अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- خَاشِعِينَ: अल्लाह के आगे झुकने वाले, विनम्र और नम्र होने वाले।
- لَا يَشْتَرُونَ بِآيَاتِ اللَّهِ ثَمَنًا قَلِيلًا: अल्लाह की आयतों (शिक्षाओं) के बदले थोड़ा सा सांसारिक लाभ प्राप्त नहीं करते, अर्थात् उन्हें छिपाते या बदलते नहीं हैं।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत अहले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) के उन लोगों के बारे में बताती है जो सच्चे दिल से ईमान लाए। ये वे लोग हैं जो अल्लाह पर एकमात्र ईश्वर के रूप में ईमान रखते हैं, उसके साथ किसी को साझीदार नहीं बनाते। वे उस कुरआन पर भी ईमान लाते हैं जो आप (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारा गया, और उन आसमानी किताबों (तौरात और इंजील) पर भी ईमान रखते हैं जो उनके नबियों पर उतारी गईं। वे किसी भी रसूल के बीच भेदभाव नहीं करते।
ये लोग अल्लाह के सामने पूरी विनम्रता और खुशू (झुकाव) के साथ झुकते हैं, उसकी इबादत में अपने आप को पूरी तरह समर्पित कर देते हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे अल्लाह की आयतों (जैसे तौरात में मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आने की भविष्यवाणी) को छिपाकर या बदलकर दुनिया का थोड़ा सा माल हासिल नहीं करते। वे दुनिया की क्षणभंगुर चीज़ों के बदले अपने ईमान और सच्चाई को बेचते नहीं हैं, जैसा कि उनके दूसरे लोगों ने किया।
ऐसे लोगों के लिए उनके रब के पास बड़ा प्रतिफल (अज्र) है। वे अपने अच्छे कर्मों का पूरा बदला पाएँगे, जिसमें कोई कमी नहीं की जाएगी। अल्लाह हिसाब लेने में बहुत तेज़ है, वह किसी के भी अच्छे या बुरे कर्मों से बेखबर नहीं है और न ही उसे उनका हिसाब लेने में कोई कठिनाई होती है।
फ़ायदे (लाभ):
- यह आयत सिखाती है कि अल्लाह के यहाँ नेकी और सच्चाई का मापदंड सिर्फ़ नाम या जाति नहीं है, बल्कि सच्चा ईमान और अच्छे कर्म हैं। जो भी अल्लाह पर और उसके रसूलों पर सच्चे दिल से ईमान लाएगा, उसे उसका पूरा इनाम मिलेगा।
- सच्चे ईमान की निशानी यह है कि इंसान दुनिया के मामूली फ़ायदों के लिए अपने धर्म और सच्चाई से समझौता न करे। अल्लाह की आयतों को छिपाना या बदलना बहुत बड़ा पाप है।
- अल्लाह की रहमत बहुत विस्तृत है, और उसका न्याय बिल्कुल सटीक है। वह हर अच्छे काम का बदला देने में तेज़ है, इसलिए इंसान को हमेशा नेकी पर चलना चाहिए और अल्लाह के हिसाब से डरते हुए सच्चाई का साथ देना चाहिए।
- यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि वे अहले-किताब के साथ अच्छे व्यवहार करें, क्योंकि उनमें से कुछ सच्चे ईमान वाले भी हैं, और उनके साथ न्याय और भलाई का व्यवहार करना चाहिए।
📜 आयत 197-200 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 199
सूरा आल-इमरान आयत 199 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अहले किताब में से कुछ लोग तो ऐसे ज़रूर…सूरा आयत 199/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 197–200. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








