ إِلَّا خَمْسِينَ عَامًا فَأَخَذَهُمُ الطُّوفَانُ وَهُمْ ظَالِمُونَ
और हमने नूह को उनकी क़ौम के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा तो वह उनमें पचास कम हज़ार बरस रहे (और हिदायत किया किए और जब न माना) तो आख़िर तूफान ने उन्हें ले डाला और वह उस वक्त भी सरकश ही थे
15فَأَنجَيْنَاهُ وَأَصْحَابَ السَّفِينَةِ وَجَعَلْنَاهَا آيَةً لِّلْعَالَمِينَ
फिर हमने नूह और कश्ती में रहने वालों को बचा लिया और हमने इस वाक़िये को सारी ख़ुदाई के वास्ते (अपनी क़ुदरत की) निशानी क़रार दी
16وَإِبْرَاهِيمَ إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ اعْبُدُوا اللَّهَ وَاتَّقُوهُ ۖ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
और इबराहीम को (याद करो) जब उन्होंने कहा कि (भाईयों) ख़ुदा की इबादत करो और उससे डरो अगर तुम समझते बूझते हो तो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है
17إِنَّمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ أَوْثَانًا وَتَخْلُقُونَ إِفْكًا ۚ إِنَّ الَّذِينَ تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ لَا يَمْلِكُونَ لَكُمْ رِزْقًا فَابْتَغُوا عِندَ اللَّهِ الرِّزْقَ وَاعْبُدُوهُ وَاشْكُرُوا لَهُ ۖ إِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
(मगर) तुम लोग तो ख़ुदा को छोड़कर सिर्फ बुतों की परसतिश करते हैं और झूठी बातें (अपने दिल से) गढ़ते हो इसमें तो शक ही नहीं कि ख़ुदा को छोड़कर जिन लोगों की तुम परसतिश करते हो वह तुम्हारी रोज़ी का एख्तेयार नही रखते-बस ख़ुदा ही से रोज़ी भी माँगों और उसकी इबादत भी करो उसका शुक्र करो (क्योंकि) तुम लोग (एक दिन) उसी की तरफ लौटाए जाओगे
18وَإِن تُكَذِّبُوا فَقَدْ كَذَّبَ أُمَمٌ مِّن قَبْلِكُمْ ۖ وَمَا عَلَى الرَّسُولِ إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
और (ऐ अहले मक्का) अगर तुमने (मेरे रसूल को) झुठलाया तो (कुछ परवाह नहीं) तुमसे पहले भी तो बहुतेरी उम्मते (अपने पैग़म्बरों को) झुठला चुकी हैं और रसूल के ज़िम्मे तो सिर्फ (एहक़ाम का) पहुँचा देना है
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीअवतरण स्थान
16आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 16

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Thursday, October 1, 2026

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