आल-इमरान · 198/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
لَٰكِنِ الَّذِينَ اتَّقَوْا رَبَّهُمْ لَهُمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا نُزُلًا مِّنْ عِندِ اللَّهِ ۗ وَمَا عِندَ اللَّهِ خَيْرٌ لِّلْأَبْرَارِ ۝١٩٨
Laakinil lazeenat taqaw Rabbahum lahum Jannnaatun tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaa nuzulammin `indil laah; wa maa `indal laahi khairul lil abraar
📖 हिंदी अर्थ
मगर जिन लोगों ने अपने परवरदिगार की परहेज़गारी (इख्तेयार की उनके लिए बेहिश्त के) वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारीं हैं और वह हमेशा उसी में रहेंगे ये ख़ुदा की तरफ़ से उनकी (दावत है और जो साज़ो सामान) ख़ुदा के यहॉ है वह नेको कारों के वास्ते दुनिया से कहीं बेहतर है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اتَّقَوْا: डरने वाले, अल्लाह के आदेशों का पालन करने वाले और उसकी मनाही से बचने वाले।
  • نُزُلًا: मेहमानों के लिए तैयार किया गया भोजन और ठहरने की जगह; यहाँ इसका अर्थ है सम्मान और आदर के साथ दिया जाने वाला पुरस्कार।
  • لِلْأَبْرَارِ: नेक लोगों के लिए, जो अल्लाह के सच्चे और वफादार बंदे हों।

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों की स्थिति बयान कर रहा है जो उससे डरते हैं और उसकी आज्ञा का पालन करते हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने अपने रब के आदेशों का पालन किया और उसकी मनाही से बचे रहे। उनके लिए ऐसी जन्नतें हैं जिनके नीचे नहरें बहती हैं। ये नहरें उनके महलों और बागों के नीचे से गुजरती हैं, और वे इन जन्नतों में हमेशा हमेशा रहेंगे, कभी बाहर नहीं निकलेंगे। यह सब कुछ अल्लाह की ओर से उनके लिए एक विशेष सम्मान और आदर के रूप में तैयार किया गया है, जैसे कोई मेहमान के लिए बेहतरीन खाना और ठहरने की जगह तैयार करता है।

फिर अल्लाह तआला फरमाता है कि जो कुछ अल्लाह के पास है (यानी जन्नत और उसकी नेमतें) वह उन सब चीज़ों से बेहतर और उत्तम है जो काफिर लोग दुनिया में भोगते हैं। काफिरों को दुनिया में जो चीज़ें मिलती हैं, वे कुछ दिनों की हैं, लेकिन नेक लोगों के लिए अल्लाह के पास जो कुछ है, वह हमेशा रहने वाला और बेहतरीन है।

फायदे और सबक:

  1. तक़वा (अल्लाह का डर) ही सच्ची कामयाबी का रास्ता है – जो लोग अल्लाह से डरते हैं और उसकी आज्ञा का पालन करते हैं, उनके लिए अल्लाह ने ऐसी जगह तैयार की है जिसका कोई अंत नहीं।
  2. दुनिया की नेमतें अस्थायी हैं, आख़िरत की नेमतें स्थायी हैं – काफिरों को दुनिया में जो कुछ मिलता है, वह कुछ दिनों का है, लेकिन मोमिनों के लिए अल्लाह के पास जो कुछ है, वह हमेशा रहने वाला और बेहतर है।
  3. अल्लाह की ओर से मेहमानी का सम्मान – जन्नत को "नुज़ुल" (मेहमानी) कहा गया है, जो दर्शाता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों का कितना सम्मान करता है और उनके लिए कितनी बड़ी तैयारी की है।
  4. आशा और उम्मीद का पैगाम – यह आयत मोमिनों को उम्मीद देती है कि भले ही दुनिया में उन्हें कठिनाइयाँ हों, लेकिन अल्लाह के पास उनके लिए बेहतरीन इनाम है, जो उनकी सारी मेहनत और सब्र का फल होगा।
  5. नेक लोगों की पहचान – नेक लोग वे हैं जो अल्लाह के आदेशों का पालन करते हैं और उसकी मनाही से बचते हैं, और उनके लिए अल्लाह के पास सबसे अच्छा इनाम है।
🎧 सुनें

📜 आयत 196-200 — आल-इमरान

196لَا يَغُرَّنَّكَ تَقَلُّبُ الَّذِينَ كَفَرُوا فِي الْبِلَادِ
(ऐ रसूल) काफ़िरों का शहरों शहरों चैन करते फिरना तुम्हे धोखे में न डाले
197مَتَاعٌ قَلِيلٌ ثُمَّ مَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ ۚ وَبِئْسَ الْمِهَادُ
ये चन्द रोज़ा फ़ायदा हैं फिर तो (आख़िरकार) उनका ठिकाना जहन्नुम ही है और क्या ही बुरा ठिकाना है
198لَٰكِنِ الَّذِينَ اتَّقَوْا رَبَّهُمْ لَهُمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا نُزُلًا مِّنْ عِندِ اللَّهِ ۗ وَمَا عِندَ اللَّهِ خَيْرٌ لِّلْأَبْرَارِ
मगर जिन लोगों ने अपने परवरदिगार की परहेज़गारी (इख्तेयार की उनके लिए बेहिश्त के) वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारीं हैं और वह हमेशा उसी में रहेंगे ये ख़ुदा की तरफ़ से उनकी (दावत है और जो साज़ो सामान) ख़ुदा के यहॉ है वह नेको कारों के वास्ते दुनिया से कहीं बेहतर है
199وَإِنَّ مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ لَمَن يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَمَا أُنزِلَ إِلَيْكُمْ وَمَا أُنزِلَ إِلَيْهِمْ خَاشِعِينَ لِلَّهِ لَا يَشْتَرُونَ بِآيَاتِ اللَّهِ ثَمَنًا قَلِيلًا ۗ أُولَٰئِكَ لَهُمْ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ ۗ إِنَّ اللَّهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ
और अहले किताब में से कुछ लोग तो ऐसे ज़रूर हैं जो ख़ुदा पर और जो (किताब) तुम पर नाज़िल हुई और जो (किताब) उनपर नाज़िल हुई (सब पर) ईमान रखते हैं ख़ुदा के आगे सर झुकाए हुए हैं और ख़ुदा की आयतों के बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनियावी फ़ायदे) नहीं लेते ऐसे ही लोगों के वास्ते उनके परवरदिगार के यहॉ अच्छा बदला है बेशक ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब करने वाला है
200يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اصْبِرُوا وَصَابِرُوا وَرَابِطُوا وَاتَّقُوا اللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
ऐ ईमानदारों (दीन की तकलीफ़ों को) और दूसरों को बर्दाश्त की तालीम दो और (जिहाद के लिए) कमरें कस लो और ख़ुदा ही से डरो ताकि तुम अपनी दिली मुराद पाओ
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अनुवाद — आल-इमरान 198

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सूरा आयत 198/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 196–200. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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