अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِيَكْفُرُوا: ताकि वे कुफ़्रान (नाशुक्री) करें
- بِمَا آتَيْنَاهُمْ: उस चीज़ के साथ जो हमने उन्हें दी
- فَتَمَتَّعُوا: तो तुम मज़े कर लो (धमकी के रूप में)
- فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ: तो अनक़रीब तुम्हें पता चल जाएगा
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह तआला अपने बंदों पर किसी मुसीबत या तकलीफ़ को दूर करता है और उन्हें राहत व आराम देता है, तो कुछ लोग इस एहसान को भूल जाते हैं और उसकी नाशुक्री करते हैं। वे उन नेमतों का इन्कार करते हैं जो अल्लाह ने उन्हें दीं, और अपनी ज़िंदगी में ऐसे मस्त हो जाते हैं जैसे उन्होंने ये नेमतें अपनी ताक़त से हासिल की हों। यह आयत उन लोगों के बारे में है जो मुसीबत के वक़्त अल्लाह को पुकारते हैं, लेकिन जब अल्लाह उनकी मुसीबत दूर कर देता है, तो वे उसके एहसानों से मुँह मोड़ लेते हैं और शिर्क में पड़ जाते हैं।
अल्लाह तआला उन्हें धमकी और चेतावनी के अंदाज़ में कहता है: "तो तुम मज़े कर लो, जल्द ही तुम्हें अपने इस किए का अंजाम पता चल जाएगा।" यानी यह दुनिया की चंद रोज़ की ख़ुशी है, लेकिन आख़िरत में उन्हें ऐसा अज़ाब मिलेगा जिसका अंदाज़ा वे नहीं लगा सकते। क़यामत के दिन वे अपनी आँखों से देख लेंगे कि वे कितनी बड़ी गुमराही में थे और उनका यह कुफ़्रान उनके लिए कितना घातक साबित हुआ।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हर नेमत का शुक्र अदा करना चाहिए। जब हम पर कोई मुसीबत आती है और अल्लाह उसे दूर करता है, तो हमें उसका शुक्रिया अदा करना चाहिए और उसकी इबादत में और बढ़ जाना चाहिए। नेमतें पाकर नाशुक्री करना और अल्लाह से बेरुख़ी अपनाना बहुत बड़ी भूल है। अल्लाह तआला बहुत रहम करने वाला है, वह अपने बंदों को मौक़ा देता है, लेकिन उसकी पकड़ बहुत सख्त है। इसलिए हमें चाहिए कि हर हाल में अल्लाह का शुक्रगुज़ार बनें और उसकी नेमतों को पहचानें, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी हासिल कर सकें।
📜 आयत 32-36 — अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 34
सूरा अर-रूम आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि जो (नेअमत) हमने उन्हें दी है उसकी नाशुक्री करें…सूरा आयत 34/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 32–36. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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