अल-अंकबूत · 52/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
قُلْ كَفَىٰ بِاللَّهِ بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ شَهِيدًا ۖ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ وَالَّذِينَ آمَنُوا بِالْبَاطِلِ وَكَفَرُوا بِاللَّهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ ۝٥٢
Qul kafaa billaahi bainee wa bainakum shaheedaa; ya`lamu maa fis samaawaati wal ard; wallazeena aamanoo bil baatili wa kafaroo billaahi ulaaa`ika humul khaasiroon
📖 हिंदी अर्थ
तुम कह दो कि मेरे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है जो सारे आसमान व ज़मीन की चीज़ों को जानता है-और जिन लोगों ने बातिल को माना और ख़ुदा से इन्कार किया वही लोग बड़े घाटे में रहेंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • شَهِيدًا – गवाह, साक्षी
  • بِالْبَاطِلِ – झूठे माबूदों पर, असत्य पर
  • الْخَاسِرُونَ – घाटे में रहने वाले, नुकसान उठाने वाले

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप कह दीजिए कि मेरे और आपके बीच अल्लाह ही काफी गवाह है। वह इस बात का गवाह है कि मैं सच्चाई के साथ उसका रसूल बनकर आया हूँ, और वह इस बात का भी गवाह है कि तुम लोगों ने उस सच्चाई को झुठलाया जो मैं लेकर आया हूँ। अल्लाह तआला हर चीज़ का जानने वाला है, वह आसमानों और ज़मीन की हर छोटी-बड़ी चीज़ से वाकिफ है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है। वह जानता है कि मैं सच्चा हूँ और तुम झूठे हो, और वही सबसे बड़ा न्यायाधीश है।

फिर अल्लाह तआला उन लोगों का हाल बयान करता है जो इन सारी साफ-साफ दलीलों और निशानियों के बावजूद सच्चाई को नहीं मानते। वह कहता है: जिन लोगों ने अल्लाह को छोड़कर झूठे माबूदों पर ईमान लाया, और अल्लाह के साथ कुफ्र किया — यानी उसे न पहचाना और उसकी इबादत से मुँह मोड़ा — तो यही लोग हैं जो असली घाटे में हैं। उन्होंने ईमान के बदले कुफ्र को खरीदा, हिदायत के बदले गुमराही को चुना, और सच्चाई को छोड़कर झूठ को अपना लिया। यह सबसे बड़ा नुकसान है, जो दुनिया में भी उन्हें रास नहीं आएगा और आख़िरत में तो उनका अंजाम जहन्नुम ही है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों को किसी इंसानी गवाही की ज़रूरत नहीं, क्योंकि अल्लाह खुद उनका गवाह है। जब हमारा दिल ईमान की रोशनी से रोशन हो जाए, और हम अल्लाह के बताए रास्ते पर चलें, तो हमें किसी की परवाह नहीं करनी चाहिए। अल्लाह हमारे अच्छे कर्मों को देखता है और उन्हें बेकार नहीं जाने देता। याद रखिए, असली कामयाबी उसी की है जो अल्लाह को पहचाने, उसकी इबादत करे और उसके रसूल पर ईमान लाए। जो लोग इस सच्चाई से मुँह मोड़ते हैं, वह दुनिया में भी बेचैन रहते हैं और आख़िरत में भी उनका ठिकाना जहन्नुम है। अल्लाह हम सबको सच्चे ईमान की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 50-54 — अल-अंकबूत

50وَقَالُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ آيَاتٌ مِّن رَّبِّهِ ۖ قُلْ إِنَّمَا الْآيَاتُ عِندَ اللَّهِ وَإِنَّمَا أَنَا نَذِيرٌ مُّبِينٌ
और (कुफ्फ़ार अरब) कहते हैं कि इस (रसूल) पर उसके परवरदिगार की तरफ से मौजिज़े क्यों नही नाज़िल होते (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि मौजिज़े तो बस ख़ुदा ही के पास हैं और मै तो सिर्फ साफ साफ (अज़ाबे ख़ुदा से) डराने वाला हूँ
51أَوَلَمْ يَكْفِهِمْ أَنَّا أَنزَلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ يُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَرَحْمَةً وَذِكْرَىٰ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
क्या उनके लिए ये काफी नहीं कि हमने तुम पर क़ुरान नाज़िल किया जो उनके सामने पढ़ा जाता है इसमें शक नहीं कि ईमानदार लोगों के लिए इसमें (ख़ुदा की बड़ी) मेहरबानी और (अच्छी ख़ासी) नसीहत है
52قُلْ كَفَىٰ بِاللَّهِ بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ شَهِيدًا ۖ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ وَالَّذِينَ آمَنُوا بِالْبَاطِلِ وَكَفَرُوا بِاللَّهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
तुम कह दो कि मेरे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है जो सारे आसमान व ज़मीन की चीज़ों को जानता है-और जिन लोगों ने बातिल को माना और ख़ुदा से इन्कार किया वही लोग बड़े घाटे में रहेंगे
53وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ ۚ وَلَوْلَا أَجَلٌ مُّسَمًّى لَّجَاءَهُمُ الْعَذَابُ وَلَيَأْتِيَنَّهُم بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
और (ऐ रसूल) तुमसे लोग अज़ाब के नाज़िल होने की जल्दी करते हैं और अगर (अज़ाब का) वक्त मुअय्यन न होता तो यक़ीनन उनके पास अब तक अज़ाब आ जाता और (आख़िर एक दिन) उन पर अचानक ज़रुर आ पड़ेगा और उनको ख़बर भी न होगी
54يَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحِيطَةٌ بِالْكَافِرِينَ
ये लोग तुमसे अज़ाब की जल्दी करते हैं और ये यक़ीनी बात है कि दोज़ख़ काफिरों को (इस तरह) घेर कर रहेगी (कि रुक न सकेंगे)
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीRevelation
52आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 52

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Tuesday, August 18, 2026

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