अर-रूम · 10/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
ثُمَّ كَانَ عَاقِبَةَ الَّذِينَ أَسَاءُوا السُّوأَىٰ أَن كَذَّبُوا بِآيَاتِ اللَّهِ وَكَانُوا بِهَا يَسْتَهْزِئُونَ ۝١٠
Summa kaana`aaqibatal lazeena asaaa`us sooo aaa an kazzaboo bi aayaatil laahi wa kaanoo bihaa yastahzi`oon
📖 हिंदी अर्थ
फिर जिन लोगों ने बुराई की थी उनका अन्जाम बुरा ही हुआ क्योंकि उन लोगों ने ख़ुदा की आयतों को झुठलाया था और उनके साथ मसखरा पन किया किए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • السُّوأَى (अस-सूआ): सबसे बुरा अंजाम, अर्थात् नरक की यातना।
  • يَسْتَهْزِئُونَ (यस्तहज़िऊन): मज़ाक उड़ाना, उपहास करना।

तफ़सीर (व्याख्या):

फिर उन लोगों का अंजाम, जिन्होंने कुफ्र और बुरे कर्मों से अपना जीवन ख़राब कर लिया, सबसे बुरा और भयानक हुआ। उनका अंत जहन्नुम की आग और अल्लाह की यातना पर हुआ। यह सज़ा उन्हें क्यों मिली? क्योंकि उन्होंने अल्लाह की आयतों (निशानियों और उसकी भेजी हुई किताबों) को झुठलाया और उनका मज़ाक उड़ाया। वे उन निशानियों पर हँसते थे जो उन्हें सीधे रास्ते की ओर बुला रही थीं, और जो पैग़म्बर उनके पास आए, उन्हें बदतरीन अंदाज़ में ठुकरा दिया।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि अल्लाह की आयतों और उसके दीन का मज़ाक उड़ाना कितनी बड़ी बर्बादी का कारण है। जो लोग सच्चाई को सुनकर उस पर ग़ौर नहीं करते, बल्कि उसे हँसी-मज़ाक में उड़ा देते हैं, वे अपने लिए सिर्फ़ पछतावा और अफ़सोस ही कमाते हैं। अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हर उस इंसान के लिए खुला है जो अपनी ग़लती का एहसास करके उसकी ओर लौट आए, लेकिन जो हठधर्मी और उपहास पर अड़ा रहे, उसका अंजाम बुरा ही होगा।

आओ, हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की आयतों को गंभीरता से लें, उन पर अमल करें, और कभी भी उन्हें हल्का या मज़ाक का विषय न बनाएँ। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की बेहतरी और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह हमें सच्चाई को समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे।



📜 आयत 8-12 — अर-रूम

8أَوَلَمْ يَتَفَكَّرُوا فِي أَنفُسِهِم ۗ مَّا خَلَقَ اللَّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا إِلَّا بِالْحَقِّ وَأَجَلٍ مُّسَمًّى ۗ وَإِنَّ كَثِيرًا مِّنَ النَّاسِ بِلِقَاءِ رَبِّهِمْ لَكَافِرُونَ
क्या उन लोगों ने अपने दिल में (इतना भी) ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ने सारे आसमान और ज़मीन को और जो चीजे उन दोनों के दरमेयान में हैं बस बिल्कुल ठीक और एक मुक़र्रर मियाद के वास्ते पैदा किया है और कुछ शक नहीं कि बहुतेरे लोग तो अपने परवरदिगार की (बारगाह) के हुज़ूर में (क़यामत) ही को किसी तरह नहीं मानते
9أَوَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَانُوا أَشَدَّ مِنْهُمْ قُوَّةً وَأَثَارُوا الْأَرْضَ وَعَمَرُوهَا أَكْثَرَ مِمَّا عَمَرُوهَا وَجَاءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ ۖ فَمَا كَانَ اللَّهُ لِيَظْلِمَهُمْ وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
क्या ये लोग रुए ज़मीन पर चले फिरे नहीं कि देखते कि जो लोग इनसे पहले गुज़र गए उनका अन्जाम कैसा (बुरा) हुआ हालॉकि जो लोग उनसे पहले क़ूवत में भी कहीं ज्यादा थे और जिस क़दर ज़मीन उन लोगों ने आबाद की है उससे कहीं ज्यादा (ज़मीन की) उन लोगों ने काश्त भी की थी और उसको आबाद भी किया था और उनके पास भी उनके पैग़म्बर वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आ चुके थे (मगर उन लोगों ने न माना) तो ख़ुदा ने उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया मगर वह लोग (कुफ्र व सरकशी से) आप अपने ऊपर ज़ुल्म करते रहे
10ثُمَّ كَانَ عَاقِبَةَ الَّذِينَ أَسَاءُوا السُّوأَىٰ أَن كَذَّبُوا بِآيَاتِ اللَّهِ وَكَانُوا بِهَا يَسْتَهْزِئُونَ
फिर जिन लोगों ने बुराई की थी उनका अन्जाम बुरा ही हुआ क्योंकि उन लोगों ने ख़ुदा की आयतों को झुठलाया था और उनके साथ मसखरा पन किया किए
11اللَّهُ يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ ثُمَّ إِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
ख़ुदा ही ने मख़लूकात को पहली बार पैदा किया फिर वही दुबारा (पैदा करेगा) फिर तुम सब लोग उसी की तरफ लौटाए जाओगे
12وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ يُبْلِسُ الْمُجْرِمُونَ
और जिस दिन क़यामत बरपा होगी (उस दिन) गुनेहगार लोग ना उम्मीद होकर रह जाएँगे
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अनुवाद — अर-रूम 10

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Wednesday, August 19, 2026

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