अल-अंकबूत · 15/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
فَأَنجَيْنَاهُ وَأَصْحَابَ السَّفِينَةِ وَجَعَلْنَاهَا آيَةً لِّلْعَالَمِينَ ۝١٥
Fa anjainaahu wa as haabas safeenati wa ja`alnaahaaa Aayatal lil`aalameen
📖 हिंदी अर्थ
फिर हमने नूह और कश्ती में रहने वालों को बचा लिया और हमने इस वाक़िये को सारी ख़ुदाई के वास्ते (अपनी क़ुदरत की) निशानी क़रार दी

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَأَنجَيْنَاهُ: हमने उसे (नूह अलैहिस्सलाम को) बचा लिया।
  • أَصْحَابَ السَّفِينَةِ: कश्ती में सवार लोग (नूह के साथी)।
  • آيَةً: निशानी, सबक़, इबरत।
  • لِّلْعَالَمِينَ: सारे जहान के लोगों के लिए।

तफ़सीर:

जब नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम ने हर हद पार कर दी और हक़ का पैग़ाम क़बूल करने से इनकार कर दिया, तो अल्लाह तआला ने उन पर तूफ़ान भेजा। उस विनाशकारी तूफ़ान में अल्लाह ने अपने नबी नूह को और उन ईमानवालों को, जो उनके साथ कश्ती में सवार थे, सुरक्षित निकाल लिया। यह अल्लाह की रहमत और क़ुदरत का नमूना था कि जब सारी दुनिया पानी में डूब रही थी, उस वक़्त भी अल्लाह ने अपने नेक बंदों को महफ़ूज़ रखा।

अल्लाह ने इस कश्ती (या इस अज़ाब) को सारे जहान के लोगों के लिए एक निशानी और सबक़ बना दिया। यानी यह वाक़िया सिर्फ़ उस ज़माने के लिए नहीं था, बल्कि क़यामत तक आने वाली नस्लों के लिए एक रौशन निशानी है कि अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम तबाही है, और उसकी इताअत और ईमान ही नजात का ज़रिया है। यह कश्ती इस बात की गवाह है कि अल्लाह तआला अपने वादे में सच्चा है — वह अपने नबियों की मदद करता है और अपने दुश्मनों को हलाक करता है।

दावती पहलू:

इस आयत में हमारे लिए बड़ी प्यारी शिक्षा है — जब इंसान अल्लाह पर भरोसा करके उसकी राह पर चलता है, तो अल्लाह उसे हर मुश्किल से निकाल लेता है। जिस तरह नूह अलैहिस्सलाम ने सैकड़ों साल तक दावत दी, मगर क़ौम ने ठुकराया, फिर भी अल्लाह ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा और उनके ईमान का फल उन्हें दिया। यह हमें सिखाता है कि हम भी अपनी ज़िंदगी में सब्र और ईमान के साथ डटे रहें — अल्लाह की मदद ज़रूर आती है, चाहे हालात कितने भी बुरे क्यों न हों। यह कश्ती आज भी हर उस शख्स के लिए रहनुमा है जो अल्लाह की पनाह चाहता है — कि सच्चा सहारा सिर्फ़ अल्लाह है, और उसकी रहमत से बड़ी कोई ताक़त नहीं।



📜 आयत 13-17 — अल-अंकबूत

13وَلَيَحْمِلُنَّ أَثْقَالَهُمْ وَأَثْقَالًا مَّعَ أَثْقَالِهِمْ ۖ وَلَيُسْأَلُنَّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عَمَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
और (हाँ) ये लोग अपने (गुनाह के) बोझे तो यक़ीनी उठाएँगें ही और अपने बोझो के साथ जिन्हें गुमराह किया उनके बोझे भी उठाएँगे और जो इफ़ितेरा परदाज़िया ये लोग करते रहे हैं क़यामत के दिन उन से ज़रुर उसकी बाज़पुर्स होगी
14وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِ فَلَبِثَ فِيهِمْ أَلْفَ سَنَةٍ إِلَّا خَمْسِينَ عَامًا فَأَخَذَهُمُ الطُّوفَانُ وَهُمْ ظَالِمُونَ
और हमने नूह को उनकी क़ौम के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा तो वह उनमें पचास कम हज़ार बरस रहे (और हिदायत किया किए और जब न माना) तो आख़िर तूफान ने उन्हें ले डाला और वह उस वक्त भी सरकश ही थे
15فَأَنجَيْنَاهُ وَأَصْحَابَ السَّفِينَةِ وَجَعَلْنَاهَا آيَةً لِّلْعَالَمِينَ
फिर हमने नूह और कश्ती में रहने वालों को बचा लिया और हमने इस वाक़िये को सारी ख़ुदाई के वास्ते (अपनी क़ुदरत की) निशानी क़रार दी
16وَإِبْرَاهِيمَ إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ اعْبُدُوا اللَّهَ وَاتَّقُوهُ ۖ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
और इबराहीम को (याद करो) जब उन्होंने कहा कि (भाईयों) ख़ुदा की इबादत करो और उससे डरो अगर तुम समझते बूझते हो तो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है
17إِنَّمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ أَوْثَانًا وَتَخْلُقُونَ إِفْكًا ۚ إِنَّ الَّذِينَ تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ لَا يَمْلِكُونَ لَكُمْ رِزْقًا فَابْتَغُوا عِندَ اللَّهِ الرِّزْقَ وَاعْبُدُوهُ وَاشْكُرُوا لَهُ ۖ إِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
(मगर) तुम लोग तो ख़ुदा को छोड़कर सिर्फ बुतों की परसतिश करते हैं और झूठी बातें (अपने दिल से) गढ़ते हो इसमें तो शक ही नहीं कि ख़ुदा को छोड़कर जिन लोगों की तुम परसतिश करते हो वह तुम्हारी रोज़ी का एख्तेयार नही रखते-बस ख़ुदा ही से रोज़ी भी माँगों और उसकी इबादत भी करो उसका शुक्र करो (क्योंकि) तुम लोग (एक दिन) उसी की तरफ लौटाए जाओगे
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीRevelation
15आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 15

सूरा अल-अंकबूत आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर हमने नूह और कश्ती में रहने वालों को बचा…

सूरा आयत 15/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए