Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
بَلَىٰ مَنْ أَوْفَىٰ بِعَهْدِهِ وَاتَّقَىٰ فَإِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الْمُتَّقِينَ
शब्दों के अर्थ:
- بَلَىٰ: हाँ, अवश्य (यहाँ इसका अर्थ है कि जैसा उन्होंने सोचा था वैसा नहीं है, बल्कि उन पर दोष और पकड़ है)
- أَوْفَىٰ: पूरा करे, निभाए
- بِعَهْدِهِ: अपने वचन को, अपने अहद को
- وَاتَّقَىٰ: और अल्लाह से डरे, तक़वा अपनाए
- يُحِبُّ الْمُتَّقِينَ: मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) से प्रेम करता है
विस्तृत तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों के झूठे दावों का खंडन कर रहे हैं जो कहते थे कि अनपढ़ (उम्मी) लोगों के मामले में हम पर कोई पकड़ नहीं है। अल्लाह फ़रमाता है: हाँ, अवश्य उन पर पकड़ है और उनके लिए दोष है। लेकिन असली बात यह है कि जो व्यक्ति अपने वचन को पूरा करे — चाहे वह वचन अल्लाह से हो या लोगों से — और अल्लाह से डरता हुआ उसकी आज्ञाओं का पालन करे और उसकी मनाही से बचे, तो अल्लाह ऐसे ही मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) से प्रेम करता है।
इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखा रहे हैं कि ईमान का दावा करना ही काफी नहीं है, बल्कि ईमान की असली पहचान यह है कि इंसान अपने अहद (वचन) को पूरा करे। अल्लाह से हमारा अहद है कि हम उस पर ईमान लाएं, उसके रसूलों पर ईमान लाएं, और उसके दीन (धर्म) का पालन करें। लोगों से हमारा अहद है कि हम अमानत (धरोहर) को अदा करें, वादों को निभाएं और किसी को धोखा न दें।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की मुहब्बत (प्रेम) पाने का सबसे बड़ा ज़रिया तक़वा है। तक़वा यानी अल्लाह का डर जो इंसान को हर बुराई से रोके और हर अच्छाई की तरफ ले जाए। जब इंसान अपने वचनों को पूरा करता है और अल्लाह से डरता है, तो वह अल्लाह का प्यारा बन जाता है।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें एक बहुत बड़ी खुशखबरी देती है। अल्लाह तआला ने यह नहीं कहा कि मैं केवल नबियों और औलिया से प्रेम करता हूं, बल्कि फ़रमाया: "अल्लाह मुत्तक़ियों से प्रेम करता है" — यानी जो कोई भी तक़वा अपनाए, चाहे वह किसी भी जाति, रंग या देश का हो, वह अल्लाह का महबूब (प्यारा) बन सकता है। यह कितनी बड़ी रहमत है!
तो आइए, हम अपने जीवन में इस आयत पर अमल करें — अपने अल्लाह से किए गए वचनों को पूरा करें, अपने वादों को निभाएं, अमानतों को अदा करें, और हर हाल में अल्लाह से डरते हुए उसकी रज़ा (प्रसन्नता) के लिए काम करें। यही रास्ता हमें अल्लाह की मुहब्बत तक पहुंचाएगा, और यही सबसे बड़ी कामयाबी है।
📜 आयत 74-78 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 76
सूरा आल-इमरान आयत 76 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हाँ (अलबत्ता) जो शख्स अपने एहद को पूरा करे और…सूरा आयत 76/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 74–78. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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