Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
कठिन शब्दों के अर्थ:
- اللَّهُمَّ: हे अल्लाह! (यह अल्लाह ही का नाम है, जिसका प्रयोग दुआ में किया जाता है)
- مَالِكَ الْمُلْكِ: सारे राज्य और सत्ता का स्वामी
- تُؤْتِي: तू देता है
- تَنزِعُ: तू छीन लेता है
- تُعِزُّ: तू इज़्ज़त (प्रतिष्ठा) देता है
- تُذِلُّ: तू ज़िल्लत (अपमान) देता है
- بِيَدِكَ: तेरे हाथ में है (अर्थात तेरे अधिकार और नियंत्रण में है)
- قَدِيرٌ: सब कुछ करने की शक्ति रखने वाला
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! आप अपने रब से दुआ करते हुए कहें: "हे अल्लाह! तू ही सारे राज्य और सत्ता का एकमात्र स्वामी है। तू ही जिसे चाहता है राज्य, सत्ता, धन और अधिकार देता है, और जिससे चाहता है यह सब छीन लेता है। तू ही जिसे चाहता है इज़्ज़त और प्रतिष्ठा प्रदान करता है, और जिसे चाहता है ज़िल्लत और अपमान में डाल देता है। यह सब कुछ तेरे ही हाथ में है — तेरे ही अधिकार और नियंत्रण में है। तू ही सब भलाई का स्रोत है, और निस्संदेह तू हर चीज़ पर पूर्ण शक्ति रखता है।"
यह आयत अल्लाह की संपूर्ण प्रभुता और उसके अधिकार की सीमा को स्पष्ट करती है। दुनिया की सारी सत्ताएँ, साम्राज्य, धन-दौलत और अधिकार — सब कुछ अल्लाह के ही नियंत्रण में हैं। वह जिसे चाहता है उठाता है और जिसे चाहता है गिराता है। उसका फैसला हिकमत (बुद्धिमत्ता) और अदल (न्याय) पर आधारित होता है। यहाँ यह भी स्पष्ट किया गया कि सारी भलाई अल्लाह के हाथ में है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर (सर्वशक्तिमान) है।
आयत से मिलने वाली शिक्षाएँ और लाभ:
- अल्लाह की संपूर्ण सत्ता का अक़ीदा: इस आयत से मुसलमान को यह विश्वास मज़बूत होता है कि सारी बादशाही और सत्ता अल्लाह ही के हाथ में है। किसी भी इंसान या ताक़त के पास अपनी मर्ज़ी से कुछ भी देने या छीनने की शक्ति नहीं है।
- तक़दीर पर ईमान: यह आयत हमें सिखाती है कि जो कुछ भी होता है अल्लाह की मर्ज़ी और उसकी योजना से होता है। इसलिए मुसलमान को हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए — चाहे उसे सत्ता मिले या उससे छीन ली जाए।
- विनम्रता और धैर्य का पाठ: जब किसी को सत्ता या अधिकार मिले तो उसे घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह अल्लाह की देन है। और जब उससे छिन जाए तो निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की मर्ज़ी में ही भलाई है।
- दुआ की शक्ति: यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह से ही सब कुछ माँगना चाहिए। सत्ता, इज़्ज़त, भलाई — सब कुछ उसी से माँगा जा सकता है, क्योंकि सब कुछ उसी के हाथ में है।
- अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) पर विश्वास: "إِنَّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ" (तू हर चीज़ पर शक्ति रखता है) — यह वाक्य मुसलमान के दिल में यह विश्वास पैदा करता है कि अल्लाह के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। यह विश्वास उसे हर मुश्किल में सहारा देता है।
- इतिहास से सबक: यह आयत उन लोगों के लिए चेतावनी है जो सत्ता के घमंड में चूर हो जाते हैं, और उनके लिए दिलासा है जो सत्ता से वंचित हैं — कि सत्ता का मालिक अल्लाह है, वह जिसे चाहे दे और जिससे चाहे छीन ले।
📜 आयत 24-28 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 26
सूरा आल-इमरान आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम तो यह दुआ मॉगों कि ऐ ख़ुदा…सूरा आयत 26/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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