अल-अंकबूत · 33/69
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंकबूत
وَلَمَّا أَن جَاءَتْ رُسُلُنَا لُوطًا سِيءَ بِهِمْ وَضَاقَ بِهِمْ ذَرْعًا وَقَالُوا لَا تَخَفْ وَلَا تَحْزَنْ ۖ إِنَّا مُنَجُّوكَ وَأَهْلَكَ إِلَّا امْرَأَتَكَ كَانَتْ مِنَ الْغَابِرِينَ ۝٣٣
Wa lammaaa an jaaa`at Rusulunaa Lootan seee`a bihim wa daaqa bihim zar`anw wa qaaloo laa takhaf wa laa tahzan innaa munajjooka wa ahlaka illam ra ataka kaanat minal ghaabireen
📖 हिंदी अर्थ
और जब हमारे भेजे हुए फरिश्ते लूत के पास आए लूत उनके आने से ग़मग़ीन हुए और उन (की मेहमानी) से दिल तंग हुए (क्योंकि वह नौजवान खूबसूरत मर्दों की सरूत में आए थे) फरिश्तों ने कहा आप ख़ौफ न करें और कुढ़े नही हम आपको और आपके लड़के बालों को बचा लेगें मगर आपकी बीबी (क्योंकि वह पीछे रह जाने वालो से होगी)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سِيءَ بِهِمْ: उनके आने से वे बहुत दुखी और चिंतित हुए।
  • وَضَاقَ بِهِمْ ذَرْعًا: उनके कारण उनका दिल तंग हो गया, यानी वे बहुत परेशान और बेचैन हो गए।
  • الْغَابِرِينَ: पीछे रह जाने वाले, यानी हलाक होने वालों में से।

तफसीर (व्याख्या):

जब हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते (जो इंसानों के रूप में थे) हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) के पास पहुँचे, तो वे बहुत चिंतित और दुखी हुए। उन्होंने समझा कि ये कोई आम मेहमान हैं, और उन्हें अपनी क़ौम की बुरी आदतों का डर था, क्योंकि उनकी क़ौम के लोग मेहमानों के साथ बुरा व्यवहार करते थे। उनका दिल इस बात से तंग हो गया कि कहीं उनके साथ कोई बुराई न हो जाए।

तभी फ़रिश्तों ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा: "डरो मत और उदास मत हो। हम अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्ते हैं, और हमें आपकी क़ौम को हलाक करने के लिए भेजा गया है। हम आपको और आपके परिवार को बचा लेंगे, सिवाय आपकी पत्नी के, जो इस बुराई में शामिल है और हलाक होने वालों में से रहेगी।"

यह अल्लाह की रहमत और मेहरबानी का नमूना है कि वह अपने नबियों को मुश्किल घड़ी में हिम्मत देता है और उन्हें बुराई से निजात दिलाता है। यह हमारे लिए सबक़ है कि अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी रहमत से कभी निराश न हों। जब अल्लाह किसी को बचाना चाहता है, तो कोई ताक़त उसे नुकसान नहीं पहुँचा सकती। यह भी सीख है कि बुराई में साथ देने वाले, चाहे वे कितने ही करीबी क्यों न हों, अल्लाह की पकड़ से नहीं बच सकते।



📜 आयत 31-35 — सूरा अल-अंकबूत

31وَلَمَّا جَاءَتْ رُسُلُنَا إِبْرَاهِيمَ بِالْبُشْرَىٰ قَالُوا إِنَّا مُهْلِكُو أَهْلِ هَٰذِهِ الْقَرْيَةِ ۖ إِنَّ أَهْلَهَا كَانُوا ظَالِمِينَ
(उस वक्त अज़ाब की तैयारी हुई) और जब हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते इबराहीम के पास (बुढ़ापे में बेटे की) खुशखबरी लेकर आए तो (इबराहीम से) बोले हम लोग अनक़रीब इस गाँव के रहने वालों को हलाक करने वाले हैं (क्योंकि) इस बस्ती के रहने वाले यक़ीनी (बड़े) सरकश है
32قَالَ إِنَّ فِيهَا لُوطًا ۚ قَالُوا نَحْنُ أَعْلَمُ بِمَن فِيهَا ۖ لَنُنَجِّيَنَّهُ وَأَهْلَهُ إِلَّا امْرَأَتَهُ كَانَتْ مِنَ الْغَابِرِينَ
(ये सुन कर) इबराहीम ने कहा कि इस बस्ती में तो लूत भी है वह फरिश्ते बोले जो लोग इस बस्ती में हैं हम लोग उनसे खूब वाक़िफ़ हैं हम तो उनको और उनके लड़के बालों को यक़ीनी बचा लेंगे मगर उनकी बीबी को वह (अलबता) पीछे रह जाने वालों में होगीं
33وَلَمَّا أَن جَاءَتْ رُسُلُنَا لُوطًا سِيءَ بِهِمْ وَضَاقَ بِهِمْ ذَرْعًا وَقَالُوا لَا تَخَفْ وَلَا تَحْزَنْ ۖ إِنَّا مُنَجُّوكَ وَأَهْلَكَ إِلَّا امْرَأَتَكَ كَانَتْ مِنَ الْغَابِرِينَ
और जब हमारे भेजे हुए फरिश्ते लूत के पास आए लूत उनके आने से ग़मग़ीन हुए और उन (की मेहमानी) से दिल तंग हुए (क्योंकि वह नौजवान खूबसूरत मर्दों की सरूत में आए थे) फरिश्तों ने कहा आप ख़ौफ न करें और कुढ़े नही हम आपको और आपके लड़के बालों को बचा लेगें मगर आपकी बीबी (क्योंकि वह पीछे रह जाने वालो से होगी)
34إِنَّا مُنزِلُونَ عَلَىٰ أَهْلِ هَٰذِهِ الْقَرْيَةِ رِجْزًا مِّنَ السَّمَاءِ بِمَا كَانُوا يَفْسُقُونَ
हम यक़ीनन इसी बस्ती के रहने वालों पर चूँकि ये लोग बदकारियाँ करते रहे एक आसमानी अज़ाब नाज़िल करने वाले हैं
35وَلَقَد تَّرَكْنَا مِنْهَا آيَةً بَيِّنَةً لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और हमने यक़ीनी उस (उलटी हुई बस्ती) में से समझदार लोगों के वास्ते (इबरत की) एक वाज़ेए व रौशन निशानी बाक़ी रखी है
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीअवतरण स्थान
33आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 33

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Wednesday, September 30, 2026

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