अल-अंकबूत · 51/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
أَوَلَمْ يَكْفِهِمْ أَنَّا أَنزَلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ يُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَرَحْمَةً وَذِكْرَىٰ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ ۝٥١
Awa lam yakfihim annaaa anzalnaa `alaikal kitaaba yutlaa `alaikhim; inna fee zaalika larahmatanw wa zikraa liqawminy yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या उनके लिए ये काफी नहीं कि हमने तुम पर क़ुरान नाज़िल किया जो उनके सामने पढ़ा जाता है इसमें शक नहीं कि ईमानदार लोगों के लिए इसमें (ख़ुदा की बड़ी) मेहरबानी और (अच्छी ख़ासी) नसीहत है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَوَلَمْ يَكْفِهِمْ: क्या उनके लिए काफी नहीं है?
  • الْكِتَابَ: कुरआन
  • يُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ: जो उन्हें पढ़कर सुनाया जाता है
  • رَحْمَةً: दया और करुणा का साधन
  • ذِكْرَىٰ: नसीहत और याद दिलाने वाली चीज़

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! क्या इन मुशरिकों के लिए यह बात काफी नहीं है कि हमने आप पर कुरआन उतारा है, जो उनके सामने पढ़ा जाता है? यह कुरआन खुद एक महान चमत्कार है, जो हर युग में जीवित है। पिछले नबियों के चमत्कार तो एक समय के बाद समाप्त हो गए, लेकिन यह किताब क़यामत तक कायम रहेगी। यह उन लोगों के लिए सबसे बड़ा सबूत है जो सच्चाई की तलाश में हैं।

यह कुरआन उन लोगों के लिए रहमत है जो ईमान लाते हैं, क्योंकि यह उन्हें ज़िंदगी का सही रास्ता दिखाता है और उन्हें दुनिया और आख़िरत की भलाइयों तक पहुंचाता है। साथ ही यह उनके लिए नसीहत है, जो उन्हें अल्लाह की याद दिलाती है और उन्हें बुराई से बचने की ताकत देती है।

इन मुशरिकों ने नबी से अजीब-अजीब चमत्कार मांगे, लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि यह कुरआन ही सबसे बड़ा चमत्कार है। यह किताब जो पढ़ी जाती है, जिसकी भाषा में कोई कमी नहीं, जिसके विज्ञान में कोई विरोधाभास नहीं, जिसकी शिक्षाएं हर युग के लिए उपयुक्त हैं — क्या यह उनके लिए काफी नहीं?

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि कुरआन को पढ़ना, समझना और उस पर अमल करना ही सच्ची कामयाबी है। यह किताब हमारे लिए रहमत है, अगर हम इसे अपनाएं, और यह हमारे लिए नसीहत है, अगर हम इसे ध्यान से सुनें। अल्लाह ने इस किताब को हमारे लिए आसान बना दिया है, ताकि हम उसकी रहमत से वंचित न रहें।

इसलिए हमें चाहिए कि हम कुरआन को अपनी ज़िंदगी में उतारें, उसकी शिक्षाओं पर अमल करें और उसे दूसरों तक पहुंचाएं। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की बेहतरी और आख़िरत की नजात तक ले जाएगा। अल्लाह हम सबको कुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफीक दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 49-53 — अल-अंकबूत

49بَلْ هُوَ آيَاتٌ بَيِّنَاتٌ فِي صُدُورِ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ ۚ وَمَا يَجْحَدُ بِآيَاتِنَا إِلَّا الظَّالِمُونَ
मगर जिन लोगों को (ख़ुदा की तरफ से) इल्म अता हुआ है उनके दिल में ये (क़ुरान) वाजेए व रौशन आयतें हैं और सरकशी के सिवा हमारी आयतो से कोई इन्कार नहीं करता
50وَقَالُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ آيَاتٌ مِّن رَّبِّهِ ۖ قُلْ إِنَّمَا الْآيَاتُ عِندَ اللَّهِ وَإِنَّمَا أَنَا نَذِيرٌ مُّبِينٌ
और (कुफ्फ़ार अरब) कहते हैं कि इस (रसूल) पर उसके परवरदिगार की तरफ से मौजिज़े क्यों नही नाज़िल होते (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि मौजिज़े तो बस ख़ुदा ही के पास हैं और मै तो सिर्फ साफ साफ (अज़ाबे ख़ुदा से) डराने वाला हूँ
51أَوَلَمْ يَكْفِهِمْ أَنَّا أَنزَلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ يُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَرَحْمَةً وَذِكْرَىٰ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
क्या उनके लिए ये काफी नहीं कि हमने तुम पर क़ुरान नाज़िल किया जो उनके सामने पढ़ा जाता है इसमें शक नहीं कि ईमानदार लोगों के लिए इसमें (ख़ुदा की बड़ी) मेहरबानी और (अच्छी ख़ासी) नसीहत है
52قُلْ كَفَىٰ بِاللَّهِ بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ شَهِيدًا ۖ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ وَالَّذِينَ آمَنُوا بِالْبَاطِلِ وَكَفَرُوا بِاللَّهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
तुम कह दो कि मेरे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है जो सारे आसमान व ज़मीन की चीज़ों को जानता है-और जिन लोगों ने बातिल को माना और ख़ुदा से इन्कार किया वही लोग बड़े घाटे में रहेंगे
53وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ ۚ وَلَوْلَا أَجَلٌ مُّسَمًّى لَّجَاءَهُمُ الْعَذَابُ وَلَيَأْتِيَنَّهُم بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
और (ऐ रसूल) तुमसे लोग अज़ाब के नाज़िल होने की जल्दी करते हैं और अगर (अज़ाब का) वक्त मुअय्यन न होता तो यक़ीनन उनके पास अब तक अज़ाब आ जाता और (आख़िर एक दिन) उन पर अचानक ज़रुर आ पड़ेगा और उनको ख़बर भी न होगी
अल-अंकबूतकुरान सूची
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51आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 51

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Tuesday, August 18, 2026

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