अर-रूम · 11/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
اللَّهُ يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ ثُمَّ إِلَيْهِ تُرْجَعُونَ ۝١١
Allaahu yabda`ul khalqa summa yu`eeduhoo summa ilaihi turja`oon
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ही ने मख़लूकात को पहली बार पैदा किया फिर वही दुबारा (पैदा करेगा) फिर तुम सब लोग उसी की तरफ लौटाए जाओगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَبْدَأُ الْخَلْقَ: सृष्टि की शुरुआत करता है, उन्हें पैदा करता है।
  • يُعِيدُهُ: उसे दोबारा लौटाता है, यानी मृत्यु के बाद दोबारा जीवित करता है।
  • تُرْجَعُونَ: तुम लौटाए जाओगे।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ही वह इकलौती हस्ती है जिसने इस पूरी कायनात को बिना किसी पूर्व नमूने के पैदा किया। उसने आसमानों, ज़मीन, इंसानों, जानवरों, पेड़-पौधों और हर चीज़ को अपनी कुदरत से अद्भुत तरीके से बनाया। फिर जब उसका तय किया हुआ वक़्त आता है, तो वह इस सृष्टि को खत्म कर देता है, और फिर क़यामत के दिन उसे दोबारा ज़िंदा करेगा। यह दोबारा पैदा करना उसके लिए बिल्कुल आसान है, जैसे पहली बार पैदा करना आसान था।

इसके बाद सबको उसी की तरफ लौटना है — नेक और बदकार, अमीर और ग़रीब, बड़े और छोटे — सबको उसके सामने हाज़िर होना है। वहाँ वह हर इंसान को उसके अमल का पूरा-पूरा बदला देगा: नेकी करने वाले को उसकी नेकी का अच्छा बदला, और बुराई करने वाले को उसकी बुराई का अंजाम।

यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत और उसके इंसाफ़ की याद दिलाती है। जिसने पहली बार पैदा किया, वही दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। यह हमारे लिए एक बड़ी सबक़ है कि हम अपनी ज़िंदगी को समझदारी से गुज़ारें, अल्लाह की इबादत करें और उसके हुक्मों पर चलें, ताकि उस दिन हम कामयाब हो सकें।

याद रखिए! यह ज़िंदगी आख़िरी नहीं है, बल्कि यह एक इम्तिहान है। जो लोग अल्लाह पर ईमान लाएँगे और नेक अमल करेंगे, उनके लिए जन्नत की खुशियाँ हैं, और जो उसकी नाफ़रमानी करेंगे, उनके लिए अफ़सोस और अज़ाब है। अल्लाह से डरें और उसकी रहमत की उम्मीद रखें — वह बड़ा मेहरबान और बड़ा इंसाफ़ करने वाला है।

🎧 सुनें

📜 आयत 9-13 — अर-रूम

9أَوَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَانُوا أَشَدَّ مِنْهُمْ قُوَّةً وَأَثَارُوا الْأَرْضَ وَعَمَرُوهَا أَكْثَرَ مِمَّا عَمَرُوهَا وَجَاءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ ۖ فَمَا كَانَ اللَّهُ لِيَظْلِمَهُمْ وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
क्या ये लोग रुए ज़मीन पर चले फिरे नहीं कि देखते कि जो लोग इनसे पहले गुज़र गए उनका अन्जाम कैसा (बुरा) हुआ हालॉकि जो लोग उनसे पहले क़ूवत में भी कहीं ज्यादा थे और जिस क़दर ज़मीन उन लोगों ने आबाद की है उससे कहीं ज्यादा (ज़मीन की) उन लोगों ने काश्त भी की थी और उसको आबाद भी किया था और उनके पास भी उनके पैग़म्बर वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आ चुके थे (मगर उन लोगों ने न माना) तो ख़ुदा ने उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया मगर वह लोग (कुफ्र व सरकशी से) आप अपने ऊपर ज़ुल्म करते रहे
10ثُمَّ كَانَ عَاقِبَةَ الَّذِينَ أَسَاءُوا السُّوأَىٰ أَن كَذَّبُوا بِآيَاتِ اللَّهِ وَكَانُوا بِهَا يَسْتَهْزِئُونَ
फिर जिन लोगों ने बुराई की थी उनका अन्जाम बुरा ही हुआ क्योंकि उन लोगों ने ख़ुदा की आयतों को झुठलाया था और उनके साथ मसखरा पन किया किए
11اللَّهُ يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ ثُمَّ إِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
ख़ुदा ही ने मख़लूकात को पहली बार पैदा किया फिर वही दुबारा (पैदा करेगा) फिर तुम सब लोग उसी की तरफ लौटाए जाओगे
12وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ يُبْلِسُ الْمُجْرِمُونَ
और जिस दिन क़यामत बरपा होगी (उस दिन) गुनेहगार लोग ना उम्मीद होकर रह जाएँगे
13وَلَمْ يَكُن لَّهُم مِّن شُرَكَائِهِمْ شُفَعَاءُ وَكَانُوا بِشُرَكَائِهِمْ كَافِرِينَ
और उनके (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीकों में से कोई उनका सिफारिशी न होगा और ये लोग ख़़ुद भी अपने शरीकों से इन्कार कर जाएँगे
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अनुवाद — अर-रूम 11

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Tuesday, August 18, 2026

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