अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَبْدَأُ الْخَلْقَ: सृष्टि की शुरुआत करता है (पहली बार पैदा करता है)।
- يُعِيدُهُ: उसे दोबारा (जीवित) करता है, यानी मृत्यु के बाद दोबारा उठाना।
- أَهْوَنُ: अधिक आसान (यहाँ अर्थ है कि अल्लाह के लिए दोनों आसान हैं, लेकिन पुनः सृजन उसके लिए और भी सरल है)।
- الْمَثَلُ الْأَعْلَى: सर्वोच्च गुण/विशेषता, यानी अल्लाह के लिए सबसे उत्तम और बुलंद विशेषण है।
- الْعَزِيزُ: वह शक्तिशाली है जिसे कोई हरा न सके।
- الْحَكِيمُ: वह तत्वदर्शी है जो हर काम में पूर्ण ज्ञान और हिकमत (समझदारी) रखता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत (शक्ति) और उसके अज़ीम (महान) कामों पर ग़ौर करने की दावत देती है। अल्लाह ही वह है जो सृष्टि की शुरुआत करता है—बिना किसी पूर्व नमूने के, शून्य से सब कुछ पैदा करता है। फिर जब वह चाहता है, तो मृत्यु के बाद सबको दोबारा जीवित करेगा। यह दोबारा जीवित करना उसके लिए पहली बार पैदा करने से भी आसान है, बल्कि उसके लिए दोनों ही बेहद आसान हैं। जब वह किसी चीज़ का इरादा करता है, तो बस कहता है "हो जा" और वह हो जाती है। यह बात हमारे दिलों में यक़ीन (विश्वास) पैदा करती है कि क़यामत का दिन और दोबारा जीवित होना कोई मुश्किल काम नहीं, क्योंकि जिसने पहली बार इतनी बड़ी कायनात (ब्रह्मांड) को बनाया, उसके लिए दोबारा बनाना क्या मुश्किल है?
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि उसी के लिए सर्वोच्च गुण हैं—आसमानों और ज़मीन में उसकी सिफ़ात (विशेषताएँ) सबसे बुलंद हैं। उसकी कोई मिसाल नहीं, न कोई उसके बराबर है। वह सब कुछ सुनता और देखता है, और उसके हर काम में हिकमत (समझदारी) है। वह अज़ीज़ है—जिसे कोई मात नहीं दे सकता, और हकीम है—जो हर चीज़ को सही जगह और सही तरह से करता है।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की कुदरत पर भरोसा रखें। जब हमें लगे कि कोई काम बहुत मुश्किल है, तो याद रखें कि अल्लाह के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं। उसकी रहमत और ताकत असीम है। यह आयत हमें आख़िरत (परलोक) पर ईमान लाने की तरफ़ बुलाती है—कि मौत के बाद ज़िंदगी ज़रूर आएगी, और हमें अपने अमल (कर्म) का हिसाब देना है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) के मुताबिक़ बनाना चाहिए, ताकि उस दिन हम कामयाब हों। अल्लाह की सिफ़ात (गुणों) पर ग़ौर करना हमारे दिल में उसकी मुहब्बत और खौफ़ (डर) दोनों पैदा करता है—हम उससे डरें कि कहीं उसकी नाफ़रमानी न करें, और उससे मुहब्बत करें क्योंकि वही हमारा रब (पालनहार) है, जो हमें पैदा करता है, पालता है, और दोबारा ज़िंदा करेगा।
📜 आयत 25-29 — अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 27
सूरा अर-रूम आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह ऐसा (क़ादिरे मुत्तालिक़ है जो मख़लूकात को पहली…सूरा आयत 27/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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