Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَإِبْرَاهِيمَ: और (याद करो) इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को।
- إِذْ قَالَ: जब उन्होंने कहा।
- اعْبُدُوا اللَّهَ: अल्लाह की इबादत करो (उसे अकेला पूजो)।
- وَاتَّقُوهُ: और उससे डरो (उसके अज़ाब से बचो)।
- ذَلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ: यह (जिसका आदेश दिया गया है) तुम्हारे लिए बेहतर है।
- إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ: अगर तुम जानते हो (भलाई और बुराई को)।
विस्तृत तफ़सीर:
ऐ नबी! आप उस समय को याद करें जब इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को संबोधित करते हुए कहा: "तुम सब अल्लाह की इबादत करो और उसी की बंदगी को अपना लो, और उसके अज़ाब से डरो। उसके हुक्मों का पालन करो और उसकी मनाही से बचो।"
यह वही पैग़ाम है जो हर नबी लेकर आया—तौहीद का पैग़ाम। इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को साफ़ शब्दों में समझाया कि यही रास्ता तुम्हारे लिए सबसे अच्छा है। अगर तुम थोड़ा सा भी समझ रखते हो, तो यह बात तुम पर साफ़ हो जाएगी कि अल्लाह की इबादत और उसका ख़ौफ़ ही तुम्हारी दुनिया और आख़िरत की भलाई का ज़रिया है।
इस आयत में इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की दावत का अंदाज़ बड़ा ही प्यारा और समझदारी भरा है। उन्होंने लोगों को डराया नहीं, बल्कि उन्हें समझाया कि यह तुम्हारे अपने भले के लिए है। वे कह रहे हैं: "अगर तुम जानते हो कि तुम्हारे लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा, तो यक़ीनन तुम अल्लाह की इबादत को ही अपनाओगे।"
यह आयत हमें सिखाती है कि दावत-ए-दीन में नर्मी और हिकमत होनी चाहिए। हमें लोगों को यह बताना चाहिए कि अल्लाह की राह पर चलना कोई बोझ नहीं, बल्कि यही तुम्हारी कामयाबी का रास्ता है। जो इंसान अल्लाह की इबादत करता है और उससे डरता है, वह दुनिया में भी सुकून पाता है और आख़िरत में भी कामयाब होता है।
इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की यह दावत आज भी हमारे लिए एक रोशनी है। वे बता रहे हैं कि अल्लाह की इबादत ही वह चीज़ है जो इंसान को सही रास्ते पर लाती है, और तक़वा (अल्लाह का डर) ही वह चीज़ है जो इंसान को गुनाहों से बचाती है। यही दो चीज़ें इंसान को दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देती हैं।
तो आओ, हम भी इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के इस पैग़ाम को अपने दिल में उतारें, अल्लाह की इबादत को अपनी ज़िंदगी का केंद्र बनाएं, और उसके अज़ाब से डरते हुए उसकी राह पर चलें। यही हमारी सबसे बड़ी भलाई है, बशर्ते हम समझें और अमल करें।
📜 आयत 14-18 — सूरा अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 16
सूरा अल-अंकबूत आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इबराहीम को (याद करो) जब उन्होंने कहा कि (भाईयों)…सूरा आयत 16/69 — सूरा अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंकबूत सुनें, सूरा अल-अंकबूत अनुवाद, सूरा अल-अंकबूत mp3, सूरा अल-अंकबूत pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंकबूत
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


