अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لُوطًا: पैगंबर लूत अलैहिस्सलाम, जो उस बस्ती में रहते थे।
- الْغَابِرِينَ: बाकी रह जाने वाले, यानी अज़ाब में रह जाने वाले (हलाक होने वाले)।
तफ़सीर:
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने जब फ़रिश्तों से जाना कि वे क़ौम-ए-लूत को हलाक करने आए हैं, तो उन्हें अपने भतीजे हज़रत लूत की चिंता हुई। वे फ़रिश्तों से कहने लगे: "इस बस्ती में लूत भी मौजूद हैं!" उनका इशारा यह था कि क्या उन्हें भी हलाक किया जाएगा? उन्हें इस बात का डर था कि कहीं नेक लोग भी उस अज़ाब की चपेट में न आ जाएं।
फ़रिश्तों ने जवाब दिया: "हमें इस बस्ती के हाल से पूरी तरह वाक़िफ हैं। हमें मालूम है कि वहां कौन नेक है और कौन बदकार। आप बिल्कुल परेशान न हों — हम लूत को और उनके घर वालों को (जो ईमानदार हैं) उस अज़ाब से बचा लेंगे। हाँ, उनकी बीवी ज़रूर पीछे रह जाएगी, क्योंकि वह ज़ालिमों के साथ शामिल थी और उन्हीं के हाल पर मरने वाली है।"
यह आयत हमें कई अहम सबक़ सिखाती है:
पहला सबक़: अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को हलाक होने से बचाता है। चाहे कितनी भी बड़ी बस्ती पर अज़ाब आए, अल्लाह के वली महफूज़ रहते हैं। यह अल्लाह की रहमत है कि वह अपने बंदों को आज़माइश में भी अकेला नहीं छोड़ता।
दूसरा सबक़: अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है। इंसान को किसी की ज़ात के बारे में जो अंदेशा होता है, अल्लाह को उससे कहीं ज़्यादा बेहतर इल्म है। हमें अपने अंदेशों को अल्लाह के इल्म पर छोड़ देना चाहिए।
तीसरा सबक़: रिश्तेदारी और ख़ानदानी ताल्लुक़ अल्लाह के हुक्म के आगे कोई अहमियत नहीं रखते। हज़रत लूत की बीवी ने ईमान नहीं अपनाया, इसलिए वह अपने शौहर के नेक होने के बावजूद अज़ाब से नहीं बच सकी। यह हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है कि हम सिर्फ़ किसी नेक इंसान के रिश्तेदार होने पर भरोसा न करें, बल्कि अपना ईमान और अमल खुद अच्छा बनाएं।
चौथा सबक़: यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह के फ़ैसले में कोई बदलाव नहीं आता। जब अल्लाह किसी ज़ालिम क़ौम पर अज़ाब का फ़ैसला कर लेता है, तो उसे टाला नहीं जा सकता। लेकिन साथ ही अल्लाह की रहमत यह है कि वह नेक लोगों को उस अज़ाब से निकाल लेता है।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को कभी ज़ुल्म का निशाना नहीं बनने देता। अगर हम सच्चे दिल से ईमान लाएं और नेक अमल करें, तो अल्लाह हमें हर मुसीबत से निकालने का रास्ता ज़रूर निकालेगा। आइए, हम अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएं और उसकी रहमत के हक़दार बनें।
📜 आयत 30-34 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 32
सूरा अल-अंकबूत आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये सुन कर) इबराहीम ने कहा कि इस बस्ती में…सूरा आयत 32/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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