अर-रूम · 27/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
وَهُوَ الَّذِي يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ وَهُوَ أَهْوَنُ عَلَيْهِ ۚ وَلَهُ الْمَثَلُ الْأَعْلَىٰ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ ۝٢٧
Wa Huwal lazee yabda`ul khalqa summa yu`eeduhoo wa huwa ahwanu `alaih; wa lahul masalul la`laa fissamaawaati wal-ard; wa Huwal `Azeezul Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
और वह ऐसा (क़ादिरे मुत्तालिक़ है जो मख़लूकात को पहली बार पैदा करता है फिर दोबारा (क़यामत के दिन) पैदा करेगा और ये उस पर बहुत आसान है और सारे आसमान व जमीन सबसे बालातर उसी की शान है और वही (सब पर) ग़ालिब हिकमत वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَبْدَأُ الْخَلْقَ: सृष्टि की शुरुआत करता है (पहली बार पैदा करता है)।
  • يُعِيدُهُ: उसे दोबारा (जीवित) करता है, यानी मृत्यु के बाद दोबारा उठाना।
  • أَهْوَنُ: अधिक आसान (यहाँ अर्थ है कि अल्लाह के लिए दोनों आसान हैं, लेकिन पुनः सृजन उसके लिए और भी सरल है)।
  • الْمَثَلُ الْأَعْلَى: सर्वोच्च गुण/विशेषता, यानी अल्लाह के लिए सबसे उत्तम और बुलंद विशेषण है।
  • الْعَزِيزُ: वह शक्तिशाली है जिसे कोई हरा न सके।
  • الْحَكِيمُ: वह तत्वदर्शी है जो हर काम में पूर्ण ज्ञान और हिकमत (समझदारी) रखता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत (शक्ति) और उसके अज़ीम (महान) कामों पर ग़ौर करने की दावत देती है। अल्लाह ही वह है जो सृष्टि की शुरुआत करता है—बिना किसी पूर्व नमूने के, शून्य से सब कुछ पैदा करता है। फिर जब वह चाहता है, तो मृत्यु के बाद सबको दोबारा जीवित करेगा। यह दोबारा जीवित करना उसके लिए पहली बार पैदा करने से भी आसान है, बल्कि उसके लिए दोनों ही बेहद आसान हैं। जब वह किसी चीज़ का इरादा करता है, तो बस कहता है "हो जा" और वह हो जाती है। यह बात हमारे दिलों में यक़ीन (विश्वास) पैदा करती है कि क़यामत का दिन और दोबारा जीवित होना कोई मुश्किल काम नहीं, क्योंकि जिसने पहली बार इतनी बड़ी कायनात (ब्रह्मांड) को बनाया, उसके लिए दोबारा बनाना क्या मुश्किल है?

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि उसी के लिए सर्वोच्च गुण हैं—आसमानों और ज़मीन में उसकी सिफ़ात (विशेषताएँ) सबसे बुलंद हैं। उसकी कोई मिसाल नहीं, न कोई उसके बराबर है। वह सब कुछ सुनता और देखता है, और उसके हर काम में हिकमत (समझदारी) है। वह अज़ीज़ है—जिसे कोई मात नहीं दे सकता, और हकीम है—जो हर चीज़ को सही जगह और सही तरह से करता है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की कुदरत पर भरोसा रखें। जब हमें लगे कि कोई काम बहुत मुश्किल है, तो याद रखें कि अल्लाह के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं। उसकी रहमत और ताकत असीम है। यह आयत हमें आख़िरत (परलोक) पर ईमान लाने की तरफ़ बुलाती है—कि मौत के बाद ज़िंदगी ज़रूर आएगी, और हमें अपने अमल (कर्म) का हिसाब देना है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) के मुताबिक़ बनाना चाहिए, ताकि उस दिन हम कामयाब हों। अल्लाह की सिफ़ात (गुणों) पर ग़ौर करना हमारे दिल में उसकी मुहब्बत और खौफ़ (डर) दोनों पैदा करता है—हम उससे डरें कि कहीं उसकी नाफ़रमानी न करें, और उससे मुहब्बत करें क्योंकि वही हमारा रब (पालनहार) है, जो हमें पैदा करता है, पालता है, और दोबारा ज़िंदा करेगा।



📜 आयत 25-29 — अर-रूम

25وَمِنْ آيَاتِهِ أَن تَقُومَ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ بِأَمْرِهِ ۚ ثُمَّ إِذَا دَعَاكُمْ دَعْوَةً مِّنَ الْأَرْضِ إِذَا أَنتُمْ تَخْرُجُونَ
और उसी की (क़ुदरत की) निशानियों में से एक ये भी है कि आसमान और ज़मीन उसके हुक्म से क़ायम हैं फिर (मरने के बाद) जिस वक्त तुमको एक बार बुलाएगा तो तुम सबके सब ज़मीन से (ज़िन्दा हो होकर) निकल पड़ोगे
26وَلَهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ كُلٌّ لَّهُ قَانِتُونَ
और जो लोग आसमानों में है सब उसी के है और सब उसी के ताबेए फरमान हैं
27وَهُوَ الَّذِي يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ وَهُوَ أَهْوَنُ عَلَيْهِ ۚ وَلَهُ الْمَثَلُ الْأَعْلَىٰ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
और वह ऐसा (क़ादिरे मुत्तालिक़ है जो मख़लूकात को पहली बार पैदा करता है फिर दोबारा (क़यामत के दिन) पैदा करेगा और ये उस पर बहुत आसान है और सारे आसमान व जमीन सबसे बालातर उसी की शान है और वही (सब पर) ग़ालिब हिकमत वाला है
28ضَرَبَ لَكُم مَّثَلًا مِّنْ أَنفُسِكُمْ ۖ هَل لَّكُم مِّن مَّا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُم مِّن شُرَكَاءَ فِي مَا رَزَقْنَاكُمْ فَأَنتُمْ فِيهِ سَوَاءٌ تَخَافُونَهُمْ كَخِيفَتِكُمْ أَنفُسَكُمْ ۚ كَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और हमने (तुम्हारे समझाने के वास्ते) तुम्हारी ही एक मिसाल बयान की है हमने जो कुछ तुम्हे अता किया है क्या उसमें तुम्हारी लौन्डी गुलामों में से कोई (भी) तुम्हारा शरीक है कि (वह और) तुम उसमें बराबर हो जाओ (और क्या) तुम उनसे ऐसा ही ख़ौफ रखते हो जितना तुम्हें अपने लोगों का (हक़ हिस्सा न देने में) ख़ौफ होता है फिर बन्दों को खुदा का शरीक क्यों बनाते हो) अक्ल मन्दों के वास्ते हम यूँ अपनी आयतों को तफसीलदार बयान करते हैं
29بَلِ اتَّبَعَ الَّذِينَ ظَلَمُوا أَهْوَاءَهُم بِغَيْرِ عِلْمٍ ۖ فَمَن يَهْدِي مَنْ أَضَلَّ اللَّهُ ۖ وَمَا لَهُم مِّن نَّاصِرِينَ
मगर सरकशों ने तो बगैर समझे बूझे अपनी नफसियानी ख्वाहिशों की पैरवी कर ली (और ख़ुदा का शरीक ठहरा दिया) ग़रज़ ख़ुदा जिसे गुमराही में छोड़ दे (फिर) उसे कौन राहे रास्त पर ला सकता है और उनका कोई मददगार (भी) नहीं
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अनुवाद — अर-रूम 27

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Tuesday, August 18, 2026

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