Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- सुल्तान: प्रमाण, स्पष्ट तर्क, या कोई ऐसी किताब जो स्पष्ट रूप से बोलती हो।
- युशरिकून: शिर्क करना, अल्लाह के साथ किसी और को साझीदार बनाना।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन (बहुदेववादियों) से पूछ रहे हैं कि क्या हमने उन पर कोई ऐसा प्रमाण या किताब उतारी है जो उनके शिर्क (अल्लाह के साथ साझीदार बनाने) की गवाही देती हो? क्या कोई ऐसी आसमानी किताब या तर्क उनके पास है जो उनके इस कुकर्म को सही ठहराता हो? बिल्कुल नहीं! यह सवाल उन्हें शर्मिंदा करने और उनकी बुनियाद को हिलाने के लिए है। उनके पास न तो कोई आसमानी किताब है, न कोई तर्क, न कोई प्रमाण। वे सिर्फ अपनी मनमर्जी, पूर्वजों की अंधी परंपरा और निराधार कल्पनाओं के पीछे चल रहे हैं।
यह आयत बड़ी स्पष्टता से बताती है कि शिर्क और कुफ्र का कोई आधार नहीं है। अल्लाह ने हमेशा अपने रसूलों के माध्यम से सच्चाई भेजी, जो तौहीद (एकेश्वरवाद) की ओर बुलाती है। किसी भी नबी ने शिर्क की शिक्षा नहीं दी। इसलिए, जो लोग शिर्क करते हैं, वे बिना किसी सबूत के अल्लाह पर झूठ बोल रहे हैं और अपने लिए ऐसा रास्ता चुन रहे हैं जो उन्हें सिर्फ अंधकार और विनाश की ओर ले जाता है।
दावती पहलू (आमंत्रण का दृष्टिकोण):
यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने जीवन में जो भी रास्ता चुनते हैं, क्या उसके पास कोई ठोस प्रमाण है? इस्लाम एक ऐसा धर्म है जो तर्क, बुद्धि और प्रमाण पर आधारित है। अल्लाह ने कुरआन को "हुदा" (मार्गदर्शन) और "बुरहान" (प्रमाण) कहा है। जब हम कुरआन पढ़ते हैं, तो हम पाते हैं कि यह हर युग में मौजूद सवालों का जवाब देता है और दिलों को सुकून देता है। शिर्क और कुफ्र के रास्ते पर चलने वालों के पास न तो कोई किताब है, न कोई तर्क — सिर्फ अंधी परंपरा और भ्रम।
आइए हम उस सच्चाई को अपनाएं जो प्रमाण और तर्क पर आधारित है — वह है अल्लाह की इबादत और उसके रसूल ﷺ की पैरवी। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आखिरत में सफलता दिलाएगा। अल्लाह हमें सच्चाई समझने और उस पर चलने की तौफीक दे। आमीन।
📜 आयत 33-37 — सूरा अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 35
सूरा अर-रूम आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या हमने उन लोगों पर कोई दलील नाज़िल की है…सूरा आयत 35/60 — सूरा अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रूम सुनें, सूरा अर-रूम अनुवाद, सूरा अर-रूम mp3, सूरा अर-रूम pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


