Qulil laahumma Maalikal Mulki tu`til mulka man tashaaa`u wa tanzi`ulmulka mimman tashhaaa`u wa tu`izzu man tashaaa`u wa tuzillu man tashaaa`u biyadikal khairu innaka `alaa kulli shai`in Qadeer
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम तो यह दुआ मॉगों कि ऐ ख़ुदा तमाम आलम के मालिक तू ही जिसको चाहे सल्तनत दे और जिससे चाहे सल्तनत छीन ले और तू ही जिसको चाहे इज्ज़त दे और जिसे चाहे ज़िल्लत दे हर तरह की भलाई तेरे ही हाथ में है बेशक तू ही हर चीज़ पर क़ादिर है
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کہو کہ اے خدا (اے) بادشاہی کے مالک تو جس کو چاہے بادشاہی بخشے اور جس سے چاہے بادشاہی چھین لے اور جس کو چاہے عزت دے اور جسے چاہے ذلیل کرے ہر طرح کی بھلائی تیرے ہی ہاتھ ہے اور بے شک تو ہر چیز پر قادر ہے
اللَّهُمَّ: हे अल्लाह! (यह अल्लाह ही का नाम है, जिसका प्रयोग दुआ में किया जाता है)
مَالِكَ الْمُلْكِ: सारे राज्य और सत्ता का स्वामी
تُؤْتِي: तू देता है
تَنزِعُ: तू छीन लेता है
تُعِزُّ: तू इज़्ज़त (प्रतिष्ठा) देता है
تُذِلُّ: तू ज़िल्लत (अपमान) देता है
بِيَدِكَ: तेरे हाथ में है (अर्थात तेरे अधिकार और नियंत्रण में है)
قَدِيرٌ: सब कुछ करने की शक्ति रखने वाला
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! आप अपने रब से दुआ करते हुए कहें: "हे अल्लाह! तू ही सारे राज्य और सत्ता का एकमात्र स्वामी है। तू ही जिसे चाहता है राज्य, सत्ता, धन और अधिकार देता है, और जिससे चाहता है यह सब छीन लेता है। तू ही जिसे चाहता है इज़्ज़त और प्रतिष्ठा प्रदान करता है, और जिसे चाहता है ज़िल्लत और अपमान में डाल देता है। यह सब कुछ तेरे ही हाथ में है — तेरे ही अधिकार और नियंत्रण में है। तू ही सब भलाई का स्रोत है, और निस्संदेह तू हर चीज़ पर पूर्ण शक्ति रखता है।"
यह आयत अल्लाह की संपूर्ण प्रभुता और उसके अधिकार की सीमा को स्पष्ट करती है। दुनिया की सारी सत्ताएँ, साम्राज्य, धन-दौलत और अधिकार — सब कुछ अल्लाह के ही नियंत्रण में हैं। वह जिसे चाहता है उठाता है और जिसे चाहता है गिराता है। उसका फैसला हिकमत (बुद्धिमत्ता) और अदल (न्याय) पर आधारित होता है। यहाँ यह भी स्पष्ट किया गया कि सारी भलाई अल्लाह के हाथ में है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर (सर्वशक्तिमान) है।
आयत से मिलने वाली शिक्षाएँ और लाभ:
अल्लाह की संपूर्ण सत्ता का अक़ीदा: इस आयत से मुसलमान को यह विश्वास मज़बूत होता है कि सारी बादशाही और सत्ता अल्लाह ही के हाथ में है। किसी भी इंसान या ताक़त के पास अपनी मर्ज़ी से कुछ भी देने या छीनने की शक्ति नहीं है।
तक़दीर पर ईमान: यह आयत हमें सिखाती है कि जो कुछ भी होता है अल्लाह की मर्ज़ी और उसकी योजना से होता है। इसलिए मुसलमान को हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए — चाहे उसे सत्ता मिले या उससे छीन ली जाए।
विनम्रता और धैर्य का पाठ: जब किसी को सत्ता या अधिकार मिले तो उसे घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह अल्लाह की देन है। और जब उससे छिन जाए तो निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की मर्ज़ी में ही भलाई है।
दुआ की शक्ति: यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह से ही सब कुछ माँगना चाहिए। सत्ता, इज़्ज़त, भलाई — सब कुछ उसी से माँगा जा सकता है, क्योंकि सब कुछ उसी के हाथ में है।
अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) पर विश्वास: "إِنَّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ" (तू हर चीज़ पर शक्ति रखता है) — यह वाक्य मुसलमान के दिल में यह विश्वास पैदा करता है कि अल्लाह के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। यह विश्वास उसे हर मुश्किल में सहारा देता है।
इतिहास से सबक: यह आयत उन लोगों के लिए चेतावनी है जो सत्ता के घमंड में चूर हो जाते हैं, और उनके लिए दिलासा है जो सत्ता से वंचित हैं — कि सत्ता का मालिक अल्लाह है, वह जिसे चाहे दे और जिससे चाहे छीन ले।
(ऐ रसूल) तुम तो यह दुआ मॉगों कि ऐ ख़ुदा तमाम आलम के मालिक तू ही जिसको चाहे सल्तनत दे और जिससे चाहे सल्तनत छीन ले और तू ही जिसको चाहे इज्ज़त दे और जिसे चाहे ज़िल्लत दे हर तरह की भलाई तेरे ही हाथ में है बेशक तू ही हर चीज़ पर क़ादिर है
ये इस वजह से है कि वह लोग कहते हैं कि हमें गिनती के चन्द दिनों के सिवा जहन्नुम की आग हरगिज़ छुएगी भी तो नहीं जो इफ़तेरा परदाज़ी ये लोग बराबर करते आए हैं उसी ने उन्हें उनके दीन में भी धोखा दिया है
फ़िर उनकी क्या गत होगी जब हम उनको एक दिन (क़यामत) जिसके आने में कोई शुबहा नहीं इक्ट्ठा करेंगे और हर शख्स को उसके किए का पूरा पूरा बदला दिया जाएगा और उनकी किसी तरह हक़तल्फ़ी नहीं की जाएगी
(ऐ रसूल) तुम तो यह दुआ मॉगों कि ऐ ख़ुदा तमाम आलम के मालिक तू ही जिसको चाहे सल्तनत दे और जिससे चाहे सल्तनत छीन ले और तू ही जिसको चाहे इज्ज़त दे और जिसे चाहे ज़िल्लत दे हर तरह की भलाई तेरे ही हाथ में है बेशक तू ही हर चीज़ पर क़ादिर है
तू ही रात को (बढ़ा के) दिन में दाख़िल कर देता है (तो) रात बढ़ जाती है और तू ही दिन को (बढ़ा के) रात में दाख़िल करता है (तो दिन बढ़ जाता है) तू ही बेजान (अन्डा नुत्फ़ा वगैरह) से जानदार को पैदा करता है और तू ही जानदार से बेजान नुत्फ़ा (वगैरहा) निकालता है और तू ही जिसको चाहता है बेहिसाब रोज़ी देता है
मोमिनीन मोमिनीन को छोड़ के काफ़िरों को अपना सरपरस्त न बनाऐं और जो ऐसा करेगा तो उससे ख़ुदा से कुछ सरोकार नहीं मगर (इस क़िस्म की तदबीरों से) किसी तरह उन (के शर) से बचना चाहो तो (ख़ैर) और ख़ुदा तुमको अपने ही से डराता है और ख़ुदा ही की तरफ़ लौट कर जाना है
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