Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَرِيقًا: एक गिरोह या समूह।
- يَلْوُونَ أَلْسِنَتَهُم: अपनी ज़ुबानों को मोड़ते हैं, यानी शब्दों को उनके सही अर्थ से हटाकर बोलते हैं।
- بِالْكِتَابِ: किताब (तौरात) के मामले में।
- لِتَحْسَبُوهُ: ताकि तुम उसे समझ लो।
- مِنَ الْكِتَابِ: किताब (तौरात) का हिस्सा।
- يَقُولُونَ عَلَى اللهِ الْكَذِبَ: अल्लाह पर झूठ बोलते हैं, यानी अल्लाह की तरफ झूठी बातें जोड़ते हैं।
तफसीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला यहूदियों के एक ऐसे गिरोह का ज़िक्र कर रहा है जो अपनी ज़ुबानों को घुमाकर किताब (तौरात) की आयतों को बदल देते थे। वे ऐसे अल्फाज़ बोलते थे जो असल तौरात में नहीं थे, लेकिन उन्हें इस तरह पेश करते थे कि सुनने वाला समझे कि यही अल्लाह की नाज़िल की हुई किताब है। हालाँकि वह किताब का हिस्सा नहीं था। वे साफ़ तौर पर कहते थे कि "यह अल्लाह की तरफ से है", जबकि वह अल्लाह की तरफ से नहीं था। इस तरह वे जानबूझकर अल्लाह पर झूठ बोलते थे, और उन्हें पूरा यक़ीन था कि वे झूठ बोल रहे हैं। उनका मक़सद दुनियावी फायदा हासिल करना और लोगों को गुमराह करना था। उन्होंने रज्म (पत्थर मारने की सज़ा) की आयत और नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सिफ़तों जैसी चीज़ों को तहरीफ़ (बदलाव) करके छिपाया और उनकी जगह अपनी मनघड़ंत बातें पेश कीं।
फायदे (सबक):
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह के कलाम (किताब) में किसी भी तरह की तहरीफ़ (बदलाव) करना सबसे बड़ा गुनाह है, और यह अल्लाह पर झूठ बोलने के बराबर है।
- हमें चाहिए कि हम अपनी ज़ुबान की हिफ़ाज़त करें और कभी भी अल्लाह की तरफ कोई ऐसी बात न जोड़ें जो उसने नहीं कही।
- यह आयत हमें सच्चाई पर क़ायम रहने की तरग़ीब देती है, चाहे दुनियावी मुआवज़ा मिले या न मिले। झूठ और धोखे से दुनिया में फायदा हो सकता है, लेकिन आख़िरत में यह बर्बादी का सबब है।
- इससे हमें यह भी पता चलता है कि अल्लाह का कलाम (कुरआन) महफूज़ है, और अल्लाह ने इसे हर तहरीफ़ से बचाने का वादा किया है। इसलिए हमें कुरआन को समझकर पढ़ना चाहिए और उसी पर अमल करना चाहिए।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इल्म (ज्ञान) रखते हुए जानबूझकर झूठ बोलना और लोगों को गुमराह करना बहुत बड़ा जुर्म है, और अल्लाह के नज़दीक इसकी सज़ा बहुत सख्त है।
📜 आयत 76-80 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 78
सूरा आल-इमरान आयत 78 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अहले किताब से बाज़ ऐसे ज़रूर हैं कि किताब…सूरा आयत 78/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 76–80. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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